हाईकोर्ट / न योग्य बताया न अयोग्य पर नहीं दी सहायक प्रोफेसर की नौकरी, बीपीएससी व सरकार पर जुर्माना



High court fined BPSC and Bihar government
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High court fined BPSC and Bihar government

  • कोर्ट ने राज्य सरकार व बिहार लोक सेवा आयोग को 25 लाख रुपए हर्जाना देने के लिए कहा
  • विभाग में महीनों घूमती रही योग्यता की फाइल, नहीं निकाली जा सकी कोई कमी

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2019, 04:38 AM IST

पटना. संजीव कुमार ने सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए परीक्षा पास की; उनके पास उच्च तकनीकी शिक्षा की डिग्री भी थी, लेकिन उनकी नियुक्ति नहीं हुई। पटना हाईकोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार व बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को संजीव को कम से कम 25 लाख रुपया हर्जाना देने के लिए कहा।

 

कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि संजीव की योग्यता की जांच की फाइल, विशेषज्ञों की राय के लिए विज्ञान प्रावैधिकी विभाग में महीनों घूमती रही, पर अंतत: इसमें कोई कमी नहीं बताई जा सकी और न ही संजीव नियुक्त हुए। न्यायमूर्ति डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय की एकलपीठ ने संजीव की रिट याचिका को सुनते हुए माना कि एक उच्च शिक्षा प्राप्त इंजीनियर के कॅरियर के साथ सरकारी महकमे ने खिलवाड़ किया है।

 

कोर्ट ने कहा-‘विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग तथा बीपीएससी मिलकर 25 लाख रुपए का हर्जाना दे।’ याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि बीपीएससी ने सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए 2016 में विज्ञापन निकाला था। उन्होंने आवेदन किया। आयोग ने उनकी योग्यता के बारे में अपने एक्सपर्ट से राय ली। एडमिट कार्ड जारी किया। उन्होंने परीक्षा पास की। लेकिन, आयोग ने नियुक्ति की अनुशंसा करने की बजाय उनकी योग्यता पर सवाल खड़ा कर दिया।

 

इस बारे में विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग से राय मांगी। इसकी फाइल विभाग में घूमती रही, इस बीच नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो गई। उनकी नियुक्ति नहीं हुई। कोर्ट ने विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग के निदेशक तथा बीपीएससी के सचिव से पूछा है कि किस परिस्थिति में परीक्षा पास किए जाने के बाद भी संजीव को अयोग्य बताया गया?

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