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पटना. होली और गुलाल...सीधा संबंध है। लेकिन एक द्वंद्व है-हमउम्र के गाल पर गुलाल लगाना आम है तो क्या बड़ों के पैर पर रखना भी उचित है? मिथिला, वज्जिका, अंगिका, मगध से लेकर भोजपुरी भाषा-भाषी क्षेत्र में अबीर-गुलाल के इस्तेमाल बारे में अलग धारणाएं हैं। धर्म शास्त्रों के जानकार कहते है कि पैर पर अबीर रखने के उदाहरण शास्त्रों में नहीं मिलते हैं। यह लोक परंपरा की उपज है। लेकिन कुछ ऐसे बुजुर्ग भी हैं, जो अबीर को पवित्र मान इसे पैर पर रखने से मना करते हैं।
पटना हनुमान मंदिर के शोध प्रभारी भवनाथ झा कहते हैं कि बड़ों के पैर पर अबीर रखने की परंपरा मिथिला में पुरानी नहीं है। आज भी कई बुजुर्ग ऐसे हैं, जो पैर पर अबीर रखने से मना करते हैं। वे अबीर को पवित्र मानते हैं, इसीलिए पैर पर रखवाने से परहेज करते हैं। वहीं डॉ रामाधार शर्मा कहते हैं कि शास्त्रों में बड़ों के पैर पर अबीर रखने की परंपरा नहीं है, यह लोक की उपज है। हम देवी-देवताओं के पैर पर अबीर रख श्रद्धा प्रकट करते हैं। बड़े बुजुर्ग भी देवता-समान ही हैं। संभव है यह परंपरा इसी दृष्टि से शुरू हुई हो। मगध क्षेत्र में पैर पर अबीर देने की परंपरा बहुत पुरानी है।
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