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फाइन का डर नहीं, नगर निगम में किसी पेट डॉग का रजिस्ट्रेशन नहीं

आलोक द्विवेदी

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 04:51 AM IST
आलोक द्विवेदी
राजधानी में पेट डॉग की संख्या लगभग 10 हजार है। इसके बावजूद नगर निगम में किसी भी डॉग का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। डॉग के मालिक की बात दूर नगर निगम के कर्मचारियों को भी नहीं पता है कि डॉग का रजिस्ट्रेशन होता है। डॉग रजिस्ट्रेशन का क्या नियम है और इससे होने वाले फायदे के बारे में भी लोगों को पता नहीं है।

रजिस्ट्रेशन के लिए मुख्यालय से कार्यालय तक की भागदौड़

डॉग रजिस्ट्रेशन के लिए नगर निगम के मुख्यालय से आंचलिक कार्यालय तक भाग-दौड़ करनी पड़ती है। नगर निगम में यदि आप डॉग रजिस्ट्रेशन के लिए फॉर्म मांगते हैं तो वहां के अधिकतर कर्मचारी आप का चेहरा देखने लगेंगे। यदि आप उन्हें किसी तरह से समझा दें तो वे आप को निबंधन कार्यालय या फिर जहां दुकान का रजिस्ट्रेशन होता है, वहां भेज देंगे। फॉर्म के लिए नगर निगम के अधिकारियों से संपर्क करने के बाद नूतन राजधानी अंचल कार्यालय में रजिस्ट्रेशन की जानकारी मिलती है। फॉर्म भरते समय उसमें आपको आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, फोटो लगाने के साथ ही डॉगी की नस्ल और उसकी खरीद की तारीख भी भरनी होगी। उसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।

जुर्माने का है प्रावधान

बिना रजिस्ट्रेशन के डॉग पालना क्राइम की श्रेणी में आता है। डॉग खरीदने के बाद एक हफ्ते के अंदर ही उसके मालिक को इसकी सूचना नगर निगम कार्यालय में देनी होती है। डॉग रजिस्ट्रेशन के लिए निगम से मिले एक फॉर्म को भरने के बाद प्रक्रिया बढ़ती है। इसके लिए 100 रुपए फीस निर्धारित है। बगैर रजिस्ट्रेशन के डॉग पालने पर उसे जब्त करने के साथ ही मालिक पर 15 सौ रुपए से 2000 रुपए जुर्माना लग सकता है। ये जुर्माना डॉग के नस्ल और क्वालिटी के आधार पर लगाई जाती है। 2010 से पहले एक दर्जन से अधिक डॉग का रजिस्ट्रेशन हुआ था, लेकिन उसका रिन्यूवल नहीं हुआ। निगम ने रजिस्ट्रेशन के लिए लोगों को जागरूक नहीं किया।

रजिस्ट्रेशन के बाद डॉग को मिलता है नंबर

डॉग रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरने के बाद नगर निगम के कर्मचारी उसका वेरिफिकेशन करते हैं। इसके बाद उसे रेबिज, कैनाइन एडिनो टू वायरस, पारवो, कैनाइन पैरा इंफ्लुएंजा, लिप्टोस्पारिसिस, ग्याडिया, एडिनो वायरस जैसे वैक्सीन लगाए जाते हैं। इसके बाद एक रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाता है जो एक चेन के माध्यम से डॉग के गले में पहनाया जाता है। यह नंबर ही डॉग की पहचान है। वैक्सीन लगे डॉग के काटने से बीमारी होने का डर कम रहता है। डॉग के गायब होने पर नगर निगम भी खोजने में सहयोग करता है। बिना रजिस्ट्रेशन के पेट डॉग के काटने पर पीड़ित व्यक्ति कानूनी सहायता लेकर मुआवजा के लिए कोर्ट का सहारा ले सकता है।

पालतू जानवरों के रजिस्ट्रेशन का प्रयास किया जा रहा है। पेट डॉग व अन्य जानवरों की भी जानकारी इकट्‌ठी कर डाटा तैयार किया जाएगा।  विशाल आनंद, अपर नगर आयुक्त, पटना

संसाधन के अभाव में लोगों को जागरूक नहीं किया गया। जिन घरों में पालतू जानवर हैं, वे संबंधित कार्यालय में उसके बारे में सभी जानकारी दें।  शैलेश कुमार, कार्य. पदाधिकारी, नूतन राजधानी अंचल