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कॅरिअर में कई चीजें फेवर में नहीं हुईं पर मैं कभी अपना हौसला नहीं छोड़ूंगा: अध्यन

Patna News - अध्यन सुमन वेब सीरीज ‘डैमेज्ड 2’ में बतौर लीड नजर आ रहे हैं। उनकी मानें तो उन्होंने खुद मेकर्स को काम के लिए अप्रोच...

Jan 19, 2020, 08:21 AM IST
Patna News - many things have not happened in my career but i will never give up my spirits study
अध्यन सुमन वेब सीरीज ‘डैमेज्ड 2’ में बतौर लीड नजर आ रहे हैं। उनकी मानें तो उन्होंने खुद मेकर्स को काम के लिए अप्रोच किया था। हालिया मुलाकात में अध्यन ने अपनी प्रोफेशनल लाइफ से जड़ी कुछ खास बातें शेयर की...


भास्कर नेटवर्क. मुंबई

पटना वीमेंस काॅलेज में एनुअल स्पाेर्टस डे : हर चेहरे पर खुशी, हर ओर दिखा उत्साह

सीमा ने ‘दादी अम्मा.. दादी अम्मा मान जाओ’ में अपनी भूमिका के लिए सीखी मराठी

सर्दियों की नई
हेल्दी सब्जियां


एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु [[email protected]]

ग्राहकों की ख्वाहिशें पहचानकर उन्हें उनका अहसास बेचिए

पटना, रविवार, 19 जनवरी, 2020 . 03


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 मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए 9190000071 पर मिस्ड कॉल करें।

Glamour

प्रोड्यूसर्स को टीवी पर रिस्क लेना चाहिए...मुझे टेलीविजन के लिए कई बार ऑफर आए हैं लेकिन मैंने इंकार कर दिया। सच कहूं तो जिस तरह के कंटेंट टेलीविजन पर दिखाए जा रहे हैं, उससे मैं बिल्कुल खुश नहीं हूं। मुझे लगता है कि मेकर्स बहुत ही रिग्रेसिव शोज बना रहे हैं जो कि सही नहीं है। मेकर्स को लगता है कि चलो शो चल रहा है, पैसे मिल रहे हैं तो इसे चलने देते हैं। कहीं भी प्रोग्रेसिव कंटेंट नहीं दिखाया जाता है। मुझे लगता है प्रोड्यूसर्स को टीवी पर रिस्क लेना चाहिए। पिछले 15-20 वर्षों से जिस तरह का कंटेंट दिखाया जा रहा है। उसे हटाने के लिए वक्त लगेगा। सिर्फ 4 अच्छे शोज लाने से बदलाव नहीं लाया जा सकता है। वक्त देना पड़ेगा साथ ही रिस्क भी उठाना पड़ेगा, तब जाकर हम टीवी में बदलाव देख पाएंगे। मौका मिला तो टीवी पर कुछ करना चाहूंगा लेकिन जैसा कि मैंने कहा प्रोग्रेसिव कंटेंट का हिस्सा बनना चाहूंगा।

हर दिन सेट पर गुजारे यही है ख्वाहिश...

आगे बहुत काम करना चाहता हूं, हर दिन सेट पर गुजारने की ख्वाहिश है। एक्टिंग से लेकर म्यूजिक तक, डायरेक्शन से लेकर प्रोडक्शन हर फील्ड का हिस्सा बनना चाहता हूं। नए टैलेंट्स की मदद करना चाहता हूं, लेकिन ये तब ही हो पाएगा जब मैं खुद सक्सेसफुल हो जाऊं।

उ म्मीद है ये सीरीज गेम चेंजर साबित होगी...

