--Advertisement--

पति ने शराब के नशे में पत्नी को 500 रुपए में बेचा, गांव वालों ने शराब दुकानदार से छुड़ाया

पति ने घर का सारा सामान बिक जाने के बाद शराब न पीने की बात कही। लेकिन, जैसे ही सुदामा घर आई, उसका शराब पीने का सिलसिला फ

Danik Bhaskar | Jul 12, 2018, 08:52 AM IST
-डेमो इमेज -डेमो इमेज

पटना. सात जन्मों तक साथ निभाने का वादा करने वाला पति अगर साथ छोड़ जाए तो इससे खराब स्थिति क्या हो सकती है? सुदामा देवी के पति ने शराब के नशे में उसे 500 रुपए में बेच दिया। जब हंगामा मचा तो गांव वालों ने जाकर उसे शराब दुकानदार से छुड़ाया। इसके बाद सुदामा ने गांव की किसी भी महिला को इस प्रकार की स्थिति का सामना न करना पड़े, इसके लिए आंदोलन शुरू किया। मामला शेखपुरा प्रखंड के वीरपुर गांव की है। हर दिन घर का कोई सामान बेचकर पति शराब पी जाया करता था। मना करने पर झगड़ा-मारपीट। इससे तंग आकर एक दिन सुदामा पिता के घर चली गई। पर, जब घर का सारा सामान बिक गया तो पति बुलाने गया। सामाजिक तानों से परेशान सुदामा लौट आई।

पति की नहीं बदली दिनचर्या
पति ने घर का सारा सामान बिक जाने के बाद शराब न पीने की बात कही। लेकिन, जैसे ही सुदामा घर आई, उसका शराब पीने का सिलसिला फिर शुरू हो गया। सात बच्चों का परिवार चलाना कठिन होता जा रहा था। सुदामा किसी प्रकार घर चला रही थी। एक दिन पति घर नहीं लौटा। खोजने निकली सुदामा को पति शराब के ठेके पर मिला। उसे दुकानदारों ने पैसा नहीं देने के कारण बंधक बनाया हुआ था। जैसे ही पत्नी वहां पहुंची, पति ने बेच दिया और खुद भाग निकला।

बदल गई सुदामा की जिंदगी
शराब दुकानदार को खुद को बेचे जाने के बाद सुदामा की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। उसने उसी दिन तय कर लिया कि अब शराब के खिलाफ अभियान चलाऊंगी। गुलाब जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी और उसने आंदोलन शुरू कर दिया। इस बीच शराबबंदी की घोषणा हो गई। उसने जोर-शोर से अभियान चलाना शुरू कर दिया। आज गांव में कोई शराब नहीं पीता है।

शराब के नशे में गुजारे 40 साल

शेखपुरा सराय के बेलाऊ की कांति देवी की शादी महज 15 वर्ष की आयु में कर दी गई। परिवार वालों ने जिससे उनकी शादी की, वह पियक्कड़ निकला। पति केवल शराब पीता। घर का काम और घर चलाने के लिए काम कांति करती। ऐसा ही 40 वर्षों तक चलता रहा। कृष्ण जीविका स्वयं सहायता समूह की इस सदस्य ने शराबबंदी के लिए मुहिम शुरू की। उनकी मुहिम का परिणाम था कि उनके पति व अन्य शराबी उन पर आंदोलन रोकने का दबाव बनाने लगे। हालांकि, वे नहीं थकी, न ही रुकी। जब सरकार ने शराबबंदी की घोषणा की तो कांति ने जोर-शोर से अभियान चलाना शुरू कर दिया। अब उनके पति व गांव के लोग शराब नहीं पीते हैं।