मॉनसून सत्र / सदन में उठा वित्त रहित शिक्षण संस्थान के अनुदान का मामला, शिक्षा मंत्री बोले-अधितन भुगतान का प्रयास करेगी सरकार



Issue raised of grant-free education institutions grant in Bihar legislative council
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Issue raised of grant-free education institutions grant in Bihar legislative council

  • अनुदान को भिक्षादान की तरह मत दीजिए, अनुदान के लिए दफ्तर दर दफ्तर शिक्षकों को घुमना पड़ता है: अवधेश नारायण सिंह

Dainik Bhaskar

Jul 12, 2019, 07:25 PM IST

पटना. विधान परिषद में वित्त रहित शिक्षण संस्थानों के अनुदान का मुद्दा उठा। आठ सदस्यों ने ध्यानाकर्षण के जरिए इस मुद्दे को दोनों पालियों में उठाया। शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने कहा इन संस्थानों को अधितन अनुदान का भुगतान करने का सरकार प्रयास करेगी। उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं उपलब्ध करवाने के कारण भी कुछ संस्थानों का अनुदान लटका हुआ है। सरकार ने वित्त रहित शिक्षा नीति को वर्ष 2008 में ही समाप्त कर दिया है। 

 

इस पर विधान परिषद के पूर्व सभापति अवेधश नारायाण सिंह ने सरकार को घेरते हुए कहा कि अनुदान को भिक्षादान की तरह मत दीजिए। अनुदान के लिए शिक्षकों को दफ्तर दर दफ्तर चक्कर लगाना पड़ रहा है। अधिकारी मिलने से इंकार कर देते हैं, तो अनुदानित विद्यालय के शिक्षक जनप्रतिनिधियों को फोन करते हैं आफिस में इंट्री दिलवा दीजिए। सरकार को शिक्षकों को नीचा नहीं दिखाना चाहिए। 

 

राजद के विधान पार्षद रामचंद पूर्वें ने कहा सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे शिक्षकों को अनुदान के लिए अधिकारियों का दरवाजा नहीं खटखटना पड़े। दरअसल इस मुद्दे पर सदस्य संजय कुमार सिंह, संजीव कुमार सिंह, दिलीप कुमार चौधरी, प्रो.नवल किशोर यादव, मदन मोहन झा, वीरेंद्र नारायण यादव, राम वचन राय, और संजीव श्याम सिंह ने ध्यानाकर्षण के जरिए राज्य के वित्त अनुमोदित माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षण संस्थानों को अनुदान की राशि भेजी जाने की धीमी प्रक्रिया पर कटघरे में खड़ा किए थे। 

 

सदस्यों ने कहा कि डिग्री संबंद्ध महाविद्यालयों के अनुदान के संबंध में अभी तक सरकार 2011 के बाद कोई बजटीय उपबंध नहीं किया है। वहीं राज्य के नियोजित शिक्षकों के साथ-साथ विश्वविद्यालय-महाविद्यालय शिक्षकों को सातवें वेतनमान का लाभ दे दिया गया, लेकिन वित्त रहित शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों के छात्र-छात्राओं की उत्तीर्णता के आधार पर मिलने वाली अनुदान राशि को बढ़ोत्ती दस साल बीत जाने के बाद भी नहीं की जा सकी है। मंत्री ने कहा कि विभाग में पैसे की कोई कमी नहीं है। 3 अरब 30 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है।

 

वहीं नवल किशोर यादव ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से राज्य विश्वविद्यालय आयोग में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला उठाया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस आयोग के नियमित अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की जा चुकी है। सचिव के पद पर भी नियुक्ति कर दिया गया है। कार्यालय के लिए इंटरमीडिएट काउंसिल के 8वां तला पर बनाया गया है। जहां तक अधिकारी और कर्मचारी की स्थाई नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है।

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