सच कहूं तो मुझे इस वेब सीरीज के लिए अप्रोच नहीं किया गया था, बल्कि मैंने खुद सीरीज के डायरेक्टर से खुद को कास्ट करने की बात रखी थी। मैं उस वक्त काम ढूंढ रहा था और जब मेरी टीम को इस प्रोजेक्ट के बारे में पता चला, तब मैंने इसका फर्स्ट सीजन देखा और सामने से अप्रोच किया। डिजिटल प्लेटफार्म पर मेरे डेब्यू के लिए इससे अच्छा किरदार हो ही नहीं सकता था, क्योंकि इस किरदार में कई लेयर्स हैं। मैं डायरेक्टर एकांत से मिला, स्टोरीलाइन सुनी, उन्हेंे भी मैं अच्छा लगा और बस ऐसे ही सीरीज मेरे हाथ लगी। उम्मीद हैं ये एक गेम चेंजर साबित हो।

मैं कभी अपना हौसला नहीं छोड़ूंगा... मेरे कॅरिअर में कई ऐसी चीजंे हैं जो मेरे फेवर में नहीं हुईं, लेकिन ये कभी काम न मिलने की वजह नहीं बनीं। इंडस्ट्री में ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने अच्छा काम नहीं किया, इसके बावजूद उनके पास काम है। कई ऐसे भी हैं जिनका काम अच्छा है, फिर भी उनके पास काम नहीं है। मैं किस्मत और मेहनत पर भरोसा करता हूं। पहले भी मैंने बहुत मेहनत की थी, लेकिन सफल नहीं हो पाया। फिर भी मैं कभी अपना हौसला नहीं छोड़ूंगा। फिलहाल ज्यादा चूजी नहीं हो सकता। अभी जो प्रोजेक्ट मेरे पास आ रहे हैं, मुझे उम्मीद है सफल होने के बाद वो बदल जाएंगे। मुझे इसका रिग्रेट नहीं है।

सीमा ने इस बारे में कहा,  मराठी मेरे लिए एक नई भाषा है, लेकिन जब मैंने शो में अपने डायलॉग्स बोलना शुरू किए तो मुझे एहसास हुआ कि मेरे लिए इस भाषा के उच्चारण और शब्दों को सही तरीके से सीखना बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए, मैंने भाषा की बारीकियों और इसका सही उच्चारण सीखने का फैसला किया। मैंने बॉडी लैंग्वेज को समझने के लिए मराठी फिल्में देखनी शुरू की।

इस शो में सीमा जी एक मजबूत और सबकी देखभाल करने वाली दादी का किरदार निभा रही हैं। अपनी भूमिका में प्रामाणिकता लाने के लिए, मराठीबोलने, उसके भाव और बॉडी लैंग्वेज को सही तरीके से समझने के लिए उन्होंने मराठी सीखना शुरू कर दिया है।


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यू-ट्यूब पर अपना एक चैनल शुरू करना चाहती हूं: ऋचा

एक्ट्रेस तोरल रासपुत्र ने मुंबई में खरीदा अपने सपनों का घर

सूरज बड़जात्या ने छोटे परदे पर वापसी की है। उनका आगामी प्रोजेक्ट ‘दादी अम्मा... दादी अम्मा मान जाओ’ टेलीविजन पर ग्रैंड पैरेंट्स के लिए एक नया सीरियल लेकर आया है। इसके अलावा इस शो में स्वर्गीय राजकुमार बड़जात्या के जीवन से एक छोटी सी घटना का विवरण भी दिखाया जाएगा जो इस शो को अधिक रचनात्मक बनाएगा। दादी के रोल को एक्ट्रेस सीमा बिस्वास निभाएंगी।

नया साल आते ही ज्यादातर स्टार्स कुछ न कुछ संकल्प लेते हैं, भले ही वह पूरा हो या अधूरा रह जाए। संकल्प लेने के मामले में ऋचा चड्‌ढा दूसरों से थोड़ी अलग हैं। वे साल भर का नहीं, बल्कि महीने-महीने का संकल्प लेती हैं और इसे ही पूरा करने की कोशिश करती हैं। इस बारे में वे कहती हैं...‘मैं महीने का संकल्प लेती हूं, क्योंकि साल का संकल्प बहुत लंबा हो जाता है। इस महीने यू-ट्यूब पर अपना एक चैनल शुरू करना चाहती हूं। अभी उस दिशा में काम करते हुए अपने आपको एजुकेट कर रही हूं। कुछ पढ़ रही हूं तो कुछ और नई-नई चीजें सीख रही हूं। इस महीने की मेरी महत्वाकांक्षा यही है।’


