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न पत्थर, न धातु, यहां भभूत से बने हैं हनुमान

एक वर्ष पहले
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नीचे हनुमान जी, ऊपर श्रीराम का दरबार

हनुमान धाम में कई वर्षों से जल रही है अखंड ज्योति

जल्लावाले हनुमान मंदिर की प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हैं अमर कुमार अग्रवाल। सचिव हैं अरुण रणवीर तथा काेषाध्यक्ष हैं गाेपीचंद गाेयनका। अरुण रणवीर बताते हैं कि मंदिर की आय से आसपास के मंदिराें के विकास की याेजना बनाई गई है। बगल में बाबा गाेपाल दास मंदिर (शक्ति चाैरा मंदिर) है। वह भी पुराना मंदिर है। मंदिर प्रबंधन कमेटी ने हर पुरानी चीजाें काे संजाेकर रखा है। हनुमान मंदिर के सामने सैकड़ाें वर्ष पुराने पेड़ के अवशेष काे भी संभाल कर रखा गया है। पांच साै वर्ष पुराना कुआं भी सुरक्षित है। हनुमान जी के सामने अखंड दीप जल रहा है। उसका धुआं प्रतिमा काे खराब न करे, इसलिए धुएं काे पाइप के जरिये बाहर निकाला गया है। जैसे आरती ली जाती है, उसी तरह जहां पाइप से धुआं निकलता है, उस श्रद्धालु हाथ रखकर फिर सिर पर फेरते हैं।

पहले यहां चारों तरफ पानी था, इसलिए लोग कहते हैं जल्लावाले हनुमान

मंदिर की सेविका भराेसी देवी की उम्र लगभग 80 वर्ष है। वह हमेशा मुस्कराती रहती हैं। उनकी उम्र में लाेगाें काे बेटे-पताेहू ही नहीं, सारी दुनिया से शिकायत रहती है। लेकिन इन्हें किसी से काेई शिकायत नहीं। भराेसी देवी काे याद नहीं कि हनुमान मंदिर की सेवा करते हुए कितने वर्ष बीत गए। कहती हैं कि घर में मन ही नहीं लगता है। दिनभर यहीं मंदिर में रहती हैं। मंदिर परिसर में ही बना है 16 खंभाेंवाला यज्ञ भवन। मुख्य पुजारी बताते हैं कि यह वही यज्ञ कुंड है, जिसमें पांच साै वर्ष पहले आए साधु महात्मा ने यज्ञ किया था। जाे भी भक्त मंदिर में आते हैं, वे यहां भी हुमाद आदि चढ़ाते हैं। परिक्रमा के बाद भराेसी देवी सबकाे आशीर्वाद देती हैं। आशीर्वाद में सबके सिर पर हाथ रखकर कहती हैं राेजी-राेजगार बढ़े। खुशी रह, स्वस्थ रह। अंत में वे जाेर देकर सबकाे कहती हैं कि बुद्धि अच्छा रखियाे। उनकी अंतिम बात बड़ी मह्त्वपूर्ण है कि बुद्धि ठीक रखाे। अगर विवेक-बुद्धि से काम नहीं लिया, ताे शायद भगवान भी साथ नहीं देंगे। सबके साथ प्रेम-भाव से रहे, विनम्रता से रहे, सत्य की राह पर चले, ताे ही भगवान मदद करेंगे। इसके विपरीत जाे झगड़ता है, हिंसा करता है, अहंकार करता है, झूठ-असत्य की राह पर चलता है, उसकी वृद्धि नहीं हाे सकती।


मंदिराें में एक से एक देवी-देवताओं की प्रतिमाएं हाेती हैं, पर सभी प्रतिमाएं पत्थराें या धातुओं की ही बनी हाेती हैं। वहीं पटना सिटी के बाहरी बेगमपुर में एक एेसा विशाल हनुमान मंदिर है, जिसमें उनकी प्रतिमा यज्ञ के भस्म से बनी है। मंदिर बहुत पुराना है। स्थानीय लाेगाें के अनुसार यह करीब 500 वर्ष पुराना है। पहला लिखित प्रमाण 315 वर्ष पुराना है। मंदिर प्रबंधक कमेटी के सचिव अरुण कुमार रणवीर बताते हैं कि तब स्थानीय हनुमानभक्त मातादीन तिवारी ने मंदिर के लिए जमीन दान दी। उन्हाेंने 19 कट्ठा जमीन दान की, जिसमें आज विशाल मंदिर बना है।

