फ्लैश बैक / पीड़ितों से मिलने हाथी पर सवार होकर बेलछी आईं इंदिरा



Indira came riding on an elephant to meet the victims
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Indira came riding on an elephant to meet the victims

  • कीचड़ में जीप फंसी, तो पैदल ही चलने लगीं इंदिरा, इमरजेंसी के बाद हताश इंदिरा को मिली थी संजीवनी
  • बिना हौदे के हाथी की पीठ पर सवार हुई थीं इंदिरा

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2019, 06:34 AM IST

नवादा. बात 11 अगस्त, 1977 की है। बिहार प्रदेश कांग्रेस कार्यालय सदाकत आश्रम में इंदिरा गांधी का फोन आया। तब वह प्रधानमंत्री नही थीं। इमरजेंसी के कारण उनकी पार्टी बुरी तरह पराजित हो गई थी। इंदिरा गांधी खुद भी हार चुकी थीं। तब केदार पांडेय बिहार के नव मनोनीत पीसीसी प्रमुख थे।

 

इंदिरा गांधी ने उनसे कहा कि वह बेलछी गांव जाएंगी। तब लोगों को इसकी जानकारी दी गई। 13 अगस्त की सुबह इंदिरा गांधी हवाई जहाज से पटना पहुंचीं। समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। हालांकि युवाओं के एक समूह ने इंदिरा गांधी वापस जाओ के नारे भी लगाए। 35 कारों के साथ उनका काफिला रवाना हुई। चंपापुर के समीप काफी संख्या में लोगों ने उनका बैंड बाजे के साथ स्वागत किया। लेकिन वह संतुष्ट नही थीं।

 


दरअसल, इंदिरा गांधी का मकसद बेलछी पहुंचना था। हालांकि पहले वह बिहारशरीफ चली गईं। लेकिन बताया गया कि ऐसे कोई रास्ता नहीं है। उन्हाेंने तय किया कि ग्रामीण जैसे जाते हैं, उसी रास्ते से जाऊंगी। लिहाजा बिहारशरीफ से हरनौत लौटी। हरनौत से करीब 15 किलोमीटर दूर बेलछी गांव था। शाम हो चुका था। बारिश भी हो रही थी। सड़क नहीं थी। नदी और रास्ते में पानी और कीचड़ भरा था। स्थिति कार्यक्रम रद्द करने की आ गई। लेकिन वह अपने फैसले पर डटी थीं।

 

बिना हौदे के हाथी की पीठ पर सवार हुई थीं इंदिरा

प्रत्यक्षदर्शी रहे वरिष्ठ कांग्रेसी नरेंद्र कुमार बताते हैं कि पहले जीप पर बैठीं। जीप कुछ दूर जाते ही कीचड़ में फंस गई। इंदिरा जी बोलीं-हम वहां पैदल जाएंगे। लेकिन तभी उनके लिए हाथी मंगवाया गया। केदार पांडे ने पूछा, ‘आप हाथी पर चढ़ेंगी कैसे?‘ इंदिरा ने कहा, ‘मैं चढ़ जाउंगी। मैं पहले भी हाथी पर बैठ चुकी हूं।’ लिहाजा, इंदिरा बिना हौदे के हाथी की पीठ पर सवार हो गईं।

 

हालांकि उनके साथ प्रतिभा सिंह थी, वह हाथी पर चढ़ने से डर रही थी। लेकिन वह इंदिरा गांधी का पीठ पकड़कर सवार हुई। साढ़े तीन घंटा पहुंचने में लगा।  केदार पांडेय समेत कई लीडर नदी पारकर पैदल गए थे। नरेंद्र बताते हैं कि नदी में छाती भर पानी था। वापस लौटने जगन्नाथ मिश्रा को हाथी का किराया देने को कहा था। उसी समय किराया दिया गया था। कई सीनियर लीडर नदी के किनारे उनकी वापसी का इंतजार कर रहे थे। 

 

बेलछी आना देश-दुनिया में बना चर्चा का विषय

पटना जिले के बेलछी में 27 मई, 1977 काे आठ दलित और 3 सुनार जाति के लाेग सामूहिक नरसंहार की घटना में मारे गए थे। मोरारजी देसाई की सरकार थी। यह बड़ी घटना थी। तब इंदिरा गांधी बेलछी पहुंचीं। इसके बाद वह सुर्खियों में छा गईं। हाथी पर सवार तस्वीर देश और दुनिया में छा गई। ढाई साल बाद ही 1980 में वे सत्ता में वापसी में उनकी बेलछी यात्रा बड़ी वजह बनी।

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