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पहली बैठक में सुशील मोदी ने कहा- बाढ़ के समाधान के लिए बने राष्ट्रीय गाद नीति

7 महीने पहले
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बोट पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व अन्य नेता।
  • बिहार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष बाढ़ की समस्या से उत्पन्न परेशानी को उठाया
  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जगह सुशील मोदी बिहार का प्रतिनिधित्व कर रहे थे
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पटना. बिहार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष बाढ़ की समस्या से उत्पन्न परेशानी को उठाया है। शनिवार को कानपुर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में ‘राष्ट्रीय गंगा पर्षद’ की आयोजित पहली बैठक में बिहार का पक्ष रखते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने गंगा सहित बिहार की अन्य नदियों में गाद की वहज से बाढ़ की समस्या को रेखांकित करते हुए ‘राष्ट्रीय गाद नीति’ बनाने की मांग की।


बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जगह मोदी ही बिहार का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उन्होंने बिहार के सभी 142 नगर निकायों से निकलने वाले दूषित जल को नदियों में प्रवाहित करने की जगह नमामि गंगे परियोजना की तर्ज पर एसटीपी व सिवरेज नेटवर्क का निर्माण कर शोधित करने की मांग की। कहा कि नदी को स्वच्छ रखने के लिए यह कारगर और प्रभावी कदम साबित होगा।


बैठक में मोदी ने कहा कि नमामि गंगे परियोजना के तहत पटना की 9 सिवरेज प्रोजेक्ट सहित राज्य के अन्य 22 शहरों में 5186 करोड़ की लागत से 28 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। पटना के बेऊर और करमलीचक में जहां एसटीपी का काम पूरा हो गया है वहीं अधिकांश शहरों में दिसम्बर 2020 तक काम पूर्ण करने का लक्ष्य है। राज्य सरकार ने नीतिगत निर्णय लिया है कि एसटीपी से शोधित जल को नदी में प्रवाहित नहीं करके उसका उपयोग कृषि कार्य में किया जायेगा। नमामि गंगे के तहत गंगा किनारे के 12 जिलों को जैविक कॉरीडोर के रुप में विकसित करने के लिए 155.88 करोड़ की स्वीकृति दी गयी है। भोजपुर, बक्सर, छपरा, वैशाली व पटना जिले में 103 कलस्टर में जैविक खेती का काम प्रारंभ कर दिया गया है।


इसके पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व केन्द्र के अन्य 8 मंत्रियों और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के साथ कानपुर के 128 साल पुराने बंद किए गए सीसामऊ नाले का गंगा में बोटिंग के जरिए निरीक्षण किया। इससें प्रतिदिन 1 करोड़ लीटर गंदा पानी गंगा में प्रवाहित होता था।


उपमुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि बिहार के सुल्तानगंज-कहलगांव तक के 7 किमी के विस्तार को बिक्रमशिला गंगेय डॉल्फीन सेंचुरी घोषित किया गया है। 2018-19 के सर्वे के अनुसार बिहार की नदियों में 1455 डॉल्फीन पाए गए हैं। बिहार सरकार शीघ्र ही पटना विश्वविद्यालय में डाल्फीन शोध संस्थान स्थापित करेगी।

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