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आईजीआईएमएस में दो माह बाद से लिवर ट्रांसप्लांट

आईजीआईएमएस में ब्रेन डेड मरीज से लिवर मिलते ही लिवर ट्रांसप्लांट शुरू हो जाएगा। संस्थान के चिकित्सकों और पारा...

Danik Bhaskar | Sep 10, 2018, 05:05 AM IST
आईजीआईएमएस में ब्रेन डेड मरीज से लिवर मिलते ही लिवर ट्रांसप्लांट शुरू हो जाएगा। संस्थान के चिकित्सकों और पारा मेडिकल स्टाफ की एक टीम फिलहाल दिल्ली आईएलबीएस में प्रशिक्षण ले रही है। दूसरी टीम 12 सितंबर को प्रशिक्षण लेने के लिए रवाना होगी। ट्रांसप्लांट की शुरुआत आईएलबीएस की टीम करेगी। ब्रेन डेड मरीज के लिए संस्थान ने तीन प्राइवेट अस्पतालों से करार किया है। इनमें हाइटेक हॉस्पिटल, विमल हॉस्पिटल और जगदीश मेमोरियल हॉस्पिटल शामिल हैं। यदि ये अस्पताल ब्रेन डेड मरीज देते हैं तो आईजीआईएमएस या फिर सरकार उसका सारा खर्च उठाएगी। यहां तक कि ब्रेन डेड मरीज का दाह संस्कार भी अपने खर्च से करेगी। शर्त होगी कि ब्रेन डेड मरीज के परिजन अंग निकालने की अनुमति देंगे। ब्रेन डेड मरीज की मौत 24 से 48 घंटे के अंदर हो जाती है।

मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि लिवर ट्रांसप्लांट की शुरुआत कडैवेरिक लिवर से ही की जाएगी, क्योंकि लाइव डोनर से शुरुआत करने में दोनों को ही उतना रिस्क रहता है। रिस्क कम हो इसलिए शुरुआत कडैवेरिक लिवर से की जाएगी। वैसे जहां भी लिवर ट्रांसप्लांट की शुरुआत हुई है वहां कडैवेरिक लिवर से ही की गई है। कुछ लिवर ट्रांसप्लांट हो जाने पर लाइव डोनर से लिवर लेकर ट्रांसप्लांट करना संभव होगा। डॉ. मंडल के मुताबिक लिवर ट्रांसप्लांट पर 15 लाख रुपए खर्च होंगे। राज्य सरकार को भी अनुदान देने के लिए प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि लिवर ट्रांसप्लांट प्लांड बजट में नहीं है। इसलिए तत्काल लिवर ट्रांसप्लांट कराने पर कितना अनुदान मिलेगा यह कहना अभी संभव नहीं है। वैसे मौखिक आश्वासन मिला है कि जब तक 15 लाख रुपए मंजूर नहीं हो जाता तब तक पांच रुपए मिल सकता है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई।

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