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लोकभाषाएं और लोकगीत इतिहास के स्रोत होते हैं, हमें उनको संरक्षित करने की जरूरत

Dainik Bhaskar

Sep 10, 2018, 05:06 AM IST

Patna News - पटना म्यूजियम में मैथिली साहित्य संस्थान और बिहार पुराविद् परिषद की ओर से ‘सहोदरा’ कार्यक्रम में मुंशी रघुनंदन...

Patna - लोकभाषाएं और लोकगीत इतिहास के स्रोत होते हैं, हमें उनको संरक्षित करने की जरूरत
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पटना म्यूजियम में मैथिली साहित्य संस्थान और बिहार पुराविद् परिषद की ओर से ‘सहोदरा’ कार्यक्रम में मुंशी रघुनंदन दास रचनावली पुस्तक का लोकार्पण किया गया। इस मौके पर पद्म भूषण शारदा सिन्हा का सम्मान किया गया। ‘बिहार लोकगीत’ विषय पर शारदा सिन्हा ने कहा कि बिहार की मैथिली, भोजपुरी, मगही, अंगिका, वज्जिका की समान भावनाएं हैं। उन्होंने लोकगीत, परिवार और समाज से सीखा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पद्मश्री प्रो. डॉ. उषा किरण खान ने कहा कि लोकगीत इतिहास के स्रोत होते हैं। उसे संरक्षित करने की जरूरत है। भोजपुरी अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. चितरंजन प्रसाद सिन्हा ने कहा कि बाबू कुंवर सिंह की युद्ध विवरणी लोकगीतों में मिलती है। इस अवसर पर लेखनाथ मिश्र, डॉ. रमानंद झा रेणु, भैरव लाल दास, डॉ. बी. के. सिन्हा, डॉ. शिवकुमार मिश्र, प्रेमलता मिश्र, विवेकानंद झा, नवल किशोर चौधरी, प्रो. डॉ. वीणा कर्ण, रिटायर आईएएस विजय प्रकाश, मृदुला प्रकाश, उषा झा, रघुवीर मोची, रामसेवक राय, डॉ. किशोर कुमार दास, विष्णु कुमार, डॉ. उमेश चंद्र द्विवेदी, रंगकर्मी कुणाल, कमल नयन श्रीवास्तव, दिनेश कुमार झा, कुमार गगन, विमल तिवारी, शंकर सुमन, नीतू तिवारी, चंद्र प्रकाश, अशोक कुमार सिन्हा, अलका दास, नूतन दास, अंशुमान उपस्थित थे।

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