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1947-2017 तक के इतिहास व गानों का गजब संगम

Patna News - अर्थशिला की ओर से बिहार म्यूजियम में ‘नोट वाई नोट द इंडियन स्टोरी 1947-2017’ कार्यक्रम का आयोजन शनिवार को किया गया। इस...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 04:45 AM IST
Patna News - good confluence of history and songs up to 1947 2017
अर्थशिला की ओर से बिहार म्यूजियम में ‘नोट वाई नोट द इंडियन स्टोरी 1947-2017’ कार्यक्रम का आयोजन शनिवार को किया गया। इस अवसर पर भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक व राजनैतिक पहलुओं को 1947-2017 तक के सफर को दिखाया गया। ऐतिहासिक पल के समय के गानों को सामने लाया गया। यह अर्थशिला का बिल्कुल नया प्रयोग है जिसकी सराहना हर किसी ने की। 70 वर्षों के दरम्यान बीते इतिहास को तीन पत्रकारों ने बेहतर समझ के साथ लिखा है और दर्शकों के सामने काफी बेहतरीन तरीके से दिखाया भी। ये तीन पत्रकार अंकुर भारद्वाज, सीमा चिस्तीन व सुशांत सिंह हैं। इन्होंने 1947- 2017 तक के गाने और हरेक वर्ष में बीते इतिहास को चुना और सभी के सामने उसके मतलब भी बताए।

सबसे पहले 1947-1949 में बरसात फिल्म के नैनो से एक तारा टूटे मिट्टी में मिल जाए हो...मिट्टी में मिल जाए..., इसके बाद 1950 में ‘सुहाना सफर’ के वक्त ने किया हंसी..., जैसे गानों के मतलब को विस्तार में बताया। उन्होंने कहा कि हर एक दशक में ऐसा गाना गाया गया है जिससे सभी की यादें जुड़ी हों। ...जिया बेकरार है, जैसे गानों में खिलखिलाता हुआ और अफसाना दिखता है। गांधी जी की हत्या के बाद फिल्म ‘घर की इज्जत’ में इन्हें विस्तार से दिखाया गया है। उन्होंने बताया कि राज कपूर, दिलीप कुमार व देवानंद के गाने काफी मशहूर हुआ करते थे।

अर्थशिला ने किया ‘नोट वाई नोट द इंडियन स्टोरी 1947-2017’ आयोजन

बिहार म्यूजियम के कार्यक्रम में मौजूद पत्रकार इतिहास और गानों पर बात करते हुए।

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