बाहरी बेगमपुर के लाेग मंदिर निर्माण की कहानी बताते हैं। मुख्य पुजारी मनाेज त्रिवेदी, वरिष्ठ नागरिक प्रमाेद मिश्र बताते हैं कि लगभग पांच साै वर्ष पहले यहां चाराें तरफ पानी ही पानी था। क्षेत्र काे जल्ला कहा जाता था। आज भी कई लाेग मंदिर काे जल्लावाले हनुमान जी कहते हैं। इसी जल्ला के बीच एक टापू जैसा बना था, जिस पर तरह-तरह के फल-फूल के वृक्ष लगे थे। लाेग टापू काे बगीचा कहते थे। एक दिन एक साधु घूमते हुए यहां पहुंचे। उन्हाेंने ग्रामिणों से कहा कि यह स्थल बहुत सुंदर है, यहां हनुमान जी का मंदिर बनना चाहिए। ग्रामिणों ने सहर्ष सहमति जताई। इसके बाद साधु महात्मा जी ने एक यज्ञ शुरू किया। यज्ञ स्थल के बगल में एक काेठरी थी। यज्ञ की समाप्ति पर वहां धुएं से हनुमान जी की आकृति बन गई। महात्मा ने यज्ञ के भस्म में लाल सिंदूर तथा घी मिलाकर लेई (पेस्ट) तैयार किया और उस काेठरी की दीवार पर बनी आकृति पर चिपका दिया। उसी समय से भस्म से बने हनुमान जी की पूजा हाेने लगी। दूर-दूर से लाेग आते और हनुमान जी काे सिंदूर और घी मिलाकर लेप लगाते। बाद में भस्म का लेप ठाेस हाे गया। आज भी उस दीवार पर ही हनुमान जी बिराजमान हैं।

खजुरिया ईंट से बनी दीवार पर बिराजमान हैं हनुमान जी

मंदिर सैकड़ाें वर्ष पुराना है। जिस दीवार पर हनुमान जी की प्रतिमा बनी है, वह खजुरिया (पैजावा) ईंटाें से बनी है। अब उस दीवार काे इस तरह सुरक्षित कर दिया गया है ताकि वह आनेवाली सदियाें तक उसी स्थिति में रहे। पुरानी दीवार के पीछे एक नई दीवार बना दी गई है। मंदिर आज जिस रूप में भव्य बना है, एेसा पहले नहीं था। 10 वर्ष पहले तक यहां हनुमान जी झाेपड़ी में थे। ऊपर चाैड़े खपड़े बिछे थे। इसे लाेग चकरका खपड़ा कहते हैं।

मंदिर का साैंदर्यीकरण वर्ष 2000 में शुरू हुआ और 2015 में पूर्ण हुआ। मंदिर तीन तल्ला है। मंदिर में प्रवेश करते ही दाहिनी तरफ भभूतवाले हनुमान जी हैं। निकट ही हनुमान यंत्र है। पुजारी रतनकिशाेर शुक्ल बताते हैं कि यंत्र में अष्टदल कमल है। सामने लड्डूगाेपाल और शालीग्राम हैं। यंत्र के बीच में लिखा है-ओम हनुमंते नम:। बताते हैं कि हनुमान यंत्र समस्त बाधाओं काे दूर करता है। दूसरी तरफ शिव परिवार बिराजमान है। शिवलिंग चांदी से मढ़ा हुआ है। इसमें देवी पार्वती की भी आकृति उभरी हुई है। ऊपरी तल्ले पर पूरा श्रीराम दरबार सजा है। श्रीराम-सीता के साथ लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न भी हैं। सामने हनुमान जी भक्ति में लीन ठेहुने के बल बैठे हैं। हाॅल की दूसरी तरफ देवी दूर्गा का मंडप है। मंदिर के बगल में श्रीराम भवन बना है, जाे चार तल्ला है।

अरुण कुमार रणवीर
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