बिहार / बाढ़ पीड़ित का दर्द: 3 दिन बाद मां के लिए दवा ले जा रहा हूं, पता नहीं वह जिंदा होगी या नहीं

अपनी मां के लिए दवा ले जाते राज कुमार झा।
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  • कमर तक पानी में डूबे गांव, कई गांवों में चार दिन से नहीं जला घरों में चूल्हा 
  • तीन दिन बाद जहां पानी कम हुआ वहां सिर्फ कीचड़ बचा हुआ है

Jul 17, 2019, 05:34 PM IST

मुजफ्फरपुर. बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कटरा का सोनपुर गांव चारों तरफ से पानी से घिरा है। रविवार रात को आई बाढ़ ने गांव को सड़क से काट दिया। तीन दिन तक लोग फंसे रहे। मंगलवार को एक नाव आई तो लोग गांव से बाहर जरूरी सामान लेने निकल पाए। उसी नाव से दैनिक भास्कर एप के रिपोर्टर गांव में गए और पीड़ितों का हाल जाना।

 

तीन दिन तक मां को नहीं दे सका दवा 
70 साल के राज कुमार झा मंगलवार दोपहर को बिस्तर पर पड़ी मां के लिए दवा लेकर लौटे। उन्होंने कहा कि मेरी मां बहुत बीमार है। उन्होंने कहा बाढ़ के चलते तीन दिन से मां को दवा नहीं दे पाया। रोज आता था, लेकिन पानी पार करने की हिम्मत नहीं होती थी तो लौट जाता था। आज नाव आई है। सुबह बाजार गया था। दवा लेकर लौटा हूं पता नहीं घर पर मां जिंदा बची भी होगी या नहीं। 

 

चार दिन से चूड़ा खाकर गुजारा
बाढ़ का पानी भगवानपुर गांव के सभी घरों में भर गया था। अधिकतर घरों से पानी तो उतरा, लेकिन वहां अभी कीचड़ है। कई घर तो ऐसे हैं जहां पानी भरा है। रास्ते में कमर तक पानी है। कईयों के घर बाढ़ में गिर गए। गांव के सैकड़ों लोगों को दूसरे के घरों और स्कूल में शरण लेनी पड़ी। यहां रहने वाले मधुरेंद्र की झोपड़ी भी बाढ़ में गिर गई। मधुरेंद्र कहते हैं कि पानी इतनी तेजी से आया कि घर से कोई सामान नहीं निकाल सका। बक्सा, अनाज, कपड़ा और सारे सामान इसी झोपड़ी में रह गए। रविवार रात को कमर से ऊपर पानी बह रहा था। किसी तरह बच्चों और पत्नी को लेकर जान बचा सका। चार दिन हो गए चूल्हा जले हुए। चूड़ा खाकर गुजर कर रहा हूं। 

 

रात भर पानी में खड़े रहे
भगवानपुर गांव में ही रहने वाले चंद्र किशोर झा के घर में कमर तक पानी भर गया था। रविवार रात को आई बाढ़ को याद करते हुए चंद्रकिशोर कहते हैं कि शाम से ही पानी बढ़ने लगा था। रात में मेरे घर में कमर से ऊपर पानी आ गया। कपड़ा, अनाज और घर का सारा सामान बह गया। परिवार को लेकर किसी तरह गांव के स्कूल गया। वहां भी पानी आ गया था। पूरी रात बच्चों को लिए पानी में खड़ा रहा। 

 

घर की जगह सिर्फ कीचड़ बचा
इसी गांव में रहने वाले हेमंत कुमार मिश्रा का घर भी बाढ़ में बह गया। तीन दिन पहले जिस जगह घर था आज कीचड़ बचा है। जमीन पर पड़े खपड़े के टुकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि कभी यहां घर था। घर से सटी झोपड़ी की छत बच गई है। कपड़े, अनाज और सारा समान बह गया। हेमंत ने कहा कि जब बाढ़ आई तो पहले परिवार को स्कूल पर पहुंचाया। इसके बाद गाय और बछड़े को ले गया। तीसरी बार आने का मौका ही नहीं मिला। अनिता देवी और रीना देवी ने कहा कि तीन दिन हो गए चूल्हा चले हुए। खाने का कोई उपाए नहीं है। न अनाज बचा है और न चूल्हा। चूड़ा खाकर गुजारा कर रहे हैं। बच्चे भूख के मारे रोते हैं। उन्हें भी चूड़ा-बिस्किट दे रही हूं।

 

टीले के चारों तरफ से बह रहा था पानी
कटरा प्रखंड के राजाडीह गांव के मोहम्मद शोएब बताते हैं कि एक घंटे में इतना अधिक पानी आया कि लगा जैसे जलजला आ गया। गांव के चारों तरफ से पानी बह रहा है। उस रात को घरों में पानी घुस गया था। अफवाह थी कि बांध टूट सकता है। घर से निकलने का कोई साधन नहीं था। मैं पत्नी नसीमा और छह बच्चों को लिए रात भर जगा रहा। डर के मारे बच्चे रो रहे थे। पूछ रहे थे अब्बा पानी में घर बह गया तो क्या होगा? मेरे पास इस सवाल का जवाब नहीं था। मैं भी डरा हुआ था, लेकिन किसी तरह बच्चों को हिम्मत बंधा रहा था। पूरी रात डर के साये में गुजरी। सुबह हुई तो जान में जान आई। शुक्र है कि बांध नहीं टूटा और पानी नहीं बढ़ा। गांव से बाहर निकलने का साधन होता तो उतना डर नहीं लगता।

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