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दूसरों में नहीं, खुद में दोष ढूंढ़ो, हर मनुष्य में है कमी

बैंक रोड स्थित एमएस मेंसन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन आचार्य दामोदर दास वृंदावन वाले ने कहा कि हर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:15 AM IST

दूसरों में नहीं, खुद में दोष ढूंढ़ो, हर मनुष्य में है कमी
बैंक रोड स्थित एमएस मेंसन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन आचार्य दामोदर दास वृंदावन वाले ने कहा कि हर मनुष्य में कोई न कोई कमी है। सिर्फ ईश्वर के सिवा कोई पूरा नहीं है। जब भी समाज में जीवन में कुछ अच्छा होने लगता है तो लोगों में यह भाव उत्पन्न होने लगता है कि यह मैंने किया। यह अहंकार है। यह भाव मनुष्य को पीछे ले जाता है। इसलिए कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। आनंद पर चर्चा की। कहा कि जिसने हर चीज में आनंद लेना सीख लिया, एक दिन परमानंद की यात्रा अवश्य पूरी होगी। जैसे दिन आता है फिर रात उसी तरह जीवन में सुख और दुख आता है। इसलिए दुख आने पर घबराना नहीं चाहिए और सुख आने पर घमंड नहीं करना चाहिए। पहले दिन की कथा में आयोजक मधुमेश चौधरी, सारिका चौधरी, मीडिया प्रभारी पुष्कर अग्रवाल, जयप्रकाश, छोटू, केदार प्रसाद, पप्पू सिंह, राजू महतो आदि सक्रिय रहे।

दामोदर दास जी वृंदावन जी।

बैंक रोड में श्रीमद‌्भागवत कथा के पहले दिन कथा सुनते श्रद्धालु।

पाश्चात्य संस्कृति हावी होने से संस्कार भूल रहे लोग

डीएवी बोर्ड कॉलोनी में श्रीरामकथा में आचार्य सुदर्शन जी महाराज ने कहा

पटना|डीएवी बोर्ड कॉलोनी में चल रही श्रीराम कथा के दूसरे दिन आचार्य सुदर्शन जी महाराज ने कहा कि आज पाश्चात्य संस्कृति के हावी होने से लोग अपनी संस्कृति व संस्कार भूलते जा रहे हैं। कथा प्रसंग में भगवान श्रीराम व उनके भाइयों के नामकरण संस्कार की चर्चा की। कहा कि प्राचीन काल में गुरु द्वारा शुभ मुहूर्त में विद्या आरंभ कराई जाती थी। आज लोग इस पर ध्यान नहीं देते। इसी का असर है कि बहुत अच्छे स्कूलों में पढ़ने के बावजूद बच्चे संस्कारवान नहीं बन पाते।

कथा क्रम में उन्होंने पुष्प वाटिका की चर्चा की। कहा कि गुरु की पूजा के लिए फूल चुनने के लिए श्रीराम व लक्ष्मण पुष्प वाटिका में जाते हैं। उधर जगत जननी सीता अपनी माता सुनयना के आज्ञानुसार अपनी सहेलियों के साथ गिरिजा पूजन के लिए पुष्प वाटिका में जाती हैं। इस दौरान प्रभु श्रीराम पर नजर पड़ते ही वह अपना सुध-बुध खो बैठती हैं। फिर गिरिजा के मंदिर जाकर श्रीराम को वर के रूप में प्राप्त करने का आशीर्वाद मांगती हैं। अधर राजमहल में धनुष यज्ञ की तैयारी चल रही है। श्रीराम लक्ष्मण व गुरु विश्वामित्र के साथ रंगभूमि में जाते हैं। प्रभु श्रीराम धनुष भंग करते हैं और सीता को जयमाला पहनाते हैं। इस दौरान ध्रुव नारायण सिंह, राजेश कुमार सिन्हा, डॉ. विनोद शर्मा आदि उपस्थित रहे।

आचार्य सुदर्शन जी महाराज।

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