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14 से शुरू हो रहा खरमास, शादी-विवाह और मांगलिक कार्यों पर लगेगा ब्रेक

एक वर्ष पहले
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हिन्दू धर्म का खास माह खरमास 14 मार्च शनिवार से शुरू हो रहा है । इसके साथ ही शुभ और मांगलिक कार्यों पर महीने भर का विराम लग जाएगा। अगले महीने 13 अप्रैल दिन सोमवार को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने के बाद खरमास समाप्त हो जाएगा और उसी दिन से शुभ व मांगलिक कार्य शुरू होंगे। खरमास में पितृ पिंडदान का खास महत्व है। मान्यता है कि खरमास में भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करने से वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

ऐसे तय होते हैं शुभ लग्न-मुहूर्त

शादी के शुभ लग्न व मुहूर्त निर्णय के लिए वृष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु एवं मीन लग्न में से किन्ही एक का होना जरूरी है। वहीं नक्षत्रों में से अश्विनी, रेवती, रोहिणी, मृगशिरा, मूल, मघा, चित्रा, स्वाति,श्रवणा, हस्त, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुन, उत्तरा भद्र व उत्तरा आषाढ़ में किन्ही एक का रहना जरूरी है ।अति उत्तम मुहूर्त के लिए रोहिणी, मृगशिरा या हस्त नक्षत्र में से किन्ही एक की उपस्थिति रहने पर शुभ मुहूर्त बनता है। पंडित झा की मानें तो यदि वर और कन्या दोनों का जन्म ज्येष्ठ मास में हुआ हो तो उनका विवाह ज्येष्ठ में नहीं होगा । तीन ज्येष्ठ होने पर विषम योग बनता है और ये वैवाहिक लग्न में निषेध है। विवाह माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़ एवं अगहन मास में हो तो अत्यंत शुभ होता है।

गुरु-शुक्र-रवि की शुभता है जरूरी

शास्त्रों में शादी-विवाह के लिए शुभ मुहूर्त का होना बड़ा महत्वपूर्ण होता है। यह सबसे पवित्र रिश्ता माना गया है। इसलिए इसमें शुभ मुहूर्त का होना जरूरी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शादी के शुभ योग के लिए वृहस्पति, शुक्र और सूर्य का शुभ होना जरूरी है। रवि और गुरु का संयोग सिद्धिदायक और शुभफलदायी होता है ।

भगवान नारायण का पूजन विशेष फलदायी

खरमास में कोई भी शुभ मांगलिक आयोजन नहीं होंगे। विवाह, नये घर में गृह प्रवेश, नये वाहन की खरीद, संपत्तियों का क्रय-विक्रय, मुंडन संस्कार जैसे अनेक शुभ कार्य वर्जित होते हैं । खरमास 13 अप्रैल 2020 को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने के साथ ही समाप्त हो जाएगा । सूर्य, गुरु की राशि धनु एवं मीन राशि में प्रवेश करता है तो इससे गुरु का प्रभाव समाप्त हो जाता है। शुभ मांगलिक कार्यों के लिए गुरु का पूर्ण बली अवस्था में होना आवश्यक है। इस दौरान सूर्य मलिन अवस्था में रहते हैं। इसलिए इस एक माह की अवधि में किसी भी प्रकार के शुभ मांगलिक कार्य नहीं किये जाते। इस समय विवाह संस्कार नहीं होते हैं। विवाह के लिए सूर्य और गुरु दोनों को मजबूत होना चाहिए।

सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करने पर लगता है खरमास

कर्मकांड विशेषज्ञ ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने पंचांगों के हवाले से बताया कि 14 मार्च को सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे । सूर्य के मीन राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास यानी अशुद्ध मास का आरंभ हो जाएगा । बनारसी पंचांग के अनुसार 14 तारीख की दोपहर 1 बजकर 46 मिनट पर सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे। वहीं मिथिला पंचांग के अनुसार प्रातः 8 :12 बजे सूर्य का मीन राशि में प्रवेश होगा। मिथिला पंचांग में भद्रामुख के हिसाब से समय निर्धारित की जाती है। जबकि बनारसी पंचांगों में भद्रा पूछ के अनुसार। सूर्य ही संक्रांति और लग्न के राजा माने जाते हैं। इनकी राशि का परिवर्तन ही खरमास का द्योतक है।

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