ग्राउंड रिपोर्ट / पार्टी बदलकर मैदान में उतरे शत्रुघ्न को रविशंकर की चुनौती

Dainik Bhaskar

May 18, 2019, 05:27 AM IST



Ground Report from Patna Sahib Lok Sabha seat
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Ground Report from Patna Sahib Lok Sabha seat

  • भाजपा की परंपरागत सीट पर कांग्रेस से टक्कर
  • पटना साहिब में 19 मई काे मतदान होना है

पटना (प्रमोद मुकेश). सबसे ज्यादा समय तक चले प्रचार अभियान के बाद पटना साहिब में 19 मई काे मतदान हाेगा। चुनावी रंगमंच पर दाे स्टार के बीच मुकाबला है। भाजपा से केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और कांग्रेस से सिने स्टार शत्रुघ्न सिन्हा। शत्रुघ्न सिन्हा 2009 और 2014 में भाजपा के टिकट पर यहां से सांसद बने थे। लेकिन इस बार वह कांग्रेस के उम्मीदवार हैं।

 

बिहारी बाबू बार-बार कहते रहे कि चाहे सिचुएशन काेई भी हाे, मेरा लाेकेशन नहीं बदलेगा और पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर उन्हाेंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। उधर भाजपा ने राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद काे अपना उम्मीदवार बनाया है। छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रविशंकर प्रसाद ने उम्मीदवार बनाए जाने के बाद से ही क्षेत्र में सघन जनसंपर्क अभियान चलाया। शुरुआत से ही पटना साहिब में भाजपा ने जाेर-शाेर से प्रचार किया। वैसे पटना साहिब के 6 विधानसभा क्षेत्राें में भाजपा के पांच विधायक हैं।

 

शहरी कैडर वाेट और पार्टी के बेहतर सांगठनिक ढांचे के कारण यहां भाजपा काे बढ़त हासिल है। रविशंकर प्रसाद काे अपनी बेदाग छवि का लाभ मिलेगा। 2014 में माेदी लहर पर सवार शत्रुघ्न सिन्हा यहां से जरूर जीते थे, लेकिन उस समय जदयू से डाॅ. गाेपाल प्रसाद सिन्हा भी मैदान में थे। अब समय बदल चुका है। एनडीए के साथ जदयू है और इसका लाभ भी भाजपा प्रत्याशी काे मिलेगा। एनडीए और महागठबंधन अपने-अपने वाेट बैंक काे साधने की काेशिश में हैं। वैसे यह ताे 23 मई काे मतगणना के दिन ही पता चल सकेगा कि पटना साहिब की जनता किसकी आवाज बनती है और किसे ‘खामाेश’ करती है।

 

रविशंकर प्रसाद, भाजपा: चारा घोटाले के मामले में पटना हाईकोर्ट में पीआईएल कर अगस्त 1996 में लाइमलाइट में आए। 2000 में वे पहली बार राज्यसभा गए। केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार में मंत्री।

 

शत्रुघ्न सिन्हा, कांग्रेस: शत्रुघ्न सिन्हा दो बार राज्यसभा और दो बार लोकसभा के सदस्य रहे। 1996 से 2008 तक वे राज्यसभा सदस्य रहे। केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे। अब भाजपा छोड़कर कांग्रेस में।

 

कायस्थ वोटरों पर दावा

पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा दाे बार सांसद रहे, पर उनकी उपस्थिति बहुत कम दिखी है। पिछली बार भी नाराजगी मुखर थी, लेकिन नमाे लहर का लाभ मिला था। इस बार भी नाराजगी थी। पाला बदलने के कारण इसे और बल मिला। दल बदलने के कारण उन्हें बागी तेवर का लाभ नहीं मिलेगा। जदयू के विधान पार्षद रणवीर नंदन कहते हैं कि समाज का एक-एक वाेट नमाे-नीतीश के पक्ष में जाएगा।

 

शहरी क्षेत्रों में भाजपा का जोर

2009 में परिसीमन से पूर्व भी पटना भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है। 6 विधानसभा क्षेत्राें में 5 एमएलए भाजपा के हैं। शहरी मतदाताओं में गहरी पैठ है। सवर्ण, व्यापारी वर्ग और अतिपिछड़ाें का लाभ एनडीए काे मिलेगा। कायस्थ मतदाता काफी संख्या में हैं और इसका झुकाव एनडीए की तरफ है। यहां भी नमाे-नीतीश का लाभ मिलेगा। शहर में बनिया समुदाय की अच्छी संख्या है, जो परंपरागत रूप से भाजपा को वोट देते रहे हैं। इसका लाभ भी उसे मिलेगा। भाजपा प्रत्याशी रविशंकर प्रसाद के पक्ष में पटना शहर में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का राेड शाे हुआ।

 

महागठबंधन के पक्ष में माय

महागठबंधन के साथ माय समीकरण है। उपेंद्र कुशवाहा, मुकेश सहनी और जीतनराम मांझी का भी लाभ महागठबंधन काे मिलेगा। कायस्थ उम्मीदवार के कारण सजातीय वाेट साधने की काेशिश है। कायस्थ संगठनाें के असंतुष्ट गुटाें का भी साथ मिलेगा। शत्रुघ्न सिन्हा की स्टार छवि का लाभ भी मिलेगा। माय समीकरण के अलावा कुशवाहा, सहनी और अतिपिछड़े वाेट मिलने की उम्मीद है, क्याेंकि अब उपेंद्र कुशवाहा और जीतनराम मांझी महागठबंधन में हैं। शुरुआती प्रचार में पिछड़ने के बाद महागठबंदन ने भी जोर लगाया। राहुल गांधी शत्रुघ्न के पक्ष में रोड शो कर चुके हैं।

 

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जातीय समीकरण

 

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2014 लोकसभा

 

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