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तिहाड़ से पेरोल पर निकला हवाला कारोबारी अब तक नहीं लौटा: पप्पू यादव

कई नामी क्रिमिनलों के पास पहले क्या था? ये लोग आधा-आधा बीड़ी पीते थे। आज इनके पास 200-400 करोड़ रुपए की संपत्ति है।

विवेक कुमार/राजेश ओझा | Last Modified - May 09, 2018, 03:59 PM IST

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    पप्पू यादव ने तिहाड़ जेल से जुड़ी कई ऐसी बातें बताईं हैं, जिन पर विवाद हो सकता है।

    पटना. सांसद पप्पू यादव ने बुधवार को पटना के बापू सभागार में अपनी किताब 'जेल' का लोकार्पण किया। इस बुक में सांसद ने बेऊर से लेकर तिहाड़ जेल तक के अपने अनुभव को साझा किया है। पप्पू यादव ने तिहाड़ जेल से जुड़ी कई ऐसी बातें बताईं हैं, जिन पर विवाद हो सकता है। जेल से जुड़ी यादों के संबंध में हमने सांसद से बातचीत की।

    तिहाड़ के कैदी को मिलता था मोबाइल
    तिहाड़ जिले में मैं चार साल रहा। वहां जाति के अनुसार कैदियों के गुट थे। जेल में बंद आतंकवादी एक होकर रहते थे ताकि उसपर कोई हमला न कर दे। तिहाड़ में सुरक्षा के कई परत हैं फिर भी वहां कैदियों को मोबाइल मिल जाते थे। वहां सैटेलाइट फोन तक उपलब्ध था।

    पेरोल पर जेल से बाहर गया, वापस नहीं लौटा
    सांसद ने आरोप लगाया कि पेरोल पर कई आतंकी जेल से बाहर गए, लेकिन वापस नहीं लौटे। नासीर नाम का एक कैदी तिहाड़ में बंद था। उसे हवाला के मामले में जेल हुई थी। वह पेरोल पर बाहर गया था, लेकिन वापस नहीं आया। उसे पेरोल पर भेजने में जेल के ऑफिसर का रोल था। ऑफिसर खरीदे गए थे। नासीर को एक बार पेरोल मिली, लौट कर आए फिर दुबारा पेरोल मिली और वह आज तक लौट कर नहीं आया। जेल के अधिकारियों को वह करोड़ों रुपए देता था। तिहाड़ में सेल बिकता था। किस सेल में कौन रहेगा, यह पैसे से तय होता था।

    मुझे यातनाएं झेलनी पड़ीं
    मुझे तो तिहाड़ जेल में यातनाएं झेलनी पड़ीं। मुझे वहां लड़ना पड़ा, कई बार लाठी खाई। तिहाड़ में कैदियों को नंगा कर पीटा जाता था। मैं जब जेल में था तब कोई कैंटिन नहीं था। खाने के लिए वसूली होती थी। जेल में दादा लोगों की चांदी थी। हर जाति का अलग सेल और वार्ड था। जो भी पैसा वाला जेल जाता उसे कोई न कोई दादा कब्जा कर अपने वार्ड में ले जाता था।

    स्पेशल गार्ड है तो कैदी जा सकता है अपने घर
    सांसद ने कहा कि पटना के बेऊर जेल से अपराधी बाहर नहीं जा सकते। उन्हें इसकी जरूरत भी नहीं होती है। जेल में बंद एमएलए, एसपी और मंत्री अगर कोर्ट जाता है और अगर उसे स्पेशल गार्ड मिला है तो वह लौटते समय अपने घर जा सकता है। लालू यादव जेल से सरकार चलाते थे। मुख्यमंत्री राबड़ी देवी भी जेल जाती थीं।

    जेल से तय होता था कॉन्ट्रैक्ट
    पप्पू यादव ने कहा कि बिहार के कई नामी क्रिमिनलों के घर में पहले क्या था? कैसे 200-400 करोड़ रुपए हो गए? कैसे इतने बड़े-बड़े मॉल हो गए? कभी इनके पास बीड़ी पीने के पैसे नहीं थे। मेरे सामने ये लोग आधा-आधा बीड़ी पीते थे। सूरजभान और अन्य लोगों के पास कहां से इतने पैसे आए। इन लोगों ने किडनैपिंग और एक्सटॉर्शन से पैसे बनाए हैं। रेल हो या रोड ठेका जेल से तय होता था।

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    बापू सभागार में अपनी किताब 'जेल' का लोकार्पण करते सांसद पप्पू यादव।
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    अपनी किताब के लोकार्पण के मौके पर लोगों को संबोधित करते पप्पू यादव।
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