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लोकसभा चुनाव 2019 : दिल के साथ दल और क्षेत्र भी बदलने को तैयार सांसद

- इसके लिए कुछ ने सार्वजनिक कार्यक्रम में इजहार कर दिया, कई पीछे से सियासी गोटी बिठाने में लगे

Danik Bhaskar | Jun 16, 2018, 03:57 AM IST
सांसद शत्रुघ्न सिंहा व कीर्ति सांसद शत्रुघ्न सिंहा व कीर्ति

पटना. साल भर से भी कम बचे लोकसभा चुनाव की बिसात बिछने लगी है। सामाजिक समीकरण और निश्चित जीत की आकांक्षा में सांसद दिल के साथ दल और इलाका बदलने को भी तैयार हैं। कुछ ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसका इजहार भी शुरू कर दिया है तो कई पीछे से सियासी गोटी बिठा रहे हैं। चूंकि 2014 के चुनावी समर में सबसे अधिक 40 में 31 सीट एनडीए गठबंधन को मिली थीं, ऐसे में उसके सांसदों में फिर से सांसदी बचाने की बेचैनी है। भाजपा से दरभंगा के सांसद कीर्ति आजाद और पटना साहिब के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा तो दल के नेताओं के खिलाफ गुस्से का लगातार इजहार कर रहे हैं। वहीं लोजपा से वैशाली के सांसद रामा सिंह पार्टी नेतृत्व के खिलाफ कुछ बोल तो नहीं रहे हैं पर कई माह से किनारा कर लिया है।


परफारमेंस पर सवालिया निशान से फंस रहा मामला
- राजनीतिक पंडितों की माने तो भाजपा के इंटरनल सर्वे में उसके सांसदों का परफारमेंस इंडेक्स मुख्य मानक है। इस मानक पर कई के खरा नहीं उतरने की बात सामने आ रही है। ऐसी सूची में औरंगाबाद, गोपालगंज, सासाराम समेत कुछ और लोकसभा सीट है।

- बेगूसराय से भाजपा सांसद भोला सिंह की खराब सेहत का असर दिख रहा है। हमेशा अपने बयान से चर्चा में रहने वाले भोला सिंह सुस्त पड़े हैं। सीतामढ़ी से रालोसपा सांसद रामकुमार शर्मा वैसे तो क्षेत्र में मौजूद हैं पर सामाजिक समीकरण के हिसाब से राजनीति की नई परिस्थिति में उनकी उम्मीदवारी पर सवालिया निशान लग रहा है।

तेजस्वी की बात रालोसपा ने मानी तो बदल जाएगा समीकरण
- सांप्रदायिकता के विरोध की राजनीति करने के दम पर बने महागठबंधन में भाजपा को हराने के लिए कई दल आने लगे हैं। पर राजद नेता तेजस्वी यादव की बात रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने मान ली तो महागठबंधन ही नहीं, एनडीए का भी समीकरण बदल जाएगा।

- रालोसपा के दो सांसद केन्द्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा और रामकुमार शर्मा एक साथ हैं तो तीसरे सांसद अरुण कुमार अलग राग अपनाए हुए हैं। राजद नेता तेजस्वी लगातार रालोसपा पर डोरा डाल रहे हैं। वे कुशवाहा को बड़ा जनाधार वाला नेता बता रहे हैं। हालांकि कुशवाहा उनके आग्रह को सिरे से नकार रहे हैं।
- राजद के उम्मीदवार भी पसोपेश में 2014 में मात्र तीन दल राजद 27, कांग्रेस 12 और एनसीपी 1 सीट पर यूपीए गठबंधन के बैनर तले चुनाव लड़े थे। इस बार के महागठबंधन में सीपीआई, सीपीएम, हम, माले, लोजद अभी से जुड़ने को तैयार हैं।

- ऐसे में राजद के पिछले उम्मीदवार पसोपेश में हैं। इन दलों के खाते में जो सीटे जाएंगी, उनके लिए राजद और कांग्रेस के पिछले उम्मीदवारों को सीट कुर्बान करनी पड़ेगी। मोतिहारी, बेगूसराय, मधेपुरा, गया, आरा, पूर्णिया, सीतामढ़ी के राजद उम्मीदवारो की परेशानी अभी से दिखने लगी है।

जदयू के एनडीए में आने से सांसत में राजग सांसद

- जदयू ने पिछला चुनाव एनडीए से अलग होकर लड़ा था। ऐसे में एनडीए के समय की उसकी दो परंपरागत सीटें मुंगेर व झंझारपुर से उसकी दावेदारी कमजोर पड़ गई। जदयू के फिर एनडीए में आ जाने के बाद भी मुंगेर से लोजपा सांसद वीणा देवी व झंझारपुर से भाजपा सांसद बीरेन्द्र चौधरी की सीटिंग के नाते मजबूत दावेदारी है। बंटवारे में ये सीटें जदयू के पास गई तो इन दोनों के लिए नई सीट खोजना मुश्किल होगा।