• Home
  • Bihar
  • Patna
  • Patna - राजभवन की ओर से जारी किया गया है दिशा निर्देश
--Advertisement--

राजभवन की ओर से जारी किया गया है दिशा निर्देश

बिहार के विश्वविद्यालयों में परीक्षा कार्य को पूरा कराने की जिम्मेदारी अब प्रति कुलपतियों के जिम्मे होगी। पूर्व...

Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 04:35 AM IST
बिहार के विश्वविद्यालयों में परीक्षा कार्य को पूरा कराने की जिम्मेदारी अब प्रति कुलपतियों के जिम्मे होगी। पूर्व में भी प्रति कुलपतियों को परीक्षा कार्य देखने की जिम्मेदारी दी जाती रही है। लेकिन, कुलपतियों के विश्वविद्यालय पर एकाधिकार जमाए जाने के कारण यह पद निष्क्रिय हो गया है। कई विश्वविद्यालयों से रिपोर्ट ऐसी है कि प्रति कुलपति कार्यालय आते हैं। दिन भर बैठ कर वापस चले जाते हैं। उनके पास करने को कोई काम ही नहीं दिया जाता है। दूसरी तरफ, विश्वविद्यालय के अन्य विभागों में काम का बोझ काफी ज्यादा है। ऐसे में नियमों के आधार पर प्रति कुलपति को जो कार्य मिलने चाहिए, वह क्यों नहीं मिल रहे? इस सवाल पर मंथन शुरू हुआ तो विश्वविद्यालय के सिस्टम में ही स्पष्ट आदेश न होने की बात कही गई।

बिहार के करीब आधे विश्वविद्यालयों में परीक्षा कैलेंडर स्पष्ट नहीं है। वहीं, चार विश्वविद्यालयों में तो परीक्षा काफी लेट से चल रही है। दो-तीन विश्वविद्यालय ही हैं, जहां परीक्षा कैलेंडर को सही माना जा सकता है। ऐसे में राजभवन के स्तर पर समीक्षा हुई तो असली दिक्कत सामने आई। प्रति कुलपतियों से उनका मूल काम न लिए जाने की दिक्कत। अब इस परेशानी का हल ढूंढ़ने की कोशिश शुरू कर दी गई है। नए कुलाधिपति सह राज्यपाल लालजी टंडन ने भी विश्वविद्यालयों की ओर से हो रही कोशिशों को और तेज करने पर जोर देना शुरू कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उच्च शिक्षा का माहौल सुधारना ही होगा। इसके लिए सबसे अधिक जरूरी सत्र को सुधारना है। सत्र को सुधारने के लिए परीक्षा कैलेंडर का अनुपालन हर हाल में कराना होगा। अब परीक्षा कैलेंडर को दुरुस्त करने के लिए प्रति कुलपति को जिम्मेदार बना दिया गया है। कुलाधिपति भी इस मुद्दे पर अब प्रति कुलपति से सवाल करेंगे। अभी तक परीक्षा से संबंधित जानकारी भी कुलपति से ही मांगी जाती रही है। माना जा रहा है कि इससे विश्वविद्यालयों के परीक्षा कैलेंडर को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।

प्रति कुलपति को मिली विश्वविद्यालयों में समय पर परीक्षा कराने की जिम्मेदारी

समीक्षा बैठक में खुला मामला

राजभवन के स्तर पर पिछले दिनों विश्वविद्यालयों के प्रति कुलपतियों की समीक्षा बैठक आयोजित कराई गई थी। इसमें उनके कामकाज की समीक्षा शुरू हुई तो अधिकांश प्रति कुलपति ने विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से काम न मिलने की शिकायत कर दी। 31 अगस्त को हुई इस बैठक में प्रति कुलपति ने कुलाधिपति कार्यालय को अपनी परेशानी से अवगत कराया। इसके बाद राजभवन को इस संबंध में विचार-विमर्श हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी विश्वविद्यालय के कुलपतियों को पत्र लिखकर राजभवन ने निर्देश जारी कर दिया है।

परीक्षा कैलेंडर दुरुस्त कराना सबसे जरूरी

राजभवन की ओर से कहा गया है कि विश्वविद्यालय की कार्य व्यवस्था में प्रति कुलपति की अपेक्षाकृत सहभागिता नहीं ली जाती है। इस कारण विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण कार्यों के समय पर निष्पादन में कठिनाई होती है। विश्वविद्यालय के प्रशासनिक हित को ध्यान में रखते हुए कुलपति विश्वविद्यालय के परीक्षा समिति में आमंत्रित सदस्य के रूप में प्रति कुलपति को सम्मिलित करें। परीक्षा आयोजित करने व रिजल्ट प्रकाशन आदि कार्यों में प्रति कुलपति का अपेक्षित सहयोग लेने के लिए उन्हें अधिकृत करें। राजभवन ने साफ कर दिया है कि परीक्षा कैलेंडर को दुरुस्त करना सबसे अधिक जरूरी है। इस कार्य के लिए प्रति कुलपति को जिम्मेदारी दी जाए, जिससे कि परीक्षा कैलेंडर को दुरुस्त बनाने में मदद मिल सके।

चार विश्वविद्यालयों में परीक्षा सत्र है काफी लेट

राज्य के चार विश्वविद्यालयों में परीक्षा सत्र काफी लेट चल रहा है। इस कारण यहां के विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जेपी यूनिवर्सिटी छपरा व बीआरए बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर में परीक्षा सत्र करीब दो साल लेट है। वहीं बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा में डेढ़ साल और तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में एक साल लेट से सत्र चल रहा है। अन्य विश्वविद्यालयों में भी आधा से एक साल के बीच सत्र विलंब से चल रहा है। पूर्व कुलाधिपति सत्यपाल मलिक के समय में परीक्षा सत्र को नियमित करने के लिए जिस स्तर से विश्वविद्यालयों पर दबाव बनाया गया था। उसे आगे भी जारी रखने का निर्णय लिया गया है। परीक्षा के लिए अलग से पदाधिकारी को जिम्मेदारी मिलने के बाद इस कार्य को शीघ्र पूरा कराने में मदद मिलेगी, ऐसा राजभवन का मानना है।