माइथोलॉजिकल शो ‘जग जननी मां वैष्णो देवी’ दर्शकों द्वारा बहुत पसंद किया जा रहा है। शो में रानी समृद्धि का किरदार निभा रहीं तोरल रासपुत्र ने हाल ही में मुंबई में अपने सपनों का घर खरीदा है। इस बारे में तोरल कहती हैं, ‘औरों की तरह मेरा भी मुंबई में अपना घर खरीदने का पुराना सपना था जो मैंने अब पूरा कर लिया है। मैं बहुत ज्यादा खुश हूं कि साल 2020 की शुरुआत में ही मैंने घर खरीद लिया है। मैं इससे पहले घाटकोपर में रेंट पर रह रही थी पर अब मैंने थ्री बीएचके फ्लैट खरीद लिया है।

तोरल ने आगे बताया,  फिलहाल घर में इंटीरियर और फर्नीचर का काम चल ही रहा है फिर भी मैं अपने परिवार के साथ नए घर में शिफ्ट कर चुकी हूं। हम सब मिलकर इंटीरियर और फर्नीचर डिसाइड कर रहे हैं। मुझे हर चीज सिंपल पसंद है इसलिए हम घर में ज्यादातर चीजें सिंपल और सोबर रखेंगे।’


पटना वीमेंस काॅलेज में एनुअल स्पाेर्टस डे पर छात्राओं ने अलग-अलग खेलों में शानदार प्रदर्शन किया। इस दौरान उनमें जीतने की ललक साफ दिख रही थी। उनके जज्बे और हौसले के आगे मौसम का बिगड़ा रूप भी कम पड़ गया। उन्होंने हर खेल में सर्वोत्कृष्ठ प्रदर्शन किया। फिर चाहे वो मार्च पास्ट हो अथवा जुंबा डांस या फिर रेस। हर खेल को उन्होंने पूरे मन से खेला।

स र्दियों के मौसम में बाकी मौसमों की तुलना में नई और ज्यादा सब्जियां उपलब्ध होती हैं। सर्दियों में उत्तरी भारत में, जहां मेरा बचपन बीता है, बहुत ज्यादा ठंड पड़ती थी और बाजार में सब्जियां भी खूब मिलती थीं, लेकिन सीमित समय के लिए ही। इसलिए हम यह सुनिश्चित करते थे कि मौसम खत्म होने से पहले इन सब्जियों का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा लें।

कई सब्जियां हम खासतौर पर सर्दियों में सिर्फ इसलिए ही नहीं खाते कि वे आसानी से मिल जाती हैं, बल्कि वे जरूरी पोषण भी देती हैं जो ठंड में फिट रहने में मदद करती हैं। मैं सर्दियों की अपनी पसंदीदा सब्जियों के बारे में बता रहा हूं जिन्हें खोजकर खाना चाहिए।

आंबा हल्दी: इसे अंबे या आंबे हल्दी, आम हल्दी, मैंगो जिंजर, कच्ची हल्दी जैसे नामों से भी जाना जाता है। मुझे इसके बारे में मेरी सास ने बताया था। आंबा हल्दी को छीलें, छोटे टुकड़ों में काटें, ऊपर से नींबू निचोड़ें और थोड़ा नमक छिड़ककर आनंद लें।

काली गाजर: इस सर्दी में काली गाजर से गाजर का हलवा बनाकर देखिए। इससे बेहद स्वादिष्ट हलवा बनेगा और नया टेस्ट मिलेगा।

सफेद बैंगन: माना जाता है कि यूरोपीय बैंगन मूलरूप से सफेद थे। इसलिए अंग्रेजी में इन्हें एगप्लांट कहते हैं। अब भी सफेद बैंगन मिल जाते हैं। इनकी पतली स्लाइस काटें और पकोड़े का बेटर लगाकर तल लें। लीजिए टेस्टी स्नैक तैयार है।

