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जांच में खुलासा : बीपीएससी नहीं पकड़ पाई गड़बड़ी, कर दी थी नियुक्ति की अनुशंसा

बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग को भेजी गई असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति की अनुशंसा...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 02:10 AM IST
बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग को भेजी गई असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति की अनुशंसा प्रस्ताव में गड़बड़ी सामने आई है। प्रोफेसर के पद के तीन अभ्यर्थियों की डिग्री मानदंड के अनुरूप नहीं पाई गई है। विभागीय जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग ने तीनों नियुक्ति प्रस्ताव को रद्द कर दिया है। विभाग का कहना है कि राज्य के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों के असिस्टेंट प्रोफेसर (यांत्रिक) पद के लिए सात मई 2014 को बीपीएससी को भेजी गई वैकेंसी में जिन योग्यताओं का जिक्र किया गया, उसके आधार पर सभी अभ्यर्थियों का चयन नहीं किया गया। तीन अभ्यर्थियों के डिग्री पर सवाल खड़े हुए।

बीपीएससी की ओर से साइंस टेक्नोलॉजी विभाग को वैकेंसी के आधार पर आठ नवंबर 2017 को पत्रांक 182 के तहत 73 अभ्यर्थियों के चयन की अनुशंसा की गई। विभाग को मिली अनुशंसा के आधार पर 28 नवंबर 2017 को विभागीय आदेश 2802 के तहत सभी चयनित अभ्यर्थियों की शैक्षणिक व प्रशैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच का निर्णय लिया गया।

सामने आई यह खामी

जांच के क्रम में पाया गया कि गौरव ने मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग से बीटेक डिग्री हासिल की है। यह विभागीय वैकेंसी के अनुरूप नहीं थी। प्रेम कुमार ने अल्टरनेट हाइड्रो एनर्जी सिस्टम विषय से एमटेक की डिग्री हासिल की। यह विभागीय वैकेंसी के अनुरूप नहीं पाई गई। साथ ही, एअाईसीटीई की 28 अप्रैल 2017 की अधिसूचना में भी मैकेनिकल इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए एमटेक यह डिग्री प्रासंगिक या उपयुक्त कोर्स की सूची में नहीं है। आशुतोष कुमार ने बीटेक डिग्री ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में हासिल की है। इसे विभागीय वैकेंसी के अनुरूप नहीं माना गया है। साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग की जांच टीम ने साफ कहा कि बीपीएससी की ओर से अनुशंसित इन तीन अभ्यर्थियों की बीटेक व एमटेक डिग्री निर्धारित वैकेंसी के अनुरूप नहीं है। इसलिए ये इंजीनियरिंग कॉलेजों के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर बनाए जाने के योग्य नहीं हैं। विभाग के निदेशक अतुल सिन्हा ने बताया कि विभागीय स्तर पर इन अभ्यर्थियों के मामले की समीक्षा में गड़बड़ी पाई गई। इसके बाद उनके असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर दावेदारी को समाप्त करने का फैसला लिया गया है।

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