लोकसभा सीट जहानाबाद / यहां राजद उम्मीदवार के लिए मुसीबत खड़ी कर रहे तेजप्रताप समर्थक



Jehanabad Loksabha seat Main Fight between JDU and RJD candidate Surendra Yadav
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Jehanabad Loksabha seat Main Fight between JDU and RJD candidate Surendra Yadav

  • मोदी लहर में चुनाव जीते अरुण कुमार इस बार राष्ट्रीय समता पार्टी(से) के टिकट पर मैदान में
  • जहानाबाद में एनडीए और महागठबंधन प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला
  • अरुण कुमार और चंद्रप्रकाश यादव मुकाबले को चौतरफा बनाने की कोशिश में

Dainik Bhaskar

May 17, 2019, 06:43 PM IST

जहानाबाद. लोकसभा सीट जहानाबाद पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप ने अपनी ही पार्टी के लिए मुसीबत खड़ा कर दिया है। वे राजद में अपने समर्थकों के लिए दो सीटों की मांग कर रहे थे। जहानाबाद से चंद्रप्रकाश यादव और शिवहर से अंगेश सिंह। राजद से दो सीट नहीं मिलने पर नाराज तेजप्रताप ने लालू-राबड़ी मोर्चा का गठन लिया और इस के झंडे पर चंद्रप्रकाश यादव चुनावी मैदान में हैं। उधर, मोदी लहर में चुनाव जीतने वाले रालोसपा उम्मीदवार अरुण कुमार पार्टी छोड़ चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रीय समता पार्टी(से) बना ली और ट्रक छाप के चुनाव चिन्ह पर मैदान में हैं।

 

एनडीए में हुए सीट शेयरिंग में इस बार यह सीट जदयू के पास आई है और पार्टी ने यहां से चंद्रेश्वर चंद्रवंशी को टिकट दिया है। महागठबंधन की तरफ से राजद के टिकट पर सुरेंद्र यादव चुनावी मैदान में हैं। वैसे तो इस सीट पर राजद और जदयू के बीच सीधा फाइट है, लेकिन चंद्रप्रकाश यादव और अरुण कुमार मुकाबले को चौतरफा बनाने में लगे हैं।

 

अंत तक नजदीकी होती है चुनावी लड़ाई
जहनाबाद में अब तक हुए आम चुनावों में 11 बार विजेता और रनर के बीच हार जीत का अंतर पचार हजार से भी कम रहा है। पांच बार जीत का अंतर 35 हजार से कम रहा है। यहां चुनावी लड़ाई अंत तक एकदम नजदीकी रहती है। काउंटिंग के दौरान भी अंतिम दौर के मतगणना में ही हार जीत का फैसला आता है। हालांकि 1977 के चुनाव में यहां का चुनावी ट्रेंड बदल गया था। एकतरफा मुकाबले में तब लोकदल के प्रत्याशी हरिलाल प्रसाद सिन्हा ने कांग्रेस के प्रो. चंद्रिका राय को ढाई लाख से अधिक मतों के अंतर से हराकर रिकॉर्ड अपने नाम किया था। जीत का यह रिकॉर्ड अब भी उन्हीं के नाम है।

 

हार जीत में सिर्फ 5 प्रतिशत का अंतर
यहां लोकसभा चुनाव में जीतने व हारने वाले उम्मीदवार के बीच लगभग हर बार 5 प्रतिशत के आसपास का ही अंतर रहा है। 1977 में विजयी रहे हरिलाल प्रसाद सिन्हा को जहां 84.85 प्रतिशत वोट हासिल हुआ था वहीं रनर अप रहे चंद्रिका प्रसाद यादव को महज 13.66 प्रतिशत वोट पड़े थे। इसके अलावा 1962 के चुनाव में विजयी उम्मीदवार सत्यभामा देवी को जहां 33.37 प्रतिशत वोट पड़े थे, वहीं रनर अप रहे चंद्रशेखर सिंह को सिर्फ 17.64 प्रतिशत वोट आए थे। इसके अलावा जितने भी लोकसभा चुनाव हुए, सभी में हार जीत का अंतर 5 प्रतिशत या उससे कम का ही रहा है।

 

