बिहार / प्रदेश के साथ बढ़ रहा बैंकों का भेदभाव कर्ज न देने पर सरकार ने लगाई फटकार

बैठक में डिप्टी सीएम और वित्त विभाग के प्रधान सचिव। बैठक में डिप्टी सीएम और वित्त विभाग के प्रधान सचिव।
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बैठक में डिप्टी सीएम और वित्त विभाग के प्रधान सचिव।बैठक में डिप्टी सीएम और वित्त विभाग के प्रधान सचिव।

  • बिहारियों के 363483 करोड़ बैंकों में जमा, पर कर्ज मिले 149293 करोड़
  • राज्यस्तरीय बैंकर्स कमेटी की बैठक में बैंकों के रवैये की सामने आई तस्वीर

दैनिक भास्कर

Feb 08, 2020, 08:10 AM IST

पटना. बिहार के साथ बैंकों का भेदभाव बढ़ता ही जा रहा है। लगातार 3 साल से राज्य में कर्ज देने की रफ्तार घटती जा रही है। बिहार के लोगों को कर्ज देने की रफ्तार (एनुअल क्रेडिट प्लान) 66.56% से घट 54.58% पर आ गई है। इस रवैए को लेकर राज्य सरकार ने बैंकों को फटकार लगाई है। उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को स्टेट लेवल बैंकर्स कमिटी (एसएलबीसी) की 71वीं बैठक में बैंकों के भेदभावपूर्ण रवैये की पूरी तस्वीर सामने आ गई।

चालू वित्तीय वर्ष में दिसंबर तक साख जमा अनुपात की तस्वीर तो और भी भयावह

पता चला कि बिहार के लोगों ने बैंक शाखाओं में 363483 करोड़ रुपए जमा किए लेकिन बैंकों ने राज्य के लोगों को सिर्फ 149293 करोड़ रुपए कर्ज दिए। चालू वित्तीय वर्ष में दिसंबर तक साख जमा अनुपात की तस्वीर तो और भी भयावह है। बैंकों ने तय किए गए लक्ष्य 1.45 लाख करोड़ रुपए की तुलना में सिर्फ 79198 करोड़़ रुपए ही कर्ज दिए हैं। यह लक्ष्य का 42.48 फीसदी है। पिछले वर्ष दिसंबर तक यह अनुपात 45.18 फीसदी था।

बैंकों ने एनपीए का रोना रोया, पता चला कि बिहार में यह राष्ट्रीय औसत से कम 
बैठक में उपमुख्यमंत्री मोदी के साथ कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार और वित्त विभाग के प्रधान सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ ने जब-जब साख जमा अनुपात और एनुअल क्रेडिट प्लान बढ़ाने की आवश्यकता जताई तब-तब बैंक अधिकारी नन परफाॅर्मिंग एसेट (एनपीए) की खराब हालत का रोना रोने लगे। हालांकि समीक्षा के दौरान यह बात भी सामने आ गई कि बिहार में एनपीए 11.5 फीसदी है जबकि राष्ट्रीय औसत 12 फीसदी है। बैंकों का जब यह दाव भी फेल हो गया तो वे मार्च तक हर हाल में सीडी रेशियो को बढ़ाने का भरोसा दिलाने लगे।   

बैंक शाखा मामले में भी बिहार पिछड़ा
बिहार में लगभग 16 हजार की आबादी पर एक बैंक शाखा है जबकि राष्ट्रीय औसत 11 हजार की आबादी पर एक बैंक शाखा का है। राज्य में बैंक शाखाओं की संख्या 7508 है। इसमें ग्रामीण शाखाओं की संख्या 3677 है। यह स्थिति तब है जब राज्य की 89 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। 

ऐसे घटी कर्ज देने की गति

दिसंबर 2017 : 66.56%
दिसंबर 2018 : 57.40%
दिसंबर 2019 : 54.58%

बैंक कर्ज देने के मामले में सबसे खराब जिले : बांका, अरवल, जहानाबाद, शिवहर, नालंदा, गोपालगंज, मधुबनी, मधेपुरा और भागलपुर

12 से एक पखवाड़े तक केसीसी शिविर 60 लाख किसानों को मिलेगा कार्ड
उपमुख्यमंत्री मोदी ने कहा कि केसीसी की हालत सुधारने के लिए 12 फरवरी से पूरे राज्य में एक पखवाड़े तक शिविर लगाया जाएगा। इसमें पीएम किसान योजना में निबंधित बिहार के 60 लाख किसानों को केसीसी दिया जाएगा। इसके अलावा पुराने किसानों के केसीसी का भी रिनुअल किया जाएगा। बिहार में इस वर्ष 10 लाख नए किसानों को केसीसी देने का लक्ष्य है लेकिन बैंकों से दिसंबर तक सिर्फ 1.2 लाख किसानों को ही केसीसी मिला है।

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