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15 साल में 17 राज्यों में 178 लाख करोड़ रु. के निवेश समझौते हुए, लेकिन वास्तविक निवेश घोषणा का 0.14% से 24% तक ही

Patna News - गुजरात में निवेश के लिए शुक्रवार से नौवां वाइब्रेंट समिट आयोजित हो रहा है। 2003 में मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी ने...

Bhaskar News Network

Jan 19, 2019, 02:37 AM IST
Bihta News - in 17 years in 17 states 178 lakh crore investment agreements but only 014 to 24 of the actual investment announcement
गुजरात में निवेश के लिए शुक्रवार से नौवां वाइब्रेंट समिट आयोजित हो रहा है। 2003 में मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी ने इसकी शुरुआत की थी। प्रदेश में अब तक 8 निवेश सम्मेलन हुए हैं। इनमें 85 लाख करोड़ रुपए निवेश के समझौते हुए। लेकिन वास्तविक निवेश कितना हुआ यह साफ नहीं है। चीफ सेक्रटरी जेएन सिंह का दावा है कि अब तक 70% एमओयू सफल रहे हैं, जबकि राज्य उद्योग कमिश्नर की वेबसाइट के मुताबिक सिर्फ 11 लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। यह कुल समझौते का सिर्फ 13% है।

यही स्थिति दूसरे राज्यों की है। बीते 15 वर्षों में 17 राज्यों में 178 लाख करोड़ रुपए के निवेश समझौते हुए हैं। भास्कर ने इनमें से नौ राज्यों के निवेश सम्मेलनों का विश्लेषण किया। इनमें अब तक कुल 129 लाख करोड़ रुपए के निवेश समझौते हुए। लेकिन वास्तविक निवेश का आंकड़ा बताने को ज्यादातर राज्य तैयार नहीं हैं। विभिन्न सूत्रों से 5 राज्यों की जानकारी मिल पाई। उनमें यह आंकड़ा 0.14% से 24% तक है। छत्तीसगढ़ का 24% का आंकड़ा सबसे अधिक है, लेकिन यह भी पिछली रमन सरकार के 14 साल पूरे होने पर उद्योग मंत्री अमर अग्रवाल ने दिया था। जमीन अधिग्रहण और बिजली-पर्यावरण मंजूरी में लंबा वक्त और सरकारी विभागों में समन्वय नहीं होना कम निवेश के मुख्य कारण हैं।

इन 9 राज्यों के लावा आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा, उत्तराखंड और असम ने अब तक 49 लाख करोड़ के समझौते किए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अहमदाबाद में वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल ट्रेड शो का उदघाटन किया।

छत्तीसगढ़ में समझौते का 24% निवेश का दावा

राज्य समझौता वास्तविक निवेश फीसदी में

गुजरात 85 लाख 11 लाख 13%

छत्तीसगढ़ 2.79 लाख 67,000 24%

हरियाणा 5.84 लाख 80,000 13%

राजस्थान 3.97 लाख 21,000 5%

मध्य प्रदेश 20.24 लाख 43,000 2.15%

बिहार 1.75 लाख 245 0.14%

पंजाब 1.80 लाख उपलब्ध नहीं 30%*

महाराष्ट्र 20 लाख उपलब्ध नहीं

झारखंड 3.10 लाख उपलब्ध नहीं

कुल 129 लाख उपलब्ध नहीं

(निवेश के आंकड़े करोड़ रुपए में, *एमओयू संख्या के अनुसार)

दूसरे विश्व युद्ध के बाद ग्लोबल इन्वेस्टमेंट की शुरुआत हुई थी

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट की शुरुआत दूसरे विश्व युद्ध के बाद मानी जाती है। इसी उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र ने जुलाई 1944 में अमेरिका के ब्रेटन वुड्स में फाइनेंशियल कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी। युद्ध के कारण इकोनॉमी सुस्त पड़ गई थीं। तब यूरोप को 1,300 करोड़ डॉलर की मदद दी गई थी।

छग: 2.79 लाख करोड़ में से 67,000 करोड़ रु. आए

2012 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट का आयोजन हुआ। मुंबई, मेलबर्न और चीन के साथ अलग समझौते हुए। 2.79 लाख करोड़ के 160 से ज्यादा एमओयू हुए थे। रमन सरकार के उद्योग मंत्री अमर अग्रवाल ने 2.79 लाख करोड़ के एमओयू में से 67,000 करोड़ निवेश का दावा किया था।

