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हम डॉक्टर नहीं होते और ऐसा प्रेम नहीं होता तो उस सदमे के बाद सिर्फ डिप्रेशन ही होता

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 04:42 AM IST

Patna News - हमारी शादी 2012 में हुई। अगले साल जब गंगटोक घूमने गए तो मैं इनके साथ दिल्ली में अपने मायके भी गई। यहीं मुझे जोर का...

Patna News - if we are not a doctor and do not have such love then only that would be depression after that shock
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हमारी शादी 2012 में हुई। अगले साल जब गंगटोक घूमने गए तो मैं इनके साथ दिल्ली में अपने मायके भी गई। यहीं मुझे जोर का चक्कर आया। एक नहीं, बार-बार। ऐसा कि बेहोश हो जाती थी। डॉक्टर फैमिली है। सारे एक्टिव हो गए। बीपी थोड़ा लो था, लेकिन हीमोग्लोबिन की जांच से होश उड़ गए। हीमोग्लोबिन रेंज 12 के आसपास रहना चाहिए था और था चार।

इसी समय पटना के आकाश इंस्टीट्यूट में मेरा इंटरव्यू भी था, सो आना पड़ा। यहां अल्ट्रासाउंड कराया तो पता चला कि इक्टोपिक प्रेग्नेंसी है। ऐसी प्रेग्नेंसी में बच्चा यूटेरस में ग्रो करने की बजाय फैलोपियन ट्यूब में ग्रो करता है। इससे फैलोपियन ट्यूब के डैमेज होने का खतरा रहता है। कई डॉक्टरों ने सलाह दी कि सर्जरी करनी पड़ेगी। दोनों कुछ फैसला ले पाते, तभी पता चला कि फैलोपियन ट्यूब को तोड़ कर बच्चे का अबॉर्शन हो गया है। इंटरनल ब्लीडिंग काफी हुई। डॉक्टर्स की राय थी कि दोबारा भी ऐसी ही प्रेग्नेंसी हो सकती है या अब मां बनना मेरे लिए संभव नहीं। यह बेहद डराने वाला दौर था। मैं डिप्रेशन की ओर जा रही थी, लेकिन मेरे हसबैंड डॉ. विनीत ने हर पल हिम्मत दी। खुद डेंटिस्ट हैं और डॉक्टर्स के बीच में रहते हैं, इसलिए जानते थे कि डिप्रेशन से निकालने और नॉर्मल लाइफ के लिए हार्मोंस का क्या रोल है। यहां साइंस भी था और सच्चे प्यार का संयोग भी। हम दोनों डॉक्टर नहीं होते तो शायद दोनों ही नहीं संभल पाते। प्यार-समर्पण की मजबूत डोर को साइंस का साथ मिला। वे मुझे खुद से ही इंजेक्शन देते थे। तीन-चार अल्ट्रासाउंड वालों की राय अलग थी। तीन-चार डॉक्टरों की राय भी इसी तरह अलग थी। साइंस कभी पॉजिटिव तो कभी निगेटिव डायरेक्शन दे रहा था, लेकिन हमारा प्रेम हमेशा हमें पॉजीटिविटी की ओर ले जाता रहा। दवा और डॉक्टरों की मदद बहुत काम आई। एक साल के बाद प्रेग्नेंट हुई और बच्चा नॉर्मल रहा। बेटी का जन्म हुआ। अलंकृता आज चार साल की है। आशियाना स्थित अपने घर में ही नहीं, बल्कि हर जगह, हर पल और खासकर अलंकृता के साथ खेलते-घूमते हुए उन दिनों की याद हमें प्रेम की ताकत देती है।

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