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बिहटा में बनेगा एनआईटी का कैंपस, 474.47 करोड़ रुपए होंगे खर्च, संशोधित डीपीआर तैयार

एक वर्ष पहले
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फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो।
  • डीपीआर को बीओजी की मंजूरी, दो ब्वॉयज व एक गर्ल्स हॉस्टल, फैकल्टी क्वार्टर और लाइब्रेरी डाटा सेंटर बनेंगे

पटना. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) पटना का बिहटा में नया कैंपस 474 करोड़ 47 लाख 48 हजार 364 रुपए में बनेगा। सीपीडब्लूडी की ओर से नए कैंपस के लिए डीपीआर तैयार की गई है। इस डीपीआर को एनआईटी पटना के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की मंजूरी मिल गई है। सीपीडब्लूडी की ओर से बनाई गई डीपीआर को संस्थान के बिल्डिंग एंड वर्क्स कमेटी (बीडब्लूसी) की ओर से रिवाइज किया गया था। रिवाइज्ड प्लान के तहत अब 474 करोड़ 47 लाख 48 हजार 364 रुपए खर्च होंगे। फाइनेंस कमेटी की मंजूरी भी इसे मिल गई है। हालांकि संस्थान की ओर से वित्त मंत्रालय की ओर से ऑब्जेक्शन को क्लियर किया जा रहा है। नए कैंपस के निर्माण पर वित्त मंत्रालय की ओर से फंड रिलीज पर असहमति जताई गई थी। बिहटा में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी पटना के नए कैंपस के लिए वर्ष 2016 में बिहटा में 125 एकड़ जमीन मिली थी। एनआईटी पटना के बिहटा में कैंपस निर्माण को वर्ष 2021-22 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ईपीसी मोड में कंस्ट्रक्शन किया जाएगा और इसके 2021-22 तक पूरा होने की संभावना है।


नई डीपीआर में छात्रों की संख्या को बढ़ने की संभावना को देखते हुए एकेडमिक ब्लॉक के एरिया को और बड़ा किया गया। आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को आरक्षण के कारण छात्रों की संख्या में वृद्धि होगी इसलिए एकेडमिक बिल्डिंग, लेक्चर हॉल और हॉस्टल के एरिया को बड़ा किया गया इसके लिए फैकल्टी, स्टाफ, स्टूडेंट एक्टिविटी सेंटर के एरिया को घटाया गया है।

कैंपस इस तरह से बनेगा कि बाहर से कोई सामान लाने की जरूरत नहीं पड़े
कैंपस इस तरह से बनाया जाएगा कि बाहर से किसी चीज की जरूरत न पड़े। कैंपस के ही अंदर दो जगह खुदाई कर तालाब बनाया जाएगा। उस मिट्‌टी का उपयोग सड़क बनाने में होगा। एक तालाब का उपयोग ताजे पानी के लिए किया जाएगा जबकि दूसरे का अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। एसटीपी के अवशिष्ट जल के माध्यम से पानी रिचार्ज की व्यवस्था भी की जाएगी। कैंपस में बागवानी के लिए भी इसी जल से व्यवस्था की जाएगी। बिजली के लिए अलग पावर स्टेशन स्थापित किया जाएगा। 2 साल तक मेंटेनेंस का जिम्मा भी ठेकेदार के पास होगा, उसके बाद संस्थान को खुद मेंटेनेंस कराना होगा।

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