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डेंगू के साथ कालाजार का भी प्रकोप, जिले में अबतक मिले 251 मरीज, गोरेयाकोठी व भगवानपुर डेंजर जोन

Patna News - जिले में डेंगू के डंक के साथ ही कालाजार के प्रकोप से भी लोगों के बीच सनसनी फैल गई है। कारण कि इस जिले में भी इसके...

Dec 01, 2019, 11:16 AM IST
Siwan News - kala azar outbreak with dengue 251 patients found so far in the district goreyakothi and bhagwanpur danger zone
जिले में डेंगू के डंक के साथ ही कालाजार के प्रकोप से भी लोगों के बीच सनसनी फैल गई है। कारण कि इस जिले में भी इसके पीड़ित मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है। जनवरी से लेकर अभी तक जिले में 251 कालाजार के मरीज मिले हंै। इसमें गोरेयाकोठी, भगवानपुर व बसंतपुर प्रखंड क्षेत्र कालाजार के लिए डेंजर जोन बन गया है। साथ ही सीवान सदर क्षेत्र भी इससे वंचित नहीं है। पिछले 10 माह में सीवान सदर क्षेत्र में 25 कालाजार के मरीज मिले हंै। जबकि सबसे ज्यादा गोरेयाकाेठी में 65 मरीज मिले हैं। जबकि बसंतपुर क्षेत्र में 38 व भगवानपुर क्षेत्र में 40 मरीज मिले हैं। इसी तरह बड़हरिया प्रखंड क्षेत्र में भी मरीजों की संख्या 32 हैं। कालाजार होने का भी मुख्य कारण गंदगी व जलजमाव ही है। इन दिनों लोग डेंगू के डंक से पीड़ित हो रहे है। लेेकिन कालाजार से तो पहले ही लोग पीड़त हो रहे है। फिर भी लोगों को इससे निजात दिलाने के लिए पहले से कोई प्लानिंग नहीं की जा रही है। इस वजह से लोग गंदगी व जलजमाव की वजह से कालाजार के मचछर पनप रहे है। इस साल गोरेयाकोठी के लद्वी गांव कालाजार के लिए सबसे ज्यादा डेंजर जोन बना हुआ है। कारण कि केवल इसी गांव में सात मरीज मिले है। गांव के लोगों के बीच दहशत फैल गया है। हालांकि इस गांव में कालाजार के मरीजों की संख्या ज्यादा होने की वजह से स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है। इस गांव में अन्य लोगों को कालाजार नहीं हो, इसके लिए तीन बार डीडीटी का छिड़काव कराया गया है। इस साल 634 गांवों को कालाजार से बचाव के लिए डीडीटी छिड़काव के लिए चिन्हित किया गया था। जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. एमआर रंजन ने बताया कि इन सभी गांवों में डीडीटी का छिड़काव करा दिया गया है।

कालाजार के मच्छर छह फिट की ऊंचाई और घर के अंधेरे स्थान पर ही मिलते थे, मगर अब कहीं भी पाये जाते हैं

शहर के शांति वटवृक्ष के पास सड़क के किनारे गंदगी का अंबार।

बांसवाड़ी में भी मिलने लगे कालाजार के मच्छर

जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. एमआर रंजन के अनुसार, पहले कालाजार के मच्छर छह फीट की ऊंचाई तक ही मिलते थे। इसके मच्छर घरों में ही अंधेरे जगह पर पाये जाते थे। लेकिन, इस जिले में कई जगह कराए गए सर्वे के बाद इस बात की पुष्टि हुई है कि अब इसके मच्छर बांसवाड़ी में व ताड़ के पेड़ पर भी मिल रहे हैं। कारण कि गोरेयाकोठी के लद्वी गांव में जो मरीज मिले थे, वे बांसवाड़ी के पास रहते थे। जबकि अन्य गांवों में ताड़ के पेड़ केे पास भी मच्छर पाए गए थे। इससे अब इसके मच्छर कहां पर मिल सकते हैे। इस संदर्भ में भी अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा है। इस वजह से डीडीटी का छिड़काव कराना भी मुश्किल हो रहा है। कारण कि ताड़ के पेड़ व बांसवाड़ी में डीडीटी का छिड़काव कराना मुश्किल हो रहा है। साथ ही अब जहां पर भूसा रखा जा रहा है। वहां पर भी इसके मच्छर मिल रहे हैं।

पीड़ितों को इलाज के साथ 7100 रुपए

कालाजार के जहां पर भी मरीज मिलते हैं, वहां तीन साल तक डीडीटी का छिड़काव कराया जाता है। मरीजों की जांच व इलाज की व्यवस्था है। प्रत्येक पीड़ित को 7100 रुपए का भी भुगतान विभाग द्वारा किया जाता है। किसी को दो सप्ताह तक बुखार रहे तो उसकी जांच कराएं। - डॉ. एमआर रंजन, जिला मलेरिया पदाधिकारी, सीवान

तीन साल के डाटा के अनुसार प्रभावित गांवों में होना चाहिए दवा का छिड़काव

डीडीटी का छिड़काव कराने के लिए तीन साल के डाटा को देखा जाता है। इन तीन साल में जिस गांव में कालाजार के मरीज मिले होते हंै। उस गांव में ही डीडीटी का छिड़काव कराया जाता है। अगर तीन साल छिड़काव के बाद कोई मरीज नहीं मिले तो इसके बाद डीडीटी का छिड़काव नहीं होता है। इधर, गाेरेयाकोठी प्रखंड पिछले साल भी कालाजार के लिए डेंजर जोन था। इस प्रखंड के सिसई गांव में पिछले साल 15 कालाजार के मरीज मिले थे। इसके बाद तो इस गांव के लोगों के बीच इस तरह दहशत का माहौल हुआ कि गांव के जो लोग परदेश में रह रहे थे, वे घर आने से भी परहेज करने लगे थे। उन्हंे डर हो गया था कि कहीं गांव जाने पर उन्हें भी कालाजार न हो जाए।

शहर के आर्य कन्या हाई स्कूल के पास सड़क पर कचरे का ढेर।

शहर की मुख्य सड़कों पर गंदगी का लगा अंबार

शहर में सड़कों पर गदंगी का आलम यह है कि इससे कई अन्य तरह की भी बीमारियां फैल सकती है। लेकिन नगर परिषद साफ- सफाई के प्रति उदासीन बने हुए है। यहीं वजह है कि सभी प्रमुख सड़कों पर कचरे का ढेर है। साथ ही सड़के भी साफ नहीं है। सबसे व्यक्त स्थान आर्य कन्या हाई स्कूल के पास व शांति वटवृक्ष के पास भी कचरे का ढेर इसे लोग रोज गुजर रहे है। इससे छात्र-छात्राएं भी प्रभावित हो रहे है। सुबह में 10 बजे तक तो इस सड़क से गुजरना भी मुश्किल हो रहा है। इस वजह से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। डेंगू व कालाजार के मरीज मिलने के बाद भी नगर परिषद पूरी तरह से उदासीन है। शहर में जलजमाव क्षेत्र को दूर नहीं किया जा रहा है। इससे शहर के लोगों के बीच नाराजगी है। लोगों का कहना है कि शहर और ग्रामीण इलाकों में बीमारी फैले होने के बाद भी सरकारी अधिकारी-कर्मचारी और जनप्रतिनिधि हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।

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