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बिहार / मानसून आगमन और विदाई की नई तिथि निर्धारित की जाएगी, अभी प्रदेश में 10 जून से होती है गणना

A new date of arrival and farewell will be set for monsoon, now the calculation is done from June 10 in the state.
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A new date of arrival and farewell will be set for monsoon, now the calculation is done from June 10 in the state.

  • लगातार तय 10 जून को मानसून के नहीं आने पर मौसम विभाग की तैयारी, नई तिथि 15 जून के बाद की होगी 
  • 30 साल बाद इस तिथि में परिवर्तन किया जाएगा, इससे पहले 1990 में मानसून आगमन-विदाई की तिथि परिवर्तित हुई थी

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2020, 04:25 AM IST

पटना (राकेश रंजन). बिहार में मानसून आगमन और विदाई की अब नई तिथि निर्धारित की जाएगी। जलवायु परिवर्तन के कारण तिथि में बदलाव की सिफारिश वैज्ञानिकों की एक टीम ने केंद्रीय मौसम विज्ञान विभाग से की है। पटना मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्व निदेशक एके सेन की मानें, तो 30 साल बाद इसमें परिवर्तन किया जाएगा। 30 साल पर जलवायु परिवर्तन की समीक्षा की जाती है और मानसून-आगमन और विदाई की तिथि को जरूरत अनुसार बदला जाता है। इससे पहले 1990 में बिहार में मानसून आगमन-विदाई की तिथि परिवर्तित हुई थी। इस बार भी केंद्र स्तर पर विशेषज्ञों की एक कमेटी बनी है, जो इसी माह अपनी रिपोर्ट देगी।

15-22 के बीच हो सकती है तिथि

बिहार में मानसून आगमन की तिथि 10 जून मानी जाती है। अब 15 जून से 22 जून के बीच हो सकती है। जल्द ही तिथि पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।  कमेटी में शामिल विशेषज्ञों की मानें, तो बिहार के साथ झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली आदि में मानसून आगमन व विदाई की तिथियों को बढ़ाया जाएगा। 1941 से देश में मानसून के आने और जाने की तिथि क्रमश: 1 जून और 1 सितंबर निर्धारित है। केरल की तिथि पूर्व की तरह ही 1 जून रहेगी लेकिन बिहार में बदल जाएगी। वैज्ञानिकों ने पूरे देश में पिछले 40 वर्षों के मानसून आगमन और विदाई के आंकड़ों पर रिसर्च करने के बाद नई तिथि निर्धारण की दिशा में काम शुरू किया है।

बिहार में पिछले 18 वर्षों का हाल :
 

बदलाव से किसानों को होगा फायदा
कृषि वैज्ञानिक की मानें, तो मानसून आगमन और विदाई की तिथि में बदलाव से किसानों को काफी फायदा होगा। कृषि वैज्ञानिक अनिल झा ने बताया कि फसल चक्र को री डिजाइन करने की तैयारी है। किसान अब नई तिथि के अनुसार बोएं -काटें ताकि अधिक पैदावार हो सके। पर्यावरणविद डीके पॉल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून बिहार में निर्धारित तिथि को नहीं ही आता है। तिथि में बदलाव किसानों के हित में। 

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