स्थापना दिवस / स्कूलों व कॉलेजों के पाठ्यक्रम में मानवाधिकार को शामिल करने की जरूरत

कार्यक्रम को संबोधित करते राज्यपाल फागू चौहान। कार्यक्रम को संबोधित करते राज्यपाल फागू चौहान।
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कार्यक्रम को संबोधित करते राज्यपाल फागू चौहान।कार्यक्रम को संबोधित करते राज्यपाल फागू चौहान।

  • बिहार में 2008 में मानवाधिकार के 100 मामले ही दर्ज हुए, जबकि 2018 में 8 हजार से अधिक मामले
  • अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर बिहार मानवाधिकार आयोग की 11 वीं स्थापना दिवस समारोह

दैनिक भास्कर

Dec 10, 2019, 06:55 PM IST

पटना. राज्यपाल फागू चौहान ने कि मानवाधिकार संबधी पाठ्यक्रम स्कूलों और कॉलेजों में शामिल करने की जरूरत है। इससे सभी लोग मानवाधिकार को समझ सकेंगे। नयी पीढ़ी मानवाधिकार के प्रति सजग और संवेदनशील बनेगी। प्रत्येक नागरिक को कानून के तहत उन्हं जीने से लेकन विभिन्न प्रकार के मानवाधिकार प्राप्त हैं। मानवाधिकार उल्लंघन मामले पर गंभीरता से जांच कर सही कार्रवाई होती है। मंगलवार को वे अधिवेशन भवन में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस व बिहार मानवाधिकार आयोग के 11 वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।

राज्यपाल ने कहा कि बिहार मानवाधिकार आयोग स्थापित होने के बाद इससे जुड़े मामले निबटारे में तेजी आयी है। 85 प्रतिशत मामले का निबटारा संतोषजनक है। 2008 में मात्र 100 मामले दर्ज हुए, वहीं 2018 में 8000 से अधिक मामले दर्ज हुए। मानवाधिकार का संरक्षण सरकार का प्रमुख दायित्व है। मानवाधिकार के संरक्षण के जरिये समाज के असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले उपेक्षित और कमजोर वर्ग के लोगों के प्रति विशेष संवेदनशीलता दिखाने की जरूरत है।

राज्यपाल ने सभी लोगों से मानवाधिकार की रक्षा के लिए सजग और तत्पर रहने की अपील की। हम सभी का कर्तव्य है कि राष्ट्र निर्माण के प्रति अपने दायित्व का सही से निर्वहन करें। अधिकारों के प्रति हमें सजग रहना चाहिए। सामाजिक समसरता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए मानवाधिकार की रक्षा आवश्यक है। मानवाधिकार स्वतंत्रता, समानता और गरिमा का अधिकार है। बिहार मानवाधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष उज्जवल कुमार दूबे ने कहा कि हम कर्तव्य का पालन करें तो मानवाधिकार उल्लंघन मामले में कमी होगी। आयोग के सदस्य शशिशेखर शर्मा नेक हा कि मानवाधिकार व्यक्ति के अस्तित्व की रक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि मानवाधिकार की रक्षा हमारा नैतिक और सामाजिक दायित्व है। मानवाधिकार उल्लंघन मामले में कई बार पुलिस पर भी अंगुलियां उठती है, लेकिन समाज में जो हिंसक, उपद्रवी और पेशेवर अपराधी हैं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जरूरत होती है। कार्यक्रम में राज्यपाल सहित अतिथियों को अंगवस्त्रम, स्मृति चिह्न व पौधे देकर सम्मानित किया गया।

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