साढ़े तीन लाख वोट पाने के बाद भी हारे चुनाव
आंकड़े गवाह हैं कि कभी भी यहां लोकसभा चुनाव में कोई प्रभावी व स्पष्ट तीसरा कोण नहीं बना है। यही वजह है कि कभी-कभी यहां जीत के लिए साढ़े तीन लाख वोट लाकर भी प्रत्याशियों को हार का मुंह देखना पड़ा है। पहली दफे 1984 में महेन्द्र प्रसाद को 3 लाख 45 हजार 664 वोट लाकर भी चार प्रतिशत वोटों के मामूली अंतर से हार का मुंह देखना पड़ा था। 2004 में अरूण कुमार 3 लाख 53 हजार 625 वोट लाने के बाद भी हार गए थे।

 

इस सीट पर सीपीआई का भी रहा है दबदबा
जहानाबाद लोकसभा सीट पर वामदलों का भी दबदबा रहा है। जहां एक तरफ देशभर में ज्यादातर सीटों पर इमरजेंसी के बाद कांग्रेस की स्थिति गड़बड़ाई थी वहीं जहानाबाद में चौथे आम चुनाव में ही सीपीआई ने कांग्रेस से यह सीट छीन ली थी। चंद्रशेखर सीपीआई के टिकट पर लगातार दो बार सांसद चुने गए। इसके बाद 1984 से 1996 तक सीपीआई के टिकट पर रामाश्रय प्रसाद लगातार चार बार जीते। 1996 के बाद अब तक हुए 5 आम चुनावों में सीपीआई को फिर जीत नहीं मिली।

 

स्थानीय मुद्दे हवा हवाई
जहानाबाद संसदीय क्षेत्र में सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार का है। यहां से ज्यादातर लोग हर साल रोजगार की तलाश में महानगरों का रुख करते हैं। उच्च शिक्षा के लिए कोई बड़ा संस्थान नहीं है। यही वजह है कि 10वीं या 12वीं के बाद छात्रों को दूसरे शहर जाना पड़ता है। इन सब मुद्दों से ऊपर राष्ट्रवाद और जातीय मुद्दों के आधार पर प्रत्याशी वोट मांग रहे हैं। 2014 की तरह इस सीट पर भी मोदी फैक्टर हावी है।

 

लोकसभा का चुनावी गणित
जहानाबाद संसदीय क्षेत्र में भूमिहार और यादव वोटरों का दबदबा है। कुशवाहा, कुर्मा और मुस्लिम वोटर यहां गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। इस संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 1,276,912 है। इसमें 680,766 पुरुष मतदाता और 596,146 महिला मतदाता हैं।

 

जहानाबाद लोकसभा क्षेत्र के तहत विधानसभा की 6 सीटें आती हैं- अरवल, कुरथा, जहानाबाद, घोसी, अतरी और मकदूमपुर। 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में इन 6 सीटों में से 4 राजद और दो सीटों पर जदयू ने जीत दर्ज की थी।

 

जहानाबाद सीट एक नजर-

 

साल जीते हारे
1962 सत्यभामा देवी(कांग्रेस) चंद्रशेखर सिंह(सीपीआई)
1967 चंद्रशेखर सिंह(सीपीआई) एस देवी(कांग्रेस)
1971 चंद्रशेखर सिन्हा(सीपीआई) विवेकानंद शर्मा(बीजेएस)
1977 हरिलाल प्रसाद सिन्हा(बीएलडी) चंद्रिका प्रसाद यादव(कांग्रेस)
1980 महेंद्र प्रसाद(कांग्रेस आई) चंद्रशेखर सिंह(सीपीआई)
1984 रामाश्रय प्रसाद सिंह(सीपीआई) महेंद्र प्रसाद(कांग्रेस)
1989 रामाश्रय प्रसाद सिंह(सीपीआई) श्यामनंदन मिश्रा(कांग्रेस)
1991 रामाश्रय प्रसाद सिंह(सीपीआई) महेंद्र प्रसाद(कांग्रेस)
1996 रामाश्रय प्रसाद सिंह(सीपीआई) जगदीश शर्मा(कांग्रेस)
1998 सुरेंद्र यादव(राजद) अरुण कुमार(समता पार्टी)
1999 अरुण कुमार(जदयू) सुरेंद्र यादव(राजद)
2004 गणेश प्रसाद सिंह(राजद) अरुण कुमार(जदयू)
2009 जगदीश शर्मा(जदयू) सुरेंद्र यादव(राजद)
2014 अरुण कुमार(रालोसपा) सुरेंद्र यादव(राजद)
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