ठंड में हार्टअटैक, ब्रेन स्ट्रोक का खतरा अधिक, बरतें सावधानी

Patna News - ठंड के मौसम में हार्ट, बीपी और शुगर के मरीज को सावधान रहना चाहिए। क्योंकि इस मौसम में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक...

Nov 17, 2019, 09:22 AM IST
Patna News - heart attack in cold high risk of brain stroke be careful
ठंड के मौसम में हार्ट, बीपी और शुगर के मरीज को सावधान रहना चाहिए। क्योंकि इस मौसम में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक (लकवा) के मामले बढ़ जाते हैं। सावधानी सबको बरतनी चाहिए। पर जो लोग इसके मरीज हैं उन्हें विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत होती है। ठंड में बीपी 30 से 40 बढ़ जाता है। बीपी की दवा कतई नहीं बंद करना चाहिए। जो मरीज बीपी की दवा लेते हों उन्हें अपने चिकित्सक से मिलकर दवा एडजस्ट करा लेनी चाहिए। यदि बीपी बढ़ा हुअा हो तो दवा का डोज भी बढ़वा लेना चाहिए। क्योंकि बीपी को हर हाल में नियंत्रित रखने की जरूरत होती है। बीपी नियंत्रित नहीं रहने पर हार्ट अटैक और लकवा का खतरा बढ़ जाता है। यह कहना है अाईजीअाईएमएस में कार्डियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बीपी सिंह का। वे शनिवार को दैनिक भास्कर के हेल्थ काउंसिलिंग में पाठकों को सलाह दे रहे थे।

उन्होंने कहा कि बीपी और शुगर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। दिल और बीपी के मरीज मरीज को ठंड अधिक हो तो सुबह में टहलने नहीं निकलना चाहिए। धूप निकलने पर टहलने निकलने चाहिए या फिर शाम को टहलने निकलना चाहिए। इस मौसम में खानपान पर नियंत्रण रखना चाहिए। जाड़े के मौसम में अधिक तेलीय पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए। गरिष्ठ भोजन से परहेज करना चाहिए। इसके अलावा रात में हल्का भोजन और सुपाच्य भोजन करना चाहिए। अधिक नमक का सेवन भी नहीं करना चाहिए। अधिक नमक के सेवन भी बढ़ने का खतरा रहता है। वैसे पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए जिसमें नमक की मात्रा अधिक हो। जैसे अाचार, पापड़ अादि। खानपान में गड़बड़ी होने से शुगर का लेवल बढ़ने का खतरा रहता है। बीपी और शुगर दोनों ही साइलेंट किलर है। कोशिश होनी चाहिए कोल्ड एक्सपोजर नहीं लगे। ठंड में सुबह अचानक कमरे से बाहर नहीं निकले। बिस्तर से उठने के बाद थोड़ा सामान्य होने के बाद ही बाहर निकले। ठंड में हल्का सुष्म पानी से स्नान करना चाहिए। खासकर दिल या फिर बीपी के मरीज को ठंडा पानी से स्नान नहीं करना चाहिए। जाड़े में ठंडा पानी से स्नान करने पर बीपी बढ़ सकता है। इसलिए एेसी गलती नहीं करनी चाहिए। ठंड में निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। दमा के मरीज को भी इस मौसम में सावधान रहना चाहिए। सीने में दर्द, पसीना अाना, बेचैनी अादि की शिकायत हो तो तुरंत चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। इसे गैस समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।



डॉ. बीपी सिंह विभागाध्यक्ष, कार्डियोलॉजी विभाग, अाईजीअाईएमएस


ईको जांच करके देखना होगा। जांच का लीजिए।


ईसीजी, टीएमटी और ईको जांच करानी होगी। इसके बाद पता चलेगा कि अाखिर धड़कन बढ़ने का कारण क्या है।


ईसीजी कराकर देखना होगा। यह समस्या गैस के कारण भी हो सकती है। पर जांच करा लीजिए।


तेज चलने पर सीने दर्द, सीढ़ी चढ़ने सांस का फूलना, धड़कन का बढ़ जाना अादि प्रमुख है। इस तरह के लक्षण मिलने पर ईसीजी, टीएमटी और इको जांच करा लेनी चाहिए।


धूम्रपान छोड़ दीजिए और जल्द विशेषज्ञ चिकित्सक सलाह लें।

इन्होंने भी किया फोन

संतोष कुमार (पटना), मनोज गुप्ता (बिक्रम), चंद्रकांत शर्मा (बाढ़), प्रदीप कुमार (पटना), राजेंद्र सिंह (मोकामा), प्रदीप कुमार (पटना), अजय कुमार (भीखाचक), अोमप्रकाश कुमार (बोरिंग रोड), रंजीत कुमार (दानापुर), रंजन सिंह (अारा), विमलेंदु कुमार (पुनाईचक), हरि मोहन प्रसाद (अनिसाबाद), दीपक कुमार सिंह (मलाही पकड़ी), रोशन लाल गुप्ता (राजगीर), अनामिका (बोरिंग रोड), रामनाथ मिश्रा (पुनाईचक), नीलम देवी (पाटलिपुत्रा कॉलोनी), विष्णुदत्त सिंह (बख्तियारपुर)।

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