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जमीन छूटी, श्रद्धा और संस्कार न छूटे छठी मैया से जिसने जो मांगा सब मिला

बक्सर जिले के कुछ परिवार स्कॉटलैंड के पटना में बसे हैं। इस शहर को प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक विलियम फलार्टन ने 1802 में...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 04:20 AM IST
Patna - land lost reverence and sanskar from the sixth iya
बक्सर जिले के कुछ परिवार स्कॉटलैंड के पटना में बसे हैं। इस शहर को प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक विलियम फलार्टन ने 1802 में बसाया था। उनके पिता भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी में कार्यरत थे।। बिहार के पटना में ही विलियम फलार्टन का जन्म हुआ था। जब वापस अपने देश लौटे, तो जन्मस्थली के नाम पर शहर बसाया। यहां अधिकतर बिहार के लोग ही रहते है। यहीं बक्सर शहर निवासी रजनीश सिंह, अभय सिंह, संदीप श्रीवास्तव, विनोद सिंह, सनी विवेक व मांजारी सिंह रहते हैं। उन्होंने छठ पर्व के बारे में फोन पर बताया कि जब से होश संभाला है तब से पूर्वजों को यहां छठ करते देखा। स्कॉटलैंड के लोग पर्व करते हुए हमें बड़े आश्चर्य के साथ देखते थे। हमलोगों को भी अजीब लगता था। जब बड़े हुए तब महत्व पता चला। आस्था बढ़ने लगी। स्कॉटलैंड के मूल निवासी भी इस पूजा के प्रति आकर्षित होने लगे है। व्रत के दौरान कुछ ऐसी सामग्री की जरूरत पड़ती हैं, जो यहां नहीं मिल पाती है। जब भी हमलोग भारत जाते हैं, तो याद से उन सामग्रियों को लाते हैं ताकि उसका उपयोग किया जा सके। इस व्रत के प्रति आस्था आने वाली पीढ़ियों में भी बनी रहेगी।

बक्सर का परिवार

खींच लाती है सरजमीं

छठ को यूं ही लोक आस्था का पर्व नहीं कहते और आस्था के आगे फिर कोई तर्क कहां चलता है। जाति-धर्म की दीवारें भी इस महापर्व में मायने नहीं रखतीं, सरहद के फासले भी मिट जाते हैं। लोगों की कहानी मेरी जुबानी इस बात की जीती-जागती मिसाल हैं। पीढ़ियों पुरानी छठ की परंपरा किसी को परदेस से घर खींच लाती है तो कोई अपनी माटी से हजारों मील दूर अराध्यदेवै की परंपरा का निर्वाह करते हैं।

कोई सर्बिया से तो कोई साउथ अफ्रीका से छठ में आएगा घर

सीतामढ़ी के मझौलिया गांव के पंकज कुमार छठ पर्व में निश्चित आते हैं। सेवानिवृत्त शिक्षिका राजकुमारी ठाकुर के पुत्र पंकज भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में कार्यरत हैं। वर्तमान में सर्बिया स्थित भारतीय दूतावास में कार्यरत हैं। पंकज ने दूरभाष पर बताया कि प|ी कल्पना व पुत्री अनुष्का सर्बिया में ही हैं। बेटा आदित्य राजस्थान में पढ़ता है। छठ में निश्चित ही घर आना होता है। वहीं, बाजपट्‌टी प्रखंड के निवासी उमेश कुंवर के पुत्र प्रभात कुमार साउथ अफ्रीका में रहते हैं और इस बार छठ में वे शामिल होंगे।

स्कॉटलैंड के पटना में भी होता है छठ महापर्व

प्रफुल्ल मस्कट से हर साल छठ पूजा के लिए आते हैं पीरपैंती

छठ में भागलपुर जिले के पीरपैंती के प्रफुल्ल तिवारी चार दिनों के लिए अपनी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की नौकरी से छुट्टी लेकर घर पहुंचेंगे। उनकी प|ी उपवास करेंगी और उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही जीवन में नई ऊर्जा के संचार की मन्नत लिए वापस विदेश लौटेंगे। प्रफुल्ल अपने परिवार के साथ आठ साल पहले मस्कट में शिफ्ट हो गए। लेकिन छठ में अपने गांव शेरमारी जरूर आते हैं। बचपन में उनकी मां यह पूजा करती थीं। अब उनकी प|ी सोनी यह विरासत संभालती हैं।

यहां मिट जाती हैं सरहद की लकीरें

भारत-नेपाल सीमा पर सोनबरसा, त्रिभुवन नगर और मलंगवा के बीच बह रही झीम नदी के किनारे दोनों देशों के छठव्रती संध्या अर्घ्य के बाद साथ रात गुजारते हैं। नदी के एक किनारे बेटी का घाट होता है तो दूसरे किनारे मां का। दोनों देशों के बीच बेटी-रोटी का संबंध है। छठ के दौरान यहां सरहद की लकीरें भी खुद को मिटा डालने पर आमादा हो जाती है।

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