• Hindi News
  • Bihar
  • Patna
  • Patna News in the natya festival the artists staged a life stuck between dreams and reality on stage watching the audience
--Advertisement--

नाट्योत्सव में कलाकारों ने ख्वाब और हकीकत के बीच फंसी जिंदगी को मंच पर किया जीवंत, देखते रहे दर्शक

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 04:56 AM IST

Patna News - ‘अपने पराए’ नाटक एक ऐसे परिवार की कहानी है, जो आर्थिक तंगी से ग्रसित है। इसका मंचन रविवार को कालिदास रंगालय में...

Patna News - in the natya festival the artists staged a life stuck between dreams and reality on stage watching the audience
‘अपने पराए’ नाटक एक ऐसे परिवार की कहानी है, जो आर्थिक तंगी से ग्रसित है। इसका मंचन रविवार को कालिदास रंगालय में आयोजित 78वीं अजित गांगुली जयंती पर किया गया। दिखाया गया कि परिवार का मुखिया राधेश्याम (नवीन कुमार) की कमाई इतनी नहीं कि वह घर चला सके। वह एक ईमानदार और कर्मठ सरकारी कर्मचारी है।

आर्थिक तंगी में भी वह गलत रास्ते पर चलना स्वीकार नहीं करता। उसका भाई मनोज (मणिकांत चौधरी) समाज में फैली सरकारी कार्यप्रणाली और आर्थिक तंगी से ऊब जाता है। वह आर्थिक तंगी के लिए अपने भाई की ईमानदारी को दोषी मानता है। वह क्रांतिकारी बन जाता है और व्यवस्था के खिलाफ खड़ा हो जाता है। एक रात वह ट्रेन उड़ाने की प्लानिंग करता है। जब बड़े भाई राधेश्याम को इस बात का पता चल जाता है, तो वह उसे बचाने की पूरी कोशिश करता है। परिवार की मजबूरी और इससे निकलने की गलत कोशिश को नाटक अपने पराये में दिखाया गया।

अपने सपनों में पूर्णता की तलाश करता है गोपू

पटना | हेनरिक इब्सन की कविता पियर गिंट पर आधारित नाटक गोपू गपोड़ी का मंचन रविवार को प्रेमचंद रंगशाला में हुआ। सांस्कृतिक संस्था इमेजिनेशन और वृक्ष विनोदिनी की ओर से आयोजित नाट्य कार्यशाला में इस नाटक को तैयार किया गया। निर्देशन कार्यशाला के प्रशिक्षक राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से स्नातक डिग्रीधारी विनोद राई ने किया। नाटक गोपू गपोड़ी का नायक गोपू (अर्पित पराशर, कुमार आशय) खूद की तलाश में रहता है। उसकी समस्या है कि वह आत्म-साक्षात्कार को गलत समझता है और अपने सपनों में पूर्णता की तलाश करता है, क्योंकि वह जीवन और प्रेम से डरता है। गोपू एक सम्राट होने का सपना देखता है, लेकिन जब अवसर दस्तक देता है तो वह उसके लिए तैयार नहीं होता है। नकारात्मक विकास की पूरी शृंखला दिखाने के लिए इब्सन ने पहले गोपू को बीस के एक निर्दोष युवक के रूप में दिखाया, फिर एक मध्यम आयु वर्ग के टाइकून के रूप में और अंत में एक टूटे हुए बूढ़े व्यक्ति के रूप में।

प्रेमचंद रंगशाला

बेटी वियोग नाटक में बेटी के सवाल पर पिता की नजरें झुकीं

खगौल नाट्य महोत्सव का दूसरा दिन, दो नाटकों ने सामाजिक सवालों से हर किसी को झकझोरा

खगौल| एक बेटी अपने पिता से पूछ रही है क्या वह इंसान नहीं, क्या उसे ज ीने का हक नहीं, सपने देखने का हक नहीं? पिता नजरें झुकाए खड़ा है, उसके पास कोई जवाब नहीं। बेटी फिर पूछती है क्या वह संतान नहीं, फिर बोझ कैसे बन गई? कम उम्र में उसकी शादी एक बूढ़े से क्यों कर दी गई? उसके सपनों को क्यों कुचल दिए गए? दृश्य था खगौल में चल रहे नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन आपसदारी कला मंच की ओर से प्रस्तुत भिखारी ठाकुर की रचना पर आधारित नाटक ‘बेटी वियोग’ का। नाटक में बेटियों को पराया धन समझने और बाल विवाह की परंपरा पर करारा प्रहार किया गया। नाटक में बेटी के पात्र ने अपने सवालों से लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। भिखारी ठाकुर के गीतों ने लोगों को बांधे रखा। बेटी ने पूछा कम उम्र में शादी कर क्यों कुचल दिए सपने तो पिता ने झुका लीं नजरें। सनत कुमार, संजय कुमार सिन्हा, विनय कुमार विभूति, आशा, रजनी, पिंटू, अजीत, श्रीनाथ, अर्जुन, मो. इस्लाम, जितेन्द्र, योगेन्द्र, श्वेता, रिंकी, राधा, दिनेश, अमरजीत, जगदीश, राहुल, रिंकू देवी, सुमन सौरभ,आदित्य, दंगेश और बिरजू ने अभिनय किया।

कालिदास रंगालय

‘पाण्डेय जी का पतरा’ में अंधविश्वास पर प्रहार

पुरुषार्थी कला मंच मनेर की ओर से प्रोफेसर अभिमन्यु प्रसाद मौर्य लिखित एवं अनिल कुमार सुमन निर्देशित नाटक ‘पाण्डेय जी का पतरा’ का मंचन किया गया। मगही भाषी क्षेत्र के तेवर, रहन-सहन और मान्यताओं के रंग में रंगी इस प्रस्तुति में अंधविश्वास पर प्रहार किया गया। दिखाया गया कि जहां लोग चांद पर जाने को आतुर हैं वहीं समाज का एक वर्ग आज भी मुहूर्त, जतरा और पंडित जी के पतरा के जाल में फंसा हुआ है। इनके अशिक्षित होने का कई लोग फायदा उठा शोषण करते हैं। नाटक के दृश्यों ने दर्शकों को खूब हंसाया।

कलाकार : लालदेव यादव, रणवीर कुमार, प्रेम कुमार, आशुतोष कुमार, रौशन राज, धर्मशील राज, अरुण कुमार, निराला कुमार, राम लक्षण राय, गौतम प्रसाद, हरिकिशोर और सत्येन्द्र शामिल थे।

Patna News - in the natya festival the artists staged a life stuck between dreams and reality on stage watching the audience
Patna News - in the natya festival the artists staged a life stuck between dreams and reality on stage watching the audience
X
Patna News - in the natya festival the artists staged a life stuck between dreams and reality on stage watching the audience
Patna News - in the natya festival the artists staged a life stuck between dreams and reality on stage watching the audience
Patna News - in the natya festival the artists staged a life stuck between dreams and reality on stage watching the audience
Astrology

Recommended

Click to listen..