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जिनकी जिंदगी में अंधेरा था उन्हें नई रौशनी दिखा रहीं नंदिता

एक वर्ष पहले
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Women\\\'s day

दीदी ने दिया हौसला तो बढ़ी हिम्मत

जिन हाथों ने कभी पेंसिल तक नहीं पकड़ी आज वो मैट्रिक पास कर चुकी हैं। चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान लिए रिंकी कहती हैं मैंने मैट्रिक में 76.2% हासिल किया है। जब एग्जाम सेंटर पर पहुंची तो भीड़ देखकर घबड़ा गई लेकिन दीदी ने विश्वास दिलाया कि तुम जरूर अच्छा करोगी। वह सुबह 11 बजे से 2 बजे तक स्कूल में पढ़ाई करती थीं। शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक फिर पढ़ाई में जुट जाती थीं। खाना खाने के बाद रात के 11 बजे तक सेल्फ और ग्रुप स्टडी करती थीं।

नंदिता बनर्जी बैंक में चीफ मैनेजर थीं। ऑफिस से घर आते-जाते अक्सर छोटी लड़कियों को कचरा चुनते देखती थीं। ये सब देख उन्हें दुख होता था। वो इनके लिए कुछ करना चाहती थीं लेकिन रास्ता नहीं सूझ रहा था। दिल और दिमाग में कशमकश जारी था। आखिरकार जीत दिल की हुई। नंदिता ने नौकरी छोड़ दी और बेघर बच्चों के लिए काम करने लगीं। दानापुर के सराय स्थित संस्था नई धरती गरीब बच्चियों की जिंदगी बदल रही है। इनकी मेहनत का नतीजा है कि आज उनकी संस्था की पांच बच्चियों ने बिहार बोर्ड ऑफ ओपन स्कूलिंग एंड एग्जामिनेशन के द्वारा आयोजित परीक्षा में पांच बच्चियों ने फर्स्ट डिवीजन हासिल किया है। रिजल्ट शुक्रवार को आया है। ये लड़कियां कभी कचरा चुनती थीं। नंदिता कहती हैं 2009 में ये बच्चियां हमारे पास आई थीं। 2011 में दानापुर के सराय में स्कूल खोला। इस स्कूल की आठवीं तक मान्यता है। पांचों नई धरती संस्था की ओर से संचालित सिस्टर निवेदिता बालिका विद्यालय में पढ़ती हैं और उसी हॉस्टल में रहती भी हैं।

उर्मिला ने 72% अंक लाया है। वह कहती हैं अभी मुझे और पढ़ना है। साथ ही एक्स्ट्रा करिकुलर भी करना है। ताकि मैं अपना भविष्य बेहतर बना सकूं।

जूली कुमारी ने 69.8% प्राप्त किया है। वह कहती हैं यहां पर हम पांच लड़कियां ही थीं। इसी में कोई फर्स्ट आती थी तो कोई सेकेंड। दीदी ने हौसला बढ़ाया और हमने कर दिखाया।

सुंदरी को 68.8% अंक मिले हैं। कहती हैं हम पहले गंदगी में रहते थे और कचरा चुनते थे। शिक्षा ने आज हमको कहां से कहां पहुंचा दिया। इन सबका श्रेय नंदिता दी को जाता है। इन्होंने हमारी जिंदगी बदल दी।

शोभा 63.6.% लेकर आई हैं। कहती हैं मुझे इंग्लिश का टीचर बनना है। इसके लिए मैं ग्रामर पर बहुत मेहनत करती हूं। शिक्षा ने मेरे जीवन को एक नई दिशा दी है। मेरी इच्छा है कि भविष्य में मैं इसी संस्था में पढाऊं और अपने जैसे बच्चों की जिंदगी को नई दिशा दूं।

नंदिता बनर्जी
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