बयान / कर विसंगति दूर होने से मोबाइल की कीमत पर मामूली असर: उपमुख्यमंत्री

नई दिल्ली में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में शामिल हुए उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी। नई दिल्ली में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में शामिल हुए उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी।
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नई दिल्ली में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में शामिल हुए उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी।नई दिल्ली में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में शामिल हुए उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी।

  • मोबाइल सामग्रियों पर जीएसटी की दरें 18 से 28 फीसदी रहने के कारण भारत निर्मित मोबाइल कीमत आयातित से अधिक था

दैनिक भास्कर

Mar 15, 2020, 08:01 PM IST

पटना. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जीएसटी कॉउंसिल ने कर विसंगति दूर करने के लिए मोबाइल पर लगने वाले जीएसटी की दरों को 12 से बढ़कार 18 फीसदी कर दिया है। इससे मोबाइल की कीमत में मामूली वृद्ध होगी। दरअसल मोबाइल पर जीएसटी की दर 12 फीसदी और उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों पर 18 से 28 फीसदी जीएसटी की दर होने से भारत में निर्मित मोबाइल सेट आयातित से महंगा पड़ रहा था। भारत में प्रतिवर्ष 29 करोड़ मोबाइल सेट का निर्माण होता है और निर्माताओं का 5,500 करोड़ रुपये रिफंड का बकाया है, क्योंकि आउटपुट से इनपुट पर कर की दर ज्यादा थी। उपमुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद यह जानकारी दी।

सीए खातों की ऑडिट की अनिवार्यता खत्म
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी कौंसिल की बैठक में करदाताओं को राहत देते हुए किसी सीए से अपने खातों की ऑडिट कराने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। पहले दो करोड़ से ज्यादा वार्षिक टर्नओवर वालों के लिए ऑडिट करना अनिवार्य था। अब वे आयकर या अन्य किसी कानून के तहत कराए गए ऑडिट रिपोर्ट को जीएसटी के तहत दाखिल कर सकेंगे। इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 5 करोड़ से कम टर्नओवर वाले कारोबारियों को वार्षिक रिटर्न और रिकान्सिलेशन रिटर्न दाखिल करने से छूट दे दी है। अन्य कारोबारियों के लिए रिटर्न दाखिल करने की तिथि 31 मार्च से बढ़ा कर 30 जून, 2020 कर दिया गया है। वहीं समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करने वालों को विलम्ब शुल्क के साथ 18 फीसदी वार्षिक दर से ब्याज का भुगतान करने के मामले में एक महत्वपूर्ण लिया है । अब वे 01 जुलाई, 2017 के प्रभाव से ग्रॉस पर नहीं नेट पर जमा करेंगे।

उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर कर चोरी और निबंधन के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए पहली अप्रैल से जीएसटी के अन्तर्गत नए निबंधन कराने वालों के लिए आधार संख्या देना अनिवार्य कर दिया गया है। वर्तमान करदाताओं के आधार संख्या को भी धीरे-धीरे जोड़ दिया जाएगा।

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