हरी ज्वार या पोंक: इसे कच्ची ज्वार भी कहते हैं। भेल बनाने में मुरमुरों की जगह पोंक इस्तेमाल करें। इससे हेल्दी स्नैक बनेगा।

बैंगनी अरबी या कंद: बैंगनी अरबी (पर्पल याम) को छीलकर बारीक स्लाइस काट लें। इन्हें कुरकुरे होने तक तलें या एयर फ्राय करें। नमक और मसाले छिड़कें। यह आलू की चिप्स से बेहतर लगेंगे।

हरभरा या बूट: इसे ग्राम या चना भी कहते हैं। ताजे हरभरा को उबालें। इसे नमक, ऑलिव ऑइल, लहसुन, काली मिर्च, पाइन नट्स (चिलगोजे), नींबू का रस और पारमेसन चीज के साथ मिक्सर में ब्लेंड कर बारीक पेस्ट बना लें। इससे टेस्टी और हेल्दी चटनी बनेगी।

सुरती पापड़ी: गुजरात की मशहूर डिश है उंदियो। इसमें सुरती पापड़ी जरूरी होती है। सुरती पापड़ी की सब्जी भी बना सकते हैं। यह भी काफी स्वादिष्ट लगती है।

मूंगरा या मूली की फली: मूंगरा को सेंगरी भी कहते हैं। ये हरे और लाल रंग में मिलती हैं। मूंगरे को हरी मिर्च, काला नमक और नींबू रस के साथ पीसकर चटनी बना लें। मुझे यह चटनी सुबह के नाश्ते में पराठों के साथ बहुत पसंद है।

हरी लहसुन: सर्दियों में इसके फ्रेश और खुशबूदार फ्लेवर के लिए इसे हरी चटनी में इस्तेमाल करें।

ऊपर दी गई सभी चीजों को अपनी डायट में शामिल करने का प्रयास करें। हो सकता है कि इनमें से कुछ चीजों को आपको खोजना पड़े। ये सभी शहर की बड़ी मंडियों में मिल सकती हैं। लेकिन आप अपनी सर्दियों को हेल्दी बनाने के लिए इन्हें जरूर अपनाएं।

FOOD Experiment

with Sanjeev Kapoor

जॉन डेनवर ने 1966 में ‘लिविंग ऑन अ जेट प्लेन’ गाना लिखा था और इसे मशहूर ग्रुप पीटर, पॉल और मैरी ने रिकॉर्ड किया था। गाने का मूल शीर्षक ‘बेब, आई हेट टू गो’ था, लेकिन तब डेनवर के प्रोड्यूसर रहे मिल्ट ओकुन ने उन्हें टाइटल बदलने के लिए मना लिया, क्योंकि वे जानते थे कि उन विकसित देशों में तब जेट प्लेन में सफर करने का जुनून था। और मिल्ट सही थे, क्योंकि जब गाना 1969 में रिलीज हुआ तो यह अमेरिका में गानों की प्रसिद्धि के आधार पर रेटिंग करने वाले ‘बिलबोर्ड हॉट 100’ का नंबर 1 गाना बन गया। न केवल अमेरिका में बल्कि कनाडा में भी नंबर 1 और फिर ब्रिटेन तथा आइरिश चार्ट्स में भी नंबर 2 पर रहा।

इस गाने के 51 साल बाद भारत में आंत्रप्रेन्योर्स और उपभोक्ता भारतीय रेलवे के साथ जॉन डेनवर के गाने के रास्ते पर चल रहे हैं, जो तेजस एक्सप्रेस के जरिये एयरलाइन जैसी लक्जरी अब ट्रेन में दे रही है। रेलवे की सहायक कंपनी आईआरसीटीसी द्वारा शुक्रवार को मुंबई-अहमदाबाद रूट पर दूसरी तेजस एक्सप्रेस शुरू की गई है। पहली ट्रेन लखनऊ-दिल्ली के बीच करीब एक साल से चल रही है, लेकिन रविवार के इस लेख को रेलवे में ट्रैवल के अनुभव की कहानी समझकर नकार मत दीजिएगा। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि विमान में बैठने का सपना अब बहुत आगे जा चुका है।

