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कार्तिक पूर्णिमा कल, भरणी नक्षत्र व सर्वार्थ सिद्धि योग में गंगा स्नान व दान करेंगे श्रद्धालु

Patna News - सनातन धर्मावलंबियाें के सबसे पुण्यकारी मास में कार्तिक पूर्णिमा का गंगा स्नान मंगलवार 12 नवंबर काे हाेगा। भरणी...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 09:21 AM IST
Patna News - karthik purnima tomorrow devotees will bathe and donate ganges in bharani nakshatra and sarvartha siddhi yoga
सनातन धर्मावलंबियाें के सबसे पुण्यकारी मास में कार्तिक पूर्णिमा का गंगा स्नान मंगलवार 12 नवंबर काे हाेगा। भरणी नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ मंगलवार को ग्रह-गोचरों के शुभ संयोग के बीच श्रद्धालु स्नान-दान करेंगे। इससे पहले साेमवार काे विश्व प्रसिद्ध साेनपुर में हरिहर क्षेत्र मेला शुरू हाे जाएगा। भारतीय संस्कृति में कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा को काशी में देवताओं की दीपावली के रूप में मनाया जाता है। इस दिन कई धार्मिक आयोजन, पवित्र नदी में स्नान, पूजन और दान-धर्म का विधान है। वर्ष के 12 मासों में कार्तिक मास आध्यात्मिक एवं शारीरिक ऊर्जा संचय के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। श्रद्धालु पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद श्री सत्यनारायण भगवान की कथा का श्रवण, गीता पाठ, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ व ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप कर पापमुक्त-कर्जमुक्त होकर भगवान विष्णु की कृपा पाते हैं।

कर्मकांड विशेषज्ञ ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा शास्त्री के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन भक्ताें पर भगवान विष्णु की अपार कृपा बरसती है। इस दिन गंगा स्नान से शरीर में पापों का नाश एवं सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। इसी दिन भगवान विष्णु ने अपना पहला अवतार मत्स्य अवतार लिया था। इस दिन श्री केशव के निकट अखण्ड दीप दान करने से दिव्य कांति की प्राप्ति होती है। साथ ही जातक को धन, यश, कीर्ति का लाभ भी मिलता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु ने मत्स्यावतार लिया था। इस दिन गंगा स्नान के बाद दीप-दान करना 10 यज्ञों के समान होता है। इस दिन अन्न, धन, वस्त्र, घी आदि दान करने से कई गुना फल मिलता है।

शुभ मुहूर्त

स्नान से मिलता है पूरे वर्ष का फल

मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा देवों की उस दीपावली में श्रद्धालुअाें काे शामिल होने का अवसर देती है, जिसके प्रकाश से प्राणी के भीतर छिपी तामसिक वृतियों का नाश होता है। इस माह की त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा को पुराणों ने अति पुष्करिणी कहा है। स्कंद पुराण में वर्णित है कि जो प्राणी कार्तिक मास में प्रतिदिन स्नान करता है, वह यदि केवल इन तीन तिथियों में सूर्योदय से पहले स्नान करे तो भी पूर्ण फल का भागी हो जाता है। कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा, त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने का बहुत महत्व है। मान्यताओं के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने से पूरे वर्ष गंगा स्नान करने का फल मिलता है।

मिथिला पंचांग के अनुसार 12 नवंबर को पूर्णिमा रात्रि 07:13 बजे तक है। वहीं बनारसी पंचांग के अनुसार प्रातः 07:02 बजे तक ही है अाैर अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:12 बजे से 11:55 बजे तक है, जबकि गुली काल मुहूर्त दोपहर 11:33 बजे से 12:55 बजे तक है। ज्याेतिषाचार्य ने बताया कि उद्या तिथि के मान से पूरे दिन पूर्णिमा तिथि का मान रहेगा तथा लाेग दिनभर गंगा स्नान और विष्णु पूजन कर सकते हैं।

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