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शरीर में बर्छी चुभोकर नाचे लोग, देख थम गईं सांसें

लोमहर्षक पंजरभोंकवा मेला देख लोगों की सांसें सोमवार की सुबह थम गईं। शरीर के हिस्सों में लोहे की बर्छी आर-पार कर...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 02:10 AM IST
लोमहर्षक पंजरभोंकवा मेला देख लोगों की सांसें सोमवार की सुबह थम गईं। शरीर के हिस्सों में लोहे की बर्छी आर-पार कर नाचते-गाते व झूमते हुए लोग पूरे शहर का भ्रमण करते दिखे। यह पूरी तरह से आस्था का अद‌्भुत परिचायक है।

सती-सत्यवान की स्मृति में हर साल चली आ रही यह परंपरा रानीपुर की पहचान है। कहते हैं कि मलेशिया के बाद यह दूसरा स्थान है, जहां ऐसे आयोजन किए जाते हैं। पंजरा लेने वालों में कन्हैया ठाकुर, शिवपूजन गोप, सरोज पासवान, सुपन भगत, शत्रुघ्न प्रसाद, गोपाल पासवान, मनोज कुमार आदि थे। पंजरा और शरीर के अन्य अंंगों में लोहे की बर्छी आर-पार होने के बाद भी चेहरे पर आस्था की खुशी झलकती है। लोक संस्कृति के इस पर्व में सभी लोग नाचते-गाते हुए शामिल हुए। रविवार की रात दीपू व्यास व टुनटुन व्यास के बीच चैतावर प्रतियोगिता हुई। पूर्व पार्षद अवधेश सिन्हा, प्रेम चौधरी का कहना है कि यह आयोजन लगातार सिमटता जा रहा है। हरिओम नवयुवक समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश निषाद, हरिनारायण गोप, मुकेश वर्मा, देवनारायण ठाकुर, बालदेव ठाकुर, देवीलाल पासवान, मन्नत राय, बाबू पासवान, रोहित राय, जनक राय आदि तीन दिवसीय मेले की सफलता के लिए सक्रिय रहे।