इन 9 राज्यों में अब तक 129 लाख करोड़ रुपए के निवेश समझौते हुए हैं

गुजरात: 85 लाख करोड़ में से 11 लाख करोड़ निवेश

16 साल में 8 समिट में 85 लाख करोड़ रुपए के 76,512 निवेश समझौते हुए। सरकारी वेबसाइट के मुताबिक 11 लाख करोड़ का निवेश हुआ है। यह कुल समझौते का सिर्फ 13% है। अभी तक 17 लाख लोगों को रोजगार मिलने का दावा है।

महाराष्ट्र: एमएसएमई का 88% समझौतों पर अमल

यहां 2016 में मेक इन इंडिया वीक और 2018 में मैग्नेटिक महाराष्ट्र कन्वर्जन सम्मेलन आयोजित हुए थे। इन दोनों में 20 लाख करोड़ रुपए के 6,949 समझौते किए गए। छोटे कारोबारियों ने तो 88% समझौतों पर अमल किया, बड़ी कंपनियों के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

राजस्थान: 3.9 लाख करोड़ में से 21,000 करोड़ निवेश

2008 और 2015 में निवेश सम्मेलन आयोजित किए गए। 2008 में 60,000 करोड़ के लिए 112 एमओयू साइन हुए। इनमें 12,000 करोड़ रुपए का ही निवेश हुआ। 2015 में 3.37 लाख करोड़ के 470 एमओयू साइन हुए। इनमें 8,876 करोड़ का निवेश हुआ है।

मध्य प्रदेश: वादे का सिर्फ 2% पैसा निवेश हो सका

यहां अब तक 13 वर्षों में 5 निवेश सम्मेलन हुए हैं। इनमें कंपनियों ने करीब 20 लाख करोड़ रुपए के निवेश के वादे किए। लेकिन वास्तव में सिर्फ 43,000 करोड़ रुपए का निवेश यहां हुआ है। यह निवेश समझौते का सिर्फ 2.15% है। यह सबसे खराब कन्वर्जन वाले राज्यों में है।

जुलाई 1944 में ब्रेटन वुड्स की बैठक में वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ का गठन हुआ।

इस निवेश का नतीजा यह हुआ कि दुनिया के निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 1948 में 21% से 1968 में घटकर 14% रह गई। जापान का हिस्सा 0.5% से बढ़कर 5% और जर्मनी का 1.5% से 10% पर पहुंच गया। जापान की और जर्मनी की कारें अमेरिकी सड़कों पर दिखने लगीं।

पंजाब: 30% एमओयू ही प्रोजेक्ट्स में बदल पाए

2013 और 2015 में दो समिट हुए। 2013 में 67,000 करोड़ के 128 एमओयू हुए। दिसंबर 2018 तक इनमें से 65 पर ही काम हुआ। 2015 में 1.13 लाख करोड़ के 391 एमओयू हुए। इनमें 75-80 पर ही काम हुआ। 30% पर ही काम आगे बढ़ा है।

बिहार: औद्योगिक निवेश में सबसे पीछे है राज्य

यहां निवेश सम्मलेन में करीब 1.75 लाख करोड़ का निवेश प्रस्ताव मिला था। लेकिन वास्तव में निवेश नहीं के बराबर हुआ है। राज्य का पहला एफडीआई अमेरिका की लॉर्ड विल्मोरिया की कंपनी कोबरा बीयर ने किया। उसने बिहटा औद्योगिक क्षेत्र में 245 करोड़ रुपए का निवेश किया।

डब्लूटीओ ने बढ़ाया विदेशी निवेश

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट में दूसरा बड़ा कदम डब्लूटीओ का माना जाता है। 1995 में 124 देशों ने गैट की जगह डब्लूटीओ को अपनाया था। इसी के बाद देशों में एफडीआई का प्रवाह बढ़ने लगा। डब्लूटीओ की तर्ज पर बाद में नाफ्टा जैसे समझौते भी हुए।

वास्तविक निवेश का आंकड़ा बताने को ज्यादातर राज्य तैयार नहीं

हरियाणा: 5.8 लाख करोड़ में 80,000 करोड़ निवेश

5.84 लाख करोड़ के एमओयू किए। 50 महीने में सिर्फ 80-82 हजार करोड़ का निवेश हुआ है। चार साल में सरकार ने 550 से अधिक एमओयू किए लेकर हकीकत में 150-170 पर ही काम आगे बढ़ पाया। एफडीआई भी 5% ही आया है।

झारखंड: 1.15 लाख लोगों को रोजगार का दावा

2017 में मोमेंटम झारखंड नाम से निवेश सम्मेलन हुआ। इसमें 3.10 लाख करोड़ रुपए के निवेश के लिए 210 एमओयू हुए। 6.30 लाख लोगों को रोजगार मिलने की बात थी। सरकार का दावा है कि अभी तक 1.15 लाख को रोजगार दिया गया। निवेश कितना हुआ, यह नहीं मालूम।

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