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ग्रेजुएशन से लेकर टेक्निकल एजुकेशन तक के लिए छात्र-छात्राओं को मिलेगा एजुकेशन लोन

Dainik Bhaskar

Aug 12, 2018, 01:08 AM IST

स्टूडेंट कार्ड योजन, शिक्षा वित्त निगम से स्वीकृत कर्ज का ऑनलाइन वितरण

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पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार के बच्चे और युवा पढ़ेंगे तब राज्य फिर से अपने प्राचीन गौरव को हासिल करेगा। हमारा लक्ष्य है सब पढ़ें, आगे बढ़ें। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ उठाकर युवाओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने शनिवार को अधिवेशन भवन में शिक्षा वित्त निगम द्वारा स्वीकृत कर्ज राशि के ऑनलाइन ट्रांसफर की शुरुआत करते हुए कहा कि राज्य सरकार अब अपने खजाने से छात्र-छात्राओं को शिक्षा वित्त निगम के माध्यम से कर्ज उपलब्ध करा रही है ताकि वे आगे की पढ़ाई कर सकें।

यह कर्ज तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ सामान्य ग्रेजुएशन और पीजी सहित अन्य उच्च शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के लिए भी उपलब्ध होगा। अगर कोई छात्र कर्ज लौटाने में असमर्थ होगा तो राज्य सरकार उसे माफ भी कर सकती है। बिहार से 10वीं (पॉलिटेक्निक पाठ्यक्रम के लिए) और 12वीं पास करने वाले विद्यार्थी अब देश के किसी कोने में पढ़ेंगे, उन्हें तो यह सुविधा मिलेगी ही, साथ ही राज्य से सटे पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और झारखंड बोर्ड से पास बिहार के छात्र भी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। स्कॉलरशिप प्राप्त करने वाले छात्रों को भी इसका लाभ मिलता रहेगा।

10 छात्रों को मुख्यमंत्री ने सौंपा चेक: मुख्यमंत्री ने शिक्षा वित्त निगम के ‘लोगो’ के अनावरण के बाद वित्त निगम कार्यालय का उद्घाटन किया। उन्होंने 10 लाभार्थियों को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का चेक प्रदान किया। इस मौके पर तीन लाभार्थियों आमिर रजा, शौर्य कश्यप और नफीसा इरफान ने अपने अनुभव भी साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में बड़े पैमाने पर शिक्षण संस्थान खोले जाने के बाद भी संस्थानों की कमी है। वर्ष 2006 में राज्य सरकार ने अपने खर्च पर बीआईटी, मेसरा का ब्रांच खुलवाया।

ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो को 30% करेंगे: मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की स्थिति अच्छी नहीं है। राज्य का ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो 13% है जबकि राष्ट्रीय औसत 24 % है। हमलोगों ने अपने राज्य में जीईआर को 30 % तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। जिस समय साइकिल योजना की शुरुआत की गई थी, उस समय 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़कियों की संख्या 1 लाख 70 हजार थी, आज उनकी संख्या 8 लाख से ऊपर हो गई है। आज लड़कियों की संख्या मिडिल क्लास में लड़कों से ज्यादा हो गई है, जबकि सेकेंडरी में लड़कियों की संख्या लड़कों के बराबर है।

बच्ची पढ़ ले तो घट जाती है प्रजनन दर: मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हमने राज्य की बागडोर संभाली थी, उस समय राज्य में फर्टिलिटी रेट 4.2 था। इसे कम करने के लिए मिशन ह्यूमन डेवलपमेंट की स्थापना की गई। समीक्षा में यह जानकारी मिली कि मैट्रिक पास करने वाली लड़कियों में फर्टिलिटी रेट 2 के करीब है। लेकिन इंटरमीडिएट पास लड़कियों के मामले में फर्टिलिटी रेट 1.6 है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 1.7 है। लड़कियों में उच्च शिक्षा के प्रसार से जनसंख्या नियंत्रण में भी सहूलियत होगी।

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