क्या आपको याद है कि 1960 के दशक में बॉम्बे (अब मुंबई) के सांताक्रूज एयरपोर्ट के पास बच्चों के पार्क में प्लेन का पहला मॉडल बनाया गया था, जिसमें बच्चे चढ़कर खेल सकते थे? तब वह बच्चों का सपना होता था। अब प्लेन का ये ख्वाब न सिर्फ छोटे शहरों तक पहुंच गया है, बल्कि रेस्टोरेंट का रूप लेकर नए अवतार में आ गया है! जी हां, आपने सही पढ़ा। आप जल्द ही अपनी प|ी के साथ एयरोप्लेन रेस्टोरेंट में कैंडल लाइट डिनर कर पाएंगे।

अगर आज जॉन डेनवर जिंदा होते तो उन्हें अपना गाना फिर से लिखना पड़ता- ‘ईटिंग ऑन अ जेट प्लेन!’ क्योंकि प्लेन में खाने की कल्पना अब सच हो रही है। पहला एयरोप्लेन होटल देहरादून पहुंच चुका है और गुजरात के वडोदरा के लिए दूसरा एयरक्राफ्ट बनाया जा रहा है। ये प्लेन रेस्टोरेंट बेंगलुरु में बनाए जा रहे हैं।

ये एयरोप्लेन थीम वाले रेस्टोरेंट्स एयरबस ए-320 मॉडल की नकल हैं जो 123 फीट लंबे हैं और पंखों का फैलाव 115 फीट है। देश में इससे पहले जो एयरोप्लेन रेस्टोरेंट बने हैं, वे कबाड़ से बने थे, लेकिन बेंगलुरु की रॉयल नाग एविएशन कंपनी बिल्कुल नए एयरक्राफ्ट बना रही है और इनके अंदर रेस्टोरेंट फिट कर रही है। एक एयरक्राफ्ट की पूरी बॉडी बनाने में कम से कम 6 महीने लगते हैं। इसका इंटीरियर हू-ब-हू एयरक्राफ्ट जैसा बनाया जाता है, जिसमें सीटें भी शामिल हैं। इसके अलावा इसमें वह सबकुछ होगा जो एयरक्राफ्ट में होता है, जैसे कॉकपिट, कार्पेट और यहां तक कि प्लेन के अंदर सुनाई देने वाली हल्की भनभनाहट की आवाज भी।

इसमें 100 सीट्स हैं। 50 डाइनर्स के लिए पंखों पर सीट हैं, जहां वे प्राकृतिक सुंदरता देख सकेंगे। स्वाभाविक है कि इन सीट्स के लिए प्रीमियम चार्ज देना होगा, जैसे आम रेस्टोरेंट्स में एसी के लिए अतिरिक्त पैसा लेते हैं। करीब 1.8 करोड़ की लागत से बने इन प्लेन रेस्टोरेंट्स को अलग-अलग पार्ट्स में खोलकर, 4 ट्रेलर्स (बड़े ट्रक) पर लादकर भेजा जाएगा और वडोदरा पहुंचने में इन्हें 15 दिन का समय लगेगा। लेकिन इन कल्पनाओं की उड़ान भरने वाले एयरोप्लेन रेस्टोरेंट्स में खाने के लिए आपको अपना बैग पैक करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जैसा कि जॉन डेनवर अपने गाने में कहते हैं, ‘मेरे सारे बैग पैक हैं, मैं जाने को तैयार हूं!’ आप बिना बैग के जा सकते हैं।

फंडा यह है कि हर दौर की एक ख्वाहिश, एक आकांक्षा होती है। इसे पहचानिए और अपना उत्पाद सफलतापूर्वक बेचने के लिए वह अहसास, वह अनुभूति तैयार कीजिए।

मैनेजमेंट फंडा**

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