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बेचे जाने की लगी भनक, तो 10 साल की अनाथ शाम्भवी ने भाग कर बचाई जान

यह अविश्सनीय कहानी है, 10 साल की तेजतर्रार शाम्भवी की। इतनी छोटी सी उम्र में उसने दुनिया का लगभग सारा दर्द झेल लिया।...

Danik Bhaskar | Jun 14, 2018, 03:05 AM IST
यह अविश्सनीय कहानी है, 10 साल की तेजतर्रार शाम्भवी की। इतनी छोटी सी उम्र में उसने दुनिया का लगभग सारा दर्द झेल लिया। समस्तीपुर के एक होटल मालिक गुड्डु ने शाम्भवी को अपने पास एक महीना रखा। झाडू पोछा करवाया। उसके साथ गलत हरकत भी करना चाहा। लेकिन उसने होशियारी से खुद को बचा लिया। मंगलवार को गुड्डु शाम्भवी को संदिग्ध व्यक्ति राहुल के हाथों बेच रहा था। राहुल गुड्डु को रुपए का बंडल दे रहा था। उसे शक हो गया। वह टॉयलेट के बहाने भाग गई। कुछ दूर पैदल बेतहाशा भागने के बाद समस्तीपुर जंक्शन पर पहुंची। फिर बरौनी की तरह जाने वाले एक ट्रेन पर बैठ गई। उसे कुछ देर बाद कुछ समझ में नहीं आ रहा था। वह रोने लगी। उसे रोते देख बछवाड़ा निवासी रंजीत ने रोने का कारण पूछा। उसने सारा किस्सा सुनाया। रंजीत ने मानवता का परिचय देते हुए शाम्भवी झा को बछवाड़ा थाना को सौंप दिया।

समस्तीपुर के होटल मालिक ने शाम्भवी को अपने पास रखा और मौका देखते ही कर दिया सौदा

शाम्भवी का नहीं है दुनिया में कोई सगा, मां बाप की हुई है हत्या

शाम्भवी बताती है कि उसके मम्मी और पापा ने लव मैरिज शादी किया था। इस वजह से दोनों परिवार के परिजनों ने मेरी मम्मी पापा से सारा रिश्ता तोड़ लिया था। वह हैदराबाद के मल्लिक वाटिका मोहल्ले में रहती थी। उसका अच्छा खासा खाता पीता परिवार था। उसके घर में सुख सुविधा का हर सामान मौजूद था। वह स्वीट होम पब्लिक स्कूल में पढ़ती थी। एक साल पहले जब वह स्कूल से लौट कर घर पहुंची तो देखा कि पापा विनोद झा और मम्मी ममता देवी की हत्या कर दी गई है। बदमाशों ने पापा को सिर मे गोली मार दिया और मम्मी का गला रेत दिया था। पापा मम्मी की किसने और क्यों हत्या की उसे कुछ भी नहीं मालूम है। पुलिस केस होने के बाद पड़ोस में ही रहने वाली मोना दीदी ने उसे अपने पास रख लिया। मोना खुद को मुजफ्फरपुर की रहने वाली बताती थी। एक महीना पहले मोना ने उसे समस्तीपुर में एक होटल मालिक गुड्डु महतो के हाथों बेच दिया।

जैसा की शाम्भवी ने बताया

सर मैं .... अपने जैसे दोस्तों के साथ खुशीपूर्वक जी लुंगी

बछवाड़ा पुलिस ने शाम्भवी को महिला हेल्पलाइन भेज दिया। बछवाड़ा पुलिस और मानव व्यापार निरोध इकाई के टीएसएन के जिला समन्वयक रामसुमरन झा उसे लेकर महिला हेल्पलाइन पहुंचे। जहां उसे जिला बाल कल्याण समिति के पास भेजा गया। जब शाम्भवी को पता चला कि उसे बालगृह में रहना होगा। तो उसने खुशी से झूमते हुए कहा कि वहां तो उसकी जैसी लड़की होगी न। उसी के सहारे वह जी लेगी।