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मुजफ्फरपुर / बालिका गृह में रहने वाली बच्चियों की वीभत्स दास्तान, बेहोश कर किया जाता था दुष्कर्म

The ghastly stories of the girls living in the girl's house, they were raped unconsciously
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The ghastly stories of the girls living in the girl's house, they were raped unconsciously

  • बालिका गृह में बच्चियों को रात में नशीली दवाएं देकर बेहोश कर दिया जाता था
  • बच्चियां सुबह जगती थी, तो उन्हें अंगों में तेज दर्द का अहसास होता था

Dainik Bhaskar

Jan 28, 2020, 06:00 AM IST

पटना. बेहतर जिंदगी की उम्मीद में मुजफ्फरपुर के बालिका गृह पहुंची या पहुंचाई गई भटकी, बिछुड़ी, यतीम बच्चियों की चीख बंद कमरे में गूंजती रहीं और दरिंदे उन्हें नोंचते रहे, उनसे खेलते रहे। यह वही लोग थे जिन पर बच्चियों को संवारने, सुधारने का जिम्मा था। खुद को मानिंद मानने वाले इन चेहरों को देखते ही बच्चियां सिहर उठती थीं। क्या कुछ नहीं होता था उनके साथ। इन दरिंदों को आज उनके किए की सजा मिलेगी।

बच्चियों की वीभत्स दास्तान
ब्रजेश की राजदार मधु, बालिका गृह की अधीक्षक इंदु कुमारी और अन्य महिला कर्मचारी को कोर्ट ने सजा दी है। ये महिला कर्मी बच्चियों के साथ यौन हिंसा करने के साथ मारपीट तक करती थी। कई महिला कर्मियों पर बच्चियों से होमो सेक्स करती थी। गंभीर रूप से बीमार होने पर भी बच्चियों को लंबे समय तक बालिका गृह में दवाएं देकर रखा जाता था। बच्चियां जब दुष्कर्म के कारण दर्द की शिकायत करती थी तो कथित डॉक्टर अश्विनी व डॉ. प्रमीला बच्चियों को दवाएं देकर चुप करा देते थे।

बेहोश कर बच्चियों के साथ करते थे दुष्कर्म
बालिका गृह में बच्चियों को रात में नशीली दवाएं देकर बेहोश कर दिया जाता था। इसके बाद बच्चियों के कमरे में ब्रजेश ठाकुर एवं अन्य आरोपी पहुंचते थे। दुष्कर्म किया जाता था, बच्चियां सुबह जगती थी, तो उन्हें अंगों में तेज दर्द का अहसास होता था। जालीदार कपड़ा पहना कर अश्लील गानों पर डांस कराया जाता था। पॉर्न वीडियो दिखाकर सेक्स करने के लिए बच्चियों को मानसिक रूप से तैयार किया जाता था।

6-18 साल की बच्चियां था बालिका गृह में
बालिका गृह में 6 वर्ष से 18 वर्ष के नीचे तक की किशोरियों को रखा जाता था। बालिका गृह में रह रही किशोरियों को यातना देकर यौन शोषण किया जा रहा था। बालिका गृह में बेशर्मी की सारी हदें पार हो गई थीं। पुरुष ही नहीं महिलाएं भी बालिकाओं को होमो-सेक्स की शिकार बना रही थीं। बाहर से भी शोषण के लिए बालिका गृह में लोग पहुंचते थे। हर मंगलवार को विकास और उसके साथ बालिका गृह में समिति की ओर से शिविर में पहुंचने वाले सदस्य किशोरियों का यौन शोषण करते थे। मंगलवार की सुबह से ही किशोरियां सहमी रहती थीं। इन्हें दिन भर दर्द से गुजरना पड़ता था।

किशोरियों ने अपने बयान में कहा था कि रात में एक अंटी (बालिका गृह में कार्यरत) कीड़ा की दवा बताकर टैबलेट खिलाती थी। दवा खाते ही नींद आ जाती थी। सुबह उठने पर पेट, बदन व अन्य अंगों में दर्द होता था। इसकी शिकायत करने पर डांट-फटकार व पिटायी की जाती थी। किशोरियों ने यौन उत्पीड़न व मारपीट करने वालों की पहचान हेड सर, सर, पेट वाले सर, लंबे सर, मूंछ वाला पुलिस, आंटी, दीदी जैसे शब्दों से किया था। बालिका गृह में किशोरियों को मिर्गी के मरीजों को लगने वाली सूई देकर बेहोश कर दुष्कर्म किया जाता था। किशोरियों के इलाज के नाम पर बालिका गृह के ऊपर एक कमरा बना था। इसी कमरे में घिनौनी हरकत की जाती थी। 

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