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आधी रात का सवेरा नाटक ने दिखाया कि महिलाओं को होना होगा जागरूक

एक वर्ष पहले
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रविवार को कालिदास रंगालय में ‘आधी रात का सवेरा’ नाटक का मंचन किया गया। इसकी प्रस्तुति कला कुंज की टीम ने दी। इसके माध्यम से कलाकारों ने बताया कि महिलाओं को अपना विल-पावर मजबूत करना होगा। उन्हें खुद के प्रति जागरूक होना होगा। शुरुआत एक महंत से होती है, जो गांव के ही एक मंदिर पर बैठकर भजन और प्रवचन कर रहा होता है। वहीं, सुहागी की शादी गांव के एक गरीब व्यक्ति महंगू से होती है। अभी महंगू सुखी जीवन जीने का सपना ही देख रहा था कि इसी बीच उसका एक्सीडेंट हो जाता है। इसमें वे अपना एक टांग गंवा बैठता है। आर्थिक तंगहाली के कारण उसके लिए परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है। इसी दौरान महंत की नजर सुहागी के सौंदर्य पर पड़ती है। वह सुहागी को अपना बनाना चाहता है। लेकिन, सुहागी उसे भगा देती है। फिर महंत जबरन उसे उसके घर से उठवा लेता है। इसी बीच महंगू को उसके घर में उसकी प|ी नहीं दिखती है, जिसके कारण वह अपनी झोपड़ी में आग लगा लेता है। उसे लगता है कि उसकी प|ी उसके आर्थिक तंगहाली के कारण उसे छोड़कर भाग गई है। लेकिन वह गलत साबित होता है और अंत में उसकी प|ी महंत के पास से भाग कर उसके पास पहुंचती है। हंस कुमार तिवारी लिखित इस नाटक का निर्देशन ओम कपूर ने किया है। सह-निर्देशक सुभाष चंद्र व विवेक ओझा थे। उद्घाटन पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के मुख्य यातायात योजना प्रबंधक दिलीप कुमार ने किया।

कालिदास रंगालय

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