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गांवों में होली के रंग के साथ गीतों का भी चला दौर, खूब बजे ढोल, मंजीरे और झाल

एक वर्ष पहले
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होली के मौके पर दरौंदा के गांवों में ढोलक की थाप और मजीरों की झंकार खूब सुनाई दी। गांवों में होली गीतों की रसधार से ग्रामीणों ने खूब लुत्फ उठाया। पीपरा गांव में शाम होते ही गांव के लोग देवी स्थान पर इकट्ठा होकर ढोलक, हार्मोनियम के साथ सुर ताल मिला कर होली के फाग गाया। प्रखंड मुख्यालय सहित धानाडीह, बगौरा, भीखाबांध, जमालपुर, कमसडा, हाथोपुर, टेसुआर, मछौती, सिरसांव सहित आधा दर्जन गांवों में होली गीत गाए गये। गीतों और भजनों पर लोग नृत्य भी कर रहे थे। एक तरफ बुजूर्ग तो दूसरी तरफ युवाओं की टोली थी। इन गांवों में होली गीत गाए जाने की परम्परा करीब 50 वर्ष पुरानी हैं। पीपरा गांव के पंच अनिता देवी, देवनाथ राय, दिनेश राय, उमेश राय, रामा यादव, आशुतोष कुमार चंदन, प्रवीण कुमार सिंह आदि ने बताया कि शाम को गांव की गायन मंडली सभी इकट्ठा हो कर गीत गाते हैं और मनोरंजन करते हैं। गीतों की शुरुआतगांव के युवा और बुजुर्ग होली गीतों की शुरुआत करते हैं। संगीत की धुन घरों तक पहुंचती है तो महिलाएं भी घरों से निकलकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंच जाती हैं। बगौरा गांव के शंभू प्रसाद का कहना है कि यह परम्परा काफी पुरानी हैं‌। बुजूर्गों से सीखने के साथ इस परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। वहीं मुना शाही एवं उमेश कुमार सिंह ने गांवों का दौरा कर लोगों को अबीर गुलाल लगा कर आशीर्वाद लिया। इधर मुखिया धनु कुमार भारती, पूनम राय विधार्थी, चुन-चुन शर्मा, राजमोहन साह, पंच अनिता देवी, वीरेंद्र शर्मा, मनोज राय विधार्थी आदि ने क्षेत्र भ्रमण कर लोगों को बधाई दी।

होली के रंग में रंगीन हुए बच्चे।
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