दाहा नदी को बचाने के लिए नहीं उठी आवाज अब प्रत्याशियों की बोलती बंद करेगी जनता

Patna News - सिसवन प्रखंड के बखरी गांव में गड्ढे की तरह दिख रही दाहा नदी। तटीय इलाके में खेती करने से डरते हैं किसान सिसवन...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 05:21 AM IST
Siwan News - no voice raised to save dah river will stop the speaker39s speech
सिसवन प्रखंड के बखरी गांव में गड्ढे की तरह दिख रही दाहा नदी।

तटीय इलाके में खेती करने से डरते हैं किसान

सिसवन प्रखंड के बखरी गांव समेत अन्य गांवों में तो नदी बड़े पैमाने पर कटाव कर चुकी है और दर्जनों एकड़ भूमि नदी के गर्भ में समा चुकी है। फिर भी किसी भी कटाव निरोधी कार्य नहीं कराया जाता है। बरसात के दिनों में तटीय इलाकों में नदी के पानी में हजारों हेक्टेयर फसलें डूब जाती है। इससे किसानों को बड़े पैमाने पर नुकसान होता है। ऐसा प्रत्येक साल होता है। इससे आजिज किसान तटीय इलाकों में खेती करने से भी अब परहेज करने लगे हैं। यहां तक कि बाढ़ नियंत्रण विभाग भी इस नदी पर ध्यान नहीं देता है। लोगों का मानना है कि अगर इस नदी की सफाई पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसका अस्तित्व आने वाले दिनों में खत्म हो जाएगा। गर्मी ने दस्तक दे दी है। अब पीने के पानी के लिए भी लोग इधर-उधर भटकेंगे।

नदी में बन रहे मकान से सिमटता जा रहा नदी का दायरा

सीवान शहर के लोग भी इस नदी के अस्तित्व को पूरी तरह खत्म करने की तैयारी में हैं। नदी के किनारे नदी की जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। नदी के गर्भ में घर बनाए जा रहे हैं। इससे नदी का दायरा सिमटता जा रहा है। लेकिन, अवैध रूप से हो रहे मकान निर्माण को रोकने में नगर परिषद व जिला प्रशासन पूरी तरह उदासीन है। साथ ही किसी भी जनप्रतिनिधियों ने इस संदर्भ में कोई आवाज नहीं उठाई। इससे अवैध कब्जा करनेवालों का मनोबल बढ़ता जा रहा है। नदी की जमीन पर हो रहे अवैध निर्माण का जवाब भी जनता के बीच प्रत्याशियों को देना होगा कि आखिर इसे रोकने के लिए उसने क्या कदम उठाया।

नाली की तरह दिख रही सीवान शहर के बीच से गुजर रही दाहा नदी।

कभी फसलों के पटवन में भी थी मुख्य भूमिका

हर तरफ लोकसभा चुनाव की चर्चाएं हैं। प्रत्याशी वोटरों के पास उनका वोट मांगने जाएंगे। उस दौरान कई लुभावने वायदे भी करेंगे। लेकिन, इस बार चुनाव में दाहा नदी के अस्तित्व संकट का मामला मुद्दा बनकर उभरेगा। जनता प्रत्याशियों से यह जानने का प्रयास करेगी कि आखिर दाहा नदी के लिए उन्होंने आजतक क्या किया। जनता के सवाल का जवाब देना भी प्रत्याशियों के लिए मुश्किल होगा। जनता इस सवाल पर प्रत्याशियों को घेरेगी। यह नदी गोपालगंज जिले के सासासमुसा चौरीचौरा चंवर से निकलती है, जो सीवान सदर, सीवान शहर, हुसैनगंज, आंदर, हसनपुरा व सिसवन होकर सारण जिले में चली जाती है और वहीं पर सरयू नदी में मिल जाती है। इस नदी में रोज स्नान करने के साथ ही इसके पानी से लोग घरेलू काम का निबटारा करते थे। यहां तक कि नदी के तटीय इलाके में नदी के पानी से फसलों की सिंचाई की जाती थी। लेकिन अब यह नदी किसी काम के लिए नहीं रह गई है। जहां पर नदी पतली होकर सूख रही है, वहां पर नदी की गहराई व चौड़ाई बढ़ाने का भी काम नहीं किया गया। इससे नदी की गहराई व चौड़ाई भी कम हो गई है। दाहा नदी बरसात के दिनों में उफान पर होती है। इससे कई गांवों में उपजाऊ भूमि नदी के कटाव से उसके गर्भ में समा जाती है। फिर भी कटाव को रोकने का काम नहीं किया जाता है।

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