बिहार / आईआईटी पटना में बनाया गया हाइड्रोजन सेंसर, गैस लीकेज को आसानी से पकड़ेगा, करेगा अलर्ट

हाईड्रोजन सेंसर बनाने वाली टीम। हाईड्रोजन सेंसर बनाने वाली टीम।
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हाईड्रोजन सेंसर बनाने वाली टीम।हाईड्रोजन सेंसर बनाने वाली टीम।

  • यह सेंसर गैस लीकेज को आसानी से डिटेक्ट कर सकता है, गैस लीक होने पर अलर्ट देगा
  • हाइड्रोजन गैस अगर कहीं लीक होती है तो यह पता नहीं चल पाता है, जिससे दुर्घटना हो जाती है

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2020, 10:07 AM IST

पटना. आईआईटी पटना में कम लागत वाले लचीले और पहनने योग्य हाइड्रोजन सेंसर का निर्माण किया गया है। यह सेंसर गैस लीकेज को आसानी से डिटेक्ट कर सकता है। अगर कहीं पर भी गैस लीक हो रही है तो सेंसर अलर्ट कर देगा। जिससे इससे होनेवाले नुकसान को रोका जा सकेगा। सेंसर निर्माण टीम में शामिल दीपक पुनेथा ने बताया कि हाइड्रोजन गैस अगर कहीं लीक होती है तो यह पता नहीं चल पाता है। देश व दुनिया में इससे कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, इसलिए हमलोगों ने ऐसा सेंसर बनाया है जो एक अरब से एक पार्टिकल को भी डिटेक्ट कर सकता है। सेंसर की संवेदनशीलता 100 पार्ट पर मिलियन (पीपीएम) पर 49.2 प्रतिशत तथा 1000 पीपीएम पर 71.4 प्रतिशत है।

इसकी कीमत 15 रुपए के आसपास है

इस टीम में दीपक के अलावा मनोरंजन कर व सौरव कुमार पांडेय हैं। उन्होंने बताया कि पहली बार एक नई तरह की कम लागत और लचीले बहुलक आधारित नैनोकॉम्पोसाइट मोटी फिल्म गैस सेंसर का पता लगाया गया है। इसकी कीमत 15 रुपए के आसपास है। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन भविष्य में बिजली उत्पादन के लिए अपनी प्रचुर और पोर्टेबल प्रकृति के कारण अच्छा ऊर्जा वाहक है। यह सेमी कंडक्टर प्रोसेसिंग, मेटल स्मेल्टिंग, पेट्रोलियम निष्कर्षण, ग्लासमेकिंग और रासायनिक उद्योग में इसके मजबूत कम करने वाले गुणों के कारण है। इसके अलावा, हाइड्रोजन को बायोमेडिकल, पर्यावरण संरक्षण और कुछ प्रकार के जीवाणु संक्रमण के संकेत के लिए भूकंपीय निगरानी के लिए नियोजित किया जा सकता है। हालांकि, इसके अस्थिर और बेहद ज्वलनशील प्रकृति के कारण इसके उपयोग प्रतिबंधित हैं। क्योंकि किसी भी सिस्टम से वायुमंडल में हाइड्रोजन का एक छोटा रिसाव बहुत खतरनाक हो सकता है।

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