एजुकेशन / मेडिकल कोर्स से पहले मरीज और उनके परिजनों के साथ व्यवहार का पाठ पढ़ रहे एमबीबीएस स्टूडेंट

MBBS students studying behavior lessons with patients and their families before medical course
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MBBS students studying behavior lessons with patients and their families before medical course

  • व्यावहारिक ज्ञान देने के लिए पटना मेडिकल कॉलेज और आईजीआईएमएस में नई व्यवस्था

दैनिक भास्कर

Aug 29, 2019, 04:30 AM IST

पटना. पटना मेडिकल कॉलेज और अाईजीअाईएमएस ने मरीजों और परिजनों के व्यवहार को लेकर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (अब, नेशनल मेडिकल कमीशन) गाइडलाइन के तहत पढ़ाई शुरू करा दी है। एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए पटना मेडिकल कॉलेज में 15 दिन और आईजीआईएमएस ने 10 दिनों का रिफ्रेशर कोर्स फिलहाल चल रहा है।


आईजीआईएमएस में पहले 10 दिनाें तक विविध जानकारी का पाठ पढ़ाया जा रहा है। मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. मनीष मंडल के मुताबिक मेडिकल पढ़ाई के अलावा छात्रों का अोवरअॉल डेवलपमेंट के लिए यह कदम उठाया गया है। प्रथम वर्ष के छात्रों को 20 से 30 अगस्त तक रोज विभिन्न विभागों के चिकित्सक विविध विषयों की जानकारी दी जा रही है।

 

इससे छात्रों का समुचित विकास होगा। उनमें भटकाव की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। पढ़ाई और हॉस्टल में रहने के दौरान जो दिक्कतें अाती हैं उनसे भी छात्र-छात्राअों को अवगत कराया जा रहा है। मुख्य रूप से छात्रों इसकी जानकारी दी जाएगी कि उन्हें मरीज की परेशानी को किस तरह से सुनना चाहिए और उनसे कैसा व्यवहार करना चाहिए।

 

यह सिखाया जा रहा
पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन प्रसाद के अनुसार छात्रों को बताया जा रहा है कि सोसाइटी में एक फिजिशियन का क्या रोल होता है। समाज उनसे क्या उम्मीद करती है। इंट्रेंस परीक्षा देते समय समाज उन्हें किस नजरिए से देखती है। एमबीबीएस में दाखिला लेने पर सोसाइटी उन्हें कैसे देखती है। एमबीबीएस पास करने पर सोसाइटी किस नजरिए से देखती है। इंटर्नशिप करते समय उन्हें कैसा लगता है। पीजी करते हैं तो उन्हें कैसा फील होता है।

 

प्रैक्टिस करना शुरू करते हैं तो उन्हें कैसे-कैसे मरीज मिलते हैं और क्या कहते हैं। यदि कहीं यात्रा करते हैं लोगों को जानकारी होती है कि अाप डॉक्टर हैं और अपनी समस्या से अवगत कराते हैं तो उस वक्त उन्हें कैसे रिएक्ट करना चाहिए। डॉ. मनीष मंडल कहते हैं कि इलाज के दौरान मरीज की मौत होने पर परिजन को कैसे बताना चाहिए, यह तक बताया जा रहा है। मरीज यदि गंभीर है तो परिजन को इसकी जानकारी कैसे देनी चाहिए, यह बड़ा टास्क होता है। यह भी बता रहे हैं।

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