पूर्णिया के डीजे ऑपरेटर घनश्याम ने मक्का और शिमला मिर्च की खेती से बदली इलाके की तस्वीर

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
  • कल तक सालाना 50 हजार रुपए भी नहीं कमा पाते थे
  • आज पांच लाख से अधिक की हो रही आमदनी

पटना (पंकज कुमार सिंह). डीजे में ऑपरेटर का काम कर सालाना 50 हजार भी नहीं कमा पाते थे और अब खेती कर कमा रहे 5 लाख से ज्यादा। बदलाव की यह कहानी युवा घनश्याम की है। पूर्णिया जिले के केनगर प्रखंड के नोनियापट्टी गांव के घनश्याम ने मक्का और शिमला मिर्च की खेती शुरू की। शेड नेट लगवाकर जब शिमला मिर्च की खेती शुरू की तो लोगों ने कहा- इस इलाके में शिमला मिर्च नहीं होगा, लेकिन घनश्याम ने सबकी बात अनसुनी कर दी और खेती की।

 

घनश्याम को देख 300 से अधिक किसानों ने उन्नत तरीके से मक्का और शिमला मिर्च की खेती शुरू कर दी है। घनश्याम के पास अपनी मात्र डेढ़ बीघा जमीन है। ढाई बीघा लीज पर जमीन ली। 100 क्विंटल मक्का का उत्पादन हुआ। उद्यमी किसान ने हैदराबाद में 45 दिनों का प्रशिक्षण लिया। 10 कट्ठा जमीन में शिमला मिर्च लगाया। मुख्य रूप से उन्नत किस्म की शिमला मिर्च के पौधे अपने शेड नेट में तैयार कर अन्य किसानों को भी ढाई रुपए पौधा की दर से बेचते हैं। घनश्याम दूसरे किसानों को उन्नत किस्म के मक्का बीज पहचान का तरीका भी बताते हैं। खेती में वे ऐसे रम गए हैं कि मक्का सुखाने वाली मशीन भी लगा ली है। इसकी सुविधा अन्य किसानों को भी मिल रही है। 

 

सालभर की जा सकती है खेती

कौशल्या फाउंडेशन ने घनश्याम को प्रशिक्षण दिलाया। फाउंडेशन के कार्यक्रम पदाधिकारी नवल किशोर झा ने बताया कि शिमला की खेती मल्चिंग तकनीक से दिसंबर जनवरी में लगाए जाते हैं। 65 से 70 दिनों में फसल तैयार हो जाता है। एक पौधे से दो से तीन किलो तक उपज होती है।

 

प्रति एकड़ 80 हजार का खर्च, मुनाफा ढाई लाख 
एक एकड़ में 12 हजार शिमला मिर्च के पौधे लगते हैं। प्रति एकड़ खेती में 75 से 80 हजार रुपए खर्च होता है। ट्रायकोडर्मा और वर्मी कंपोस्ट से बेस तैयार कर शिमला मिर्च के पौधे लगाए जाते हैं। शुद्ध मुनाफा 2 से ढाई लाख रुपए होता है। शिमला मिर्च में व्हाइट बगा और मिली बगा कीड़ा लगता है। इससे बचाव के लिए क्रांप गार्ड लगाया जाता है। इसमें लगे पीले गम में यह कीड़ा फंस जाता है। इससे कीटनाशक दवा का उपयोग नहीं करना पड़ता है।

 

मक्का उत्पादन का बना रिकॉर्ड

वर्ष 2016-17 में मक्का का कुल उत्पादन 38.46 लाख टन और उत्पादकता 53.35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है, जो रिकाॅर्ड है। 2016-17 में राज्य में मक्का उत्पादकता राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक है। बिहार में पूर्णिया में सबसे अधिक मक्का का उत्पादन होता है। कोसी व पूर्णिया प्रमंडल में सालाना 16 से 17 लाख  लाख टन मक्के का उत्पादन होता है।