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7645 शिक्षकों के सर्टिफिकेटों की जांच नहीं कर पाई निगरानी, 2 हजार को फिर नोटिस

शिक्षा विभाग में इन दिनों जांच का दौर चल रहा है। शिक्षा कार्यालय में जिधर सुनो सिर्फ जांच व शो-कॉज की चर्चा होती है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 17, 2018, 02:15 AM IST

7645 शिक्षकों के सर्टिफिकेटों की जांच नहीं कर पाई निगरानी, 2 हजार को फिर नोटिस
शिक्षा विभाग में इन दिनों जांच का दौर चल रहा है। शिक्षा कार्यालय में जिधर सुनो सिर्फ जांच व शो-कॉज की चर्चा होती है। पर उसके नतीजे आजतक किसी को मालूम नहीं। 40 माह में भी निगरानी 7652 नियोजित शिक्षकों के सर्टिफिकेट की जांच पूरी नहीं कर पाई। अब फिर करीब 2000 टेट शिक्षकों को सर्टिफिकेट जांच की नोटिस थमा दी गई है। स्थापना द्वारा सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को टेट शिक्षकों के सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। लिहाजा टेट शिक्षक अपनी-अपनी सर्टिफिकेट विभाग को उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। यह जांच कब तक होगी, यह विभागीय अधिकारी बताने से कतरा रहे हैं। लेकिन शिक्षकों पर तत्काल सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने का दबाव दिया जा रहा है। शिक्षा विभाग के पत्रांक संख्या 564 के द्वारा टेट शिक्षकों को यह आदेश दिया गया है। पत्र में कहा गया है कि नवादा जिले में फर्जी सर्टिफिकेट पर बहाल शिक्षकों के मामला उजागर होने की वजह से जांच करायी जा रही है।

शिक्षा सचिव के पत्र के अनुसार शिक्षक पात्रता परीक्षा के एक प्रमाण पत्र पर एक से अधिक नियोजित शिक्षकों के बहाल होने के मामला उजागर होने पर विभाग द्वारा जांच करायी जा रही है। जिसके चलते सभी टेट शिक्षकों का सर्टिफिकेट जांच करायी जाएगी। जिसमें प्रखंड शिक्षकों व पंचायत शिक्षकों से अंक प्रमाण पत्र एवं सर्टिफिकेट की मूल कॉपी मांगी गई है। वहीं उनसे एडमिट कार्ड की अभिप्रमाणित छायाप्रति की सॉफ्ट व हार्ड कॉपी मांगी गई है। जिसकी जांच स्थापना विभाग द्वारा जांच कराई जाएगी। जांच में यह देखा जाएगा कि अंक प्रमाण पत्र, सर्टिफिकेट व एडमिट कार्ड सही हैं या नहीं। इसमें एक भी प्रमाण पत्र नहीं मिला या फिर फर्जी पाया गया तो शिक्षकों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

2003 से 14 के बीच बहालशिक्षकों की हो रही जांच

निगरानी कार्यालय में धूल फांक रहा शिक्षकों द्वारा जमा की गईं सर्टिफिकेट फाइलें। ,

शिक्षक संघ के नेताओं ने कहा, जांच के नाम पर डरा रही सरकार

विभागीय आंकड़ों पर अगर गौर करें तो पहली से लेकर आठवीं तक में जिलेभर में 7589 नियोजित शिक्षक हैं। जिसमें 2168 पंचायत शिक्षक, 5213 प्रखंड शिक्षक व 208 नगर शिक्षक कार्यरत हैं। इसमें करीब 2000 टेट शिक्षक हैं। जिलेभर के अधिकांश स्कूलों में नियोजित शिक्षक प्रभार में हैं। टेट शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष शंभू कुमार ने बताया कि वे जांच के लिए तैयार हैं। परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के मीडिया प्रभारी सुनील कुमार बॉबी ने बताया कि शिक्षकों को सर्टिफिकेट जांच के नाम पर सरकार डरा रही है। आंदोलन को कुचलने के लिए ऐसा किया जा रहा है। इससे सिर्फ पदाधिकारियों की दुकानदारी चलेगी। इधर बिहार संयुक्त प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिला सचिव मार्कण्डेय सिंह ने कहा कि शिक्षकों को शोषण करने के लिए हर रोज सरकार एक नया हठकंडा अपना रही है। जल्द ही शिक्षक एकजुट होकर सरकार के खिलाफ हल्ला बोल आंदोलन करेंगे। कहा- शिक्षकों के ऊपर साजिश किया जा रहा है।

प्रश्न:- यह जांच क्यों हो रही है?

उतर:- स्थापना डीपीओ जवाहर प्रसाद ने बताया कि नवादा जिले में एक ही सर्टिफिकेट पर कई लोग बहाल थे। फर्जीवाड़ा उजागर हाेने पर विभाग द्वारा पूरे सूबे में इसकी जांच कराई जा रही है।

प्रश्न:- क्या आपको लगता है आपके विभाग में फर्जी शिक्षक हैं?

उतर:- यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा कि फर्जी शिक्षक हैं या नहीं।

प्रश्न:- 2015 से निगरानी फर्जी शिक्षक पकड़ने में जुटी है, अब तक कितने पकड़ाए?

उतर:-यह तो निगरानी ही बतायेगा कि कितने शिक्षक पकड़े गए। जांच पूरी होने पर सबको पता चल जाएगा सच्चाई क्या है।

प्रश्न:-क्या आपकों नहीं लगता है कि जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रहा है?

उतर:- बिल्कुल नहीं। जांच एक प्रक्रिया के तहत हो रही है, थोड़ा बिलंब हो सकता है। लेकिन जांच में सबकुछ साफ हाे जाएगा।

डीपीओ से सीधी बात

बड़ा सवाल-

आखिर 40 माह में निगरानी ने क्यों नहीं पकड़े फर्जी शिक्षक

नियोजित शिक्षकों की बहाली में फर्जीवाड़ा की जांच कर रही निगरानी आखिर 40 माह में अपना जांच क्यों पूरा नहीं कर पाई। आखिर एक भी फर्जी शिक्षक अब तक क्यों नहीं पकड़े गए। आखिर जांच पूरी कब होगी। क्या जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति का खेल जारी रहेगा है। यह सवाल अब हर शिक्षकों के जुबां पे है। हाईकोर्ट के आदेश पर निगरानी 2015 से 7652 शिक्षकों के सर्टिफिकेट जांच कर रही है। यह जांच 2003 से लेकर 2014 तक के बहाल नियोजित शिक्षकों की हो रही है। लेकिन निगरानी ने खुद से अब तक एक भी फर्जी शिक्षक नहीं पकड़े। जांच शुरू होने के कुछ माह बाद हाइकोर्ट ने जुलाई 2015 में फर्जी शिक्षकों को मौका देते हुए उन्हें स्वेच्छा से त्याग पत्र देने को कहा था। जिसके बाद जिले के 121 शिक्षकों ने अपनी नौकरी से त्याग पत्र दे दिया था। ये फर्जी शिक्षकों को भी निगरानी नहीं पकड़ पायी थी। शुरूआत में निगरानी के करीब आधा दर्जन लोग सर्टिफिकेट की जांच कर रहे थे। लेकिन अब उनमें से अधिकांश लोग हट गए। अब एक इंस्पेक्टर व एक सिपाही के भरोसे अब सर्टिफिकेट जांच का खानापूर्ति किया जा रहा है।

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Web Title: 7645 शिक्षकों के सर्टिफिकेटों की जांच नहीं कर पाई निगरानी, 2 हजार को फिर नोटिस
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