दिल्ली हादसा / पीड़ित बोले- आंटी जी चौथी मंजिल का ताला खोल देतीं तो नहीं जाती बिहार की 38 जानें

फैक्ट्री में आग लगने के बाद इमारत पूरी तरह गैस चैंबर में तब्दील हो गई थी। फैक्ट्री में आग लगने के बाद इमारत पूरी तरह गैस चैंबर में तब्दील हो गई थी।
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फैक्ट्री में आग लगने के बाद इमारत पूरी तरह गैस चैंबर में तब्दील हो गई थी।फैक्ट्री में आग लगने के बाद इमारत पूरी तरह गैस चैंबर में तब्दील हो गई थी।

  • तीसरी और दूसरी मंजिल पर फैक्ट्री थी यहीं मजदूर रहते भी थे
  • चौथे पर आंटी रहतीं थी, जो आग लगते ही ताला बंद कर छत पर गई 
  • मजदूर ऊपर भाग नहीं सके, नीचे सीढ़ी इतनी संकरी कि भागना मुश्किल था

Dainik Bhaskar

Dec 11, 2019, 09:26 AM IST

समस्तीपुर/नई दिल्ली. फैक्ट्री में आग लगने के बाद इमारत पूरी तरह गैस चैंबर में तब्दील हो गई थी। यह खुलासा अस्पताल में भर्ती पीड़ितों और उनके परिजनों ने किया है। इस हादसे में घायल मो. शाहिद, मो. मन्नान, मो. असलम, मो. शाहेद ने बताया कि पांच मंजिलें मकान की दूसरी मंजिल पर खिलौना और तीसरी मंजिल पर बैग की फैक्ट्री चलती थी। जहां देर रात तक सिलाई का काम होता है। रात में वहीं कारीगरों का सोना भी होता है।

उन्होंने बताया- चौथी मंजिल पर एक आंटी का परिवार रहता था। ऊपरी मंजिल पर आने-जाने के लिए एक ही पतली सीढी थी। विकट स्थिति में मकान से बाहर निकलने के लिए दूसरा कोई रास्ता भी नहीं था। आग खिलौने की फैक्ट्री में दूसरी मंजिल पर लगी थी। जिससे तीसरी मंजिल पर चारों ओर धुआं भर गया। लोग ऊपर की ओर भागे, पर ऊपरी मंजिल पर रह रही आंटी ने दरवाजा नहीं खोला। वह आग लगते ही ताला बंद कर परिजनों के साथ छत पर चली गई। इससे अधिकतर लोगों का दम घुट गया। अगर आंटी किवाड़ खोल देतीं तो बिहार की 38 जिंदगियां बच सकती थीं।

सीढ़ी पर काफी अंधेरा, एक साथ 2 लोग आ-जा नहीं सकते
घटना की सूचना पर दिल्ली गए समस्तीपुर की हरिपुर पंचायत के समिति सदस्य मो. मजीबुल मंगलवार को अपने गांव के दो युवकों (मो. खालिद व एहसान, सिघिंया) का शव लेकर लौटे। मजीबुल समेत तमाम परिजनों ने बताया कि वह उस मंजिल में भी गए, जहां आग लगी थी। ऊपर चढ़ने के लिए मकान में पतली सीढ़ी थी। वहां काफी अंधेरा था। सीढ़ी चढ़ते हुए अगर कोई ऊपर से आए तो दोनों आपस में रगड़ खाकर आगे बढ़ेंगे।

अब तक बिहार के 38 के मरने की पुष्टि
बिहार के 38 श्रमिकों में से 35 के शव एंबुलेंस के जरिये उनके घर भेजे गए हैं। बिहार भवन के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी शैलेंद्र कुमार ने बताया कि हादसे में मारे गए 43 लोगों में से 38 बिहार के थे। 35 शवों को लेकर एंबुलेंस दिल्ली से रवाना हुईं। हर एंबुलेंस में एक या दो शव और साथ में रिश्तेदार हैं। उन्हाेंने कहा कि हादसे में मरे तीन व्यक्तियों के शव अभी भेजे जाने बाकी हैं। उनके परिवार के सदस्यों के दिल्ली आने का इंतजार है।

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