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व्यापक था जानकी वल्लभ शास्त्री का काव्य संसार

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 04:45 AM IST

Patna News - मंत्रिमंडल सचिवालय (राजभाषा) विभाग की ओर से बुधवार को अभिलेख भवन में आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री और आचार्य...

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मंत्रिमंडल सचिवालय (राजभाषा) विभाग की ओर से बुधवार को अभिलेख भवन में आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री और आचार्य रामलोचन शरण की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर हिंदी प्रगति समिति की उपाध्यक्ष डाॅ. सविता सिंह नेपाली ने कहा कि शास्त्री जी छायावादोत्तर काल के विख्यात कवि थे। उनका काव्य संसार बहुत ही व्यापक और विविधतापूर्ण है। डाॅ. संजय पंकज ने कहा कि आचार्य शास्त्री बिहार के उन थोड़े कवियों में शामिल हैं, जिन्हें पाठकों का इतना प्यार मिला। वह अपने आरंभिक काल में संस्कृत में कविताएं किया करते थे, लेकिन महाकवि निराला की प्रेरणा से हिंदी में आए। डॉ. रश्मि रेखा ने आचार्य शास्त्री को प्रयोगधर्मी कवि बताया। गीत के क्षेत्र में आचार्य श्री ने जो प्रयोग किए उनसे हिंदी गीतों का दायरा काफी व्यापक हुआ। उन्होंने अनेक काव्य नाटकों की भी रचना की। डाॅ. विपिन कुमार ने कहा कि साहित्यिक बिरादरी में ‘मास्टर साहब’ के नाम से जाने जानेवाले आचार्य रामलोचन शरण ने बिहार में हिंदी के पांव जमाने की दिशा में सराहनीय कार्य किए। उन्होंने दूसरों से लिखवाने का काम भी बखूबी किया। आचार्य शरण के पुत्र डाॅ. सीताशरण सिंह ने आचार्य जी से संबंधित अनेक संस्मरण सुनाए और बताया कि भवानी दयाल संन्यासी जैसे प्रसिद्ध लेखक उन्हें ‘बिहार के गौरव और राष्ट्रभाषा का अभिमान’ कहा करते थे। राजभाषा निदेशक इम्तियाज अहमद करीमी ने दोनों साहित्यकारों के जीवन पर प्रकाश डाला। अध्यक्षता हिंदी प्रगति समिति के अध्यक्ष कवि सत्यनारायण ने की। मौके पर सतीश राज पुष्करणा, मो. सुलेमान, शहंशाह आलम, मुसाफिर बैठा, राजकिशोर राजन व निकहत आरा ने कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संचालन डाॅ. प्रमोद कुंवर और धन्यवाद ज्ञापन लालबाबू पासवान ने किया।

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