मैट्रिक का मूल्यांकन कल से

3 वर्ष पहले
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मैट्रिक परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन शनिवार से शुरू होगा। बिहार बोर्ड ने मूल्यांकन कार्य शुरू करने की तिथि 9 मार्च कर दी है। माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता अभिषेक कुमार ने बताया कि संघ के प्रतिनिधिमंडल ने बिहार बोर्ड के अध्यक्ष से मिल कर तिथि को आगे बढ़ाने को कहा था। शिक्षक स्कूलों में परीक्षा संपन्न कराने में लगे हैं। ऐसे में अगर मूल्यांकन 8 मार्च से शुरू होगा तो नौवीं की परीक्षा संचालन संभव नहीं है। जिलों को मार्किंग स्कीम, स्टैंडर्ड मार्क्स फ्वॉयल सहित अन्य सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। कॉपियों के मूल्यांकन के लिए सह परीक्षक की नियुक्ति भी की गई है। उन्हें नियुक्ति पत्र, वितरण सूची एवं अन्य केंद्रवार सूची भी भेज दी गई है। बिहार बोर्ड ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी को कहा है कि वे शनिवार से हर हाल में मूल्यांकन शुरू करें।

शिक्षकों, कर्मियों की उपस्थिति की कंप्यूटर में होगी इंट्री
पटना| इंटर परीक्षा की कॉपियों के चल रहे मूल्यांकन कार्य में बिहार बोर्ड ने कई बदलाव किए हैं। बोर्ड ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी व मूल्यांकन केंद्र निदेशकों से कहा है कि वे मूल्यांकन केंद्र पर कार्यरत सभी प्रधान परीक्षक, सह परीक्षक, कोऑर्डिनेटर एवं डाटा इंट्री के लिए प्रतिनियुक्त कंप्यूटर के जानकार शिक्षक व कर्मियों की उपस्थिति कंप्यूटर में दर्ज करेंगे। स्थानीय स्तर नियुक्त परीक्षक का विवरण भी कंप्यूटर में दर्ज होगा। इसके अलावा बोर्ड ने कहा है कि अगर किसी शिक्षक की परीक्षक के तौर पर नियुक्ति इंटर के साथ-साथ मैट्रिक परीक्षा की कॉपियों की जांच के लिए भी हो गई है तो वे इंटर की कॉपियां जाचेंगे। इंटर की कॉपियां जांचने के बाद वे मैट्रिक की कॉपियां जाचेंगे। कृषि विज्ञान विषय की कॉपियों के शिक्षक जहां नहीं हैं अगर वहां कृषि कॉलेज हैं तो वहां के शिक्षकों की नियुक्ति परीक्षक के तौर पर की जाएगी।

योगदान करनेवाले शिक्षकों पर से प्राथमिकी वापस लेगा बोर्ड
इंटर की कॉपियों का मूल्यांकन 2 मार्च से चल रहा है। हालांकि अबतक सभी केंद्रों पर सभी परीक्षकों ने योगदान नहीं किया है। ऐसे कई शिक्षकों पर प्राथमिकी भी दर्ज हुई है। अब बिहार बोर्ड ने कहा है कि ऐसे शिक्षक जिन्होंने गुरुवार को योगदान कर दिया है और अंत तक मूल्यांकन करते हैं तो उन्हें प्राथमिकी से मुक्त करने के लिए कार्रवाई की जाएगी। उधर, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने मूल्यांकन में योगदान नहीं करने वाले शिक्षकों पर प्राथमिकी का विरोध किया है। उपाध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार बोर्ड अपनी गलतियां छुपाने के लिए कार्रवाई कर रहा है।

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