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डीजीपी से बातचीत के बाद राबड़ी ने वापस ली सुरक्षा

आखिरकार बीएमपी-2 के 17 सुरक्षाकर्मियों का दस्ता राबड़ी देवी की आवास (10, सर्कुलर रोड) की सुरक्षा में तैनात हो गया।

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 03:42 AM IST

पटना. डीजीपी केएस द्विवेदी से हुई बातचीत के बाद पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने सोमवार को अपनी सुरक्षा वापस ले ली। दिन में डीजीपी ने उन्हें फोन किया था। कहा- ‘आपकी सुरक्षा बहाल कर दी गई है। आपके मुद्दे अलग हैं। नियमानुसार उसका निपटारा किया जाएगा। पर इसे लेकर सुरक्षाकर्मी परेशान हो रहे हैं। धूप में खड़े रहते हैं।...’ फिर पूर्व सीएम ने डीजीपी की बात मान ली। बोलीं- ‘आप कहते हैं तो रख लेते हैं।’ आखिरकार बीएमपी-2 के 17 सुरक्षाकर्मियों का दस्ता राबड़ी देवी की आवास (10, सर्कुलर रोड) की सुरक्षा में तैनात हो गया।


- बीते 10 अप्रैल को सीबीआई द्वारा पूर्व सीएम राबड़ी देवी व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव से हुई पूछताछ के कुछ समय बाद सुरक्षा दस्ता हटाने पर विरोध दर्ज कराते हुए राबड़ी ने सभी सुरक्षाकर्मियों को वापस भेज दिया था। इसे लेकर हुए विवादों के बीच पुलिस मुख्यालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि सुरक्षा को लेकर गठित विशेष कमेटी ने पूर्व सीएम लालू प्रसाद के न्यायिक हिरासत में होने के कारण उनकी सुरक्षा में प्रतिनियुक्त बीएमपी दस्ते को हटाया था। वहीं तीन पुलिस अफसरों के साथ सीआरपीएफ दस्ते (2 अफसर व 8 जवान) की तैनाती बरकरार रखी गई थी।

तेजस्वी ने पूछा- नए नोट सर्कुलेशन से गायब क्यों

- नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा- नोटबंदी घोटाले का असर इतना व्यापक है कि बैंकों ने हाथ खड़े कर रखे हैं। बिहार में कई दिनों से अधिकतर एटीएम बिल्कुल खाली हैं। लोगों के सामने गंभीर संकट है। जमा पैसा भी बैंक जरूरत के हिसाब से लोगों को नहीं दे रहे हैं। उन्होंने पूछा- नए नोट सर्कुलेशन से क्यों गायब हैं।

प्रतिष्ठा बचाने के लिए सीबीआई ने की चार्जशीट

- राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने रेल टेंडर घोटाले में चार्जशीट होने के बाद कहा कि अपनी प्रतिष्ठा बचाने की मजबूरी में सीबीआई ने राबड़ी जी और तेजस्वी के विरुद्ध चार्जशीट दायर किया है। अदालत में यह आधारविहीन मामला हवा की तरह उड़ जाएगा। हम इस तात्कालिक संकट का मुकाबला करेंगे और हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

- दिल्ली में मीडिया में यह बात सामने आई थी कि सीबीआई के लीगल सेल ने उसे इस मामले में एफआईआर दायर नहीं करने की सलाह दी थी, क्योंकि इसके लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले थे। अब अगर सीबीआई चार्जशीट दायर नहीं करती तो न सिर्फ उसका चेहरा काला होता, बल्कि सीएम सहित केंद्र सरकार की कलई भी खुल जाती।