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छपरा / जिस हाईस्कूल में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने मैट्रिक की पढ़ाई की, आज वहां स्मृति के तौर पर कुछ भी नहीं

छपरा का जिला स्कूल जहां राजेंद्र बाबू ने पढ़ाई की थी। छपरा का जिला स्कूल जहां राजेंद्र बाबू ने पढ़ाई की थी।
राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि देते लोग। राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि देते लोग।
In the high school where Dr. Rajendra Prasad studied matriculation, today there is nothing as a memory
In the high school where Dr. Rajendra Prasad studied matriculation, today there is nothing as a memory
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छपरा का जिला स्कूल जहां राजेंद्र बाबू ने पढ़ाई की थी।छपरा का जिला स्कूल जहां राजेंद्र बाबू ने पढ़ाई की थी।
राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि देते लोग।राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि देते लोग।
In the high school where Dr. Rajendra Prasad studied matriculation, today there is nothing as a memory
In the high school where Dr. Rajendra Prasad studied matriculation, today there is nothing as a memory

  • स्कूल ने कोलकाता लाइब्रेरी को कई बार लिखा पत्र, नहीं मिला कोई जवाब
  • एग्जामनर ने राजेंद्र बाबू की कॉपी में लिखा था-एग्जामिनी इज बेटर दैन एग्जामिनर

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2019, 11:38 AM IST

छपरा. छपरा का ऐतिहासिक जिला स्कूल जहां से देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र बाबू ने 1901 में 10 वीं पास की थी। स्कूल को अपग्रेड कर इंटर कॉलेज बना दिया गया है। ब्लॉक लेवल के तमाम शिक्षाधिकारियों का दफ्तर भी इसी ऐतिहासिक कैंपस में है। अभी 1100 के करीब स्टूडेंट्स हैं। नहीं हैं…तो बस उस अनुपता में टीचर। हाईस्कूल यानी 10वीं तक के लिए महज दो ही टीचर है। कुल 40 से अधिक टीचर की जरुरत है जबकि है महज 16 ही। आज राजेन्द्र प्रसाद की जयंती है।

शिक्षा अिधकारी और स्कूल प्रशासन के पास भी नहीं है कोई रिकॉर्ड
यहां से राजेन्द्र प्रसाद 1906 में प्रारंभिक पढ़ाई पूरी की। 10 वीं तक की पढ़ाई पूरी की। उसके बाद कोलकता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में ज्वाइन किये। यहां बता दें कि एग्जामनर ने कॉपी चेक करके के दौरान खुश होकर रिमार्क लिखा- एग्जामनी इज बेटर दैन एग्जामनर। जिला स्कूल में पढ़ाई के दौरान उनकी लिखी गई काॅपी और नामांकन पंजी भी संधारित था,लेकिन अभी के समय में रिकार्ड में कुछ भी नहीं है। यहां तक कि शिक्षा अधिकारी और स्कूल प्रशासन को इसके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है। हालांकि पूर्व में स्कूल प्रशासन ने इस बावत उनके समय के कॉपी और अन्य अभिलेख को मंगाने के लिए कोलकाता लाइब्रेरी प्रशासन को कई बार पत्राचार किया है। वर्तमान समय में उस पत्राचार के भी कोई रिकार्ड संधारित नहीं है। बस केवल उनकी एक प्रतिमा लगी है और उनके नाम की एक वाटिका है। जो जीर्ण-शीर्ण हालत में है।

12 साल की उम्र में यहां आये थे, शादी भी कम उम्र में ही हो गई
प्रारंभिक पारंपरिक शिक्षण के बाद उन्हें 12 वर्ष की अवस्‍था में आगे की पढ़ाई के लिए छपरा जिला स्कूल भेजा गया था। इसी दौरान किशोर राजेंद्र प्रसाद का विवाह राजवंशी देवी से हुआ था। विवाह के बाद वे अपने बड़े भाई महेंद्र प्रसाद के साथ पढ़ाई के लिए पटना चले गए थे। यहां पर उन्होंने टी.के. घोष अकादमी में दाखिला लिया था। इस संस्थान में उन्होंने दो साल अध्ययन किया। कोलकाता विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में उन्होंने पहला स्थान प्राप्त किया था। इस उपलब्धि पर उन्हें 30 रुपये प्रतिमाह की छात्रवृत्ति से पुरस्कृत भी किया गया था। राजेंद्र बाबू ने कानून में मास्टर की डिग्री विशिष्टता के साथ हासिल की और इसके लिए उन्हें स्वर्ण पदक प्रदान किया गया था। कानून में ही उन्होंने डाक्टरेट भी किया था। कुछ दिनों तक वकालत करने के बाद राजेंद्र बाबू ने वकालत छोड़कर अंग्रेजों के खिलाफ देश में चल रहे आंदोलन में शामिल हो गए।

एक करोड़ की लागत से बनकर तैयार पार्क का नाम होगा राजेन्द्र पार्क
जिला स्कूल के कैंपस में नगर निगम प्रशासन द्वारा करीब एक करोड़ की लागत से एक पार्क बनाया गया है। बनें हुए करीब एक साल हो गये लेकिन आज तक चालू नहीं हुआ। काम पूरा हो चुका है लेकिन निगम और प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के कारण शुभांरभ नहीं हो सका है। स्कूल प्रशासन को इसके बारे मे अवगत भी नहीं कराया गया है कि कब तक हैंडओवर किया जायेगा।

प्राचार्य बोले- यहां के शिक्षक खुद को इस विद्यालय का शिक्षक होने पर गौरवान्वित महसूस करते हैं
भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद जिस विद्यालय में पढ़ते थे वह विद्यालय छपरा में हैं। 1906 में उनके पढ़ाई के दौरान परीक्षक ने राजेन्द्र बाबू को परीक्षक से बेहतर बताया था और कॉपी मूल्यांकन के दौरान एग्जामिनी इज बेटर देन एग्जामिनर लिख दिया था। आज यहां के शिक्षक खुद को इस विद्यालय का शिक्षक होने पर गौरवान्वित महसूस करते हैं। मुनमुन श्रीवास्तव, प्राचार्य जिला